करोड़ों खर्च हुए, पहाड़ भी कट गया, फिर क्यों अधर में अटकी ज्वाला माता मंदिर की सड़क?

Last Updated:June 22, 2026, 07:44 IST
Ground Report: जयपुर के जोबनेर में स्थित प्रसिद्ध ज्वाला माता मंदिर की पौने दो किलोमीटर लंबी पहाड़ी सड़क पिछले चार वर्षों से अधूरी है. मार्च 2022 में ₹4.29 करोड़ की लागत से शुरू हुए इस काम में पहाड़ काटने के बाद टेंडर निरस्त होने से काम रुक गया था. जून 2024 में कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की पहल पर ₹3.60 करोड़ की अतिरिक्त राशि स्वीकृत होने के बाद भी निर्माण की गति काफी धीमी है. सड़क और दो बड़ी पार्किंग्स का काम अधूरा होने से नवरात्रों में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों को कठिन चढ़ाई करनी पड़ रही है. विभाग ने अब नए साल तक काम पूरा होने का भरोसा दिया है.
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जयपुर: जयपुर जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक कस्बे जोबनेर में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां ज्वाला माता मंदिर तक सुगम सड़क मार्ग से पहुंचने का श्रद्धालुओं का सपना पिछले चार वर्षों से अधूरी सड़क के कारण अधर में अटका हुआ है. श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए पहाड़ी पर शुरू किया गया करीब पौने दो किलोमीटर (1.75 किमी) लंबा सड़क निर्माण कार्य आज भी अपनी पूर्णता की राह देख रहा है. इस अधूरी सड़क का सीधा और नकारात्मक असर न केवल देश-विदेश से आने वाले दर्शनार्थियों पर पड़ रहा है, बल्कि इसके कारण जोबनेर शहर की मुख्य यातायात व्यवस्था भी चरमरा रही है और स्थानीय रोजगार की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा हुआ है.
जोबनेर का ज्वाला माता मंदिर संपूर्ण राजस्थान और देश के अन्य राज्यों के लाखों लोगों की गहरी आस्था का एक बड़ा केंद्र है. हर साल विशेष रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्र के पावन मेलों के दौरान यहाँ माता के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. लेकिन मंदिर तक जाने के लिए आज भी लोगों को बेहद संकरी, पथरीली और कठिन चढ़ाई वाले पुराने रास्तों का सामना करना पड़ता है. वाहनों के सीधे मंदिर तक न पहुंच पाने के कारण विशेष रूप से बुजुर्गों, दिव्यांगों, बीमार व्यक्तियों और छोटे बच्चों के साथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सफर किसी बड़ी और थका देने वाली चुनौती से कम नहीं बना हुआ है.
साल 2022 में 4.29 करोड़ की लागत से शुरू हुआ था पहाड़ी रास्ता काटने का कामग्राउंड रिपोर्ट के दौरान स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने बताया कि इस महत्वपूर्ण पहाड़ी सड़क निर्माण कार्य की विधिवत शुरुआत 6 मार्च 2022 को हुई थी. उस समय इस परियोजना के लिए सरकार द्वारा 4.29 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत स्वीकृत की गई थी और संबंधित ठेकेदार व विभाग को छह महीने के भीतर काम पूरा करने का कड़ा लक्ष्य दिया गया था. चूंकि यह पूरा क्षेत्र पथरीला और पहाड़ी है, इसलिए शुरुआती चरण में पहाड़ काटने, चट्टानें हटाने और मार्ग तैयार करने का लगभग 70 प्रतिशत काम काफी तेजी से पूरा भी कर लिया गया था. इस प्रगति को देखकर स्थानीय लोगों और भक्तों में उम्मीद जगी थी कि अब जल्द ही उनके वाहन सीधे माता के दरबार तक पहुंच सकेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद यह काम अचानक पूरी तरह ठप पड़ गया.
कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने दिए 3.60 करोड़, फिर भी रफ्तार बेहद धीमीपहाड़ कटने के बाद आगे के पक्के निर्माण कार्य के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन ठेकेदार द्वारा काम समय पर न संभालने के कारण उस टेंडर को निरस्त करना पड़ा. नतीजतन, सड़क निर्माण का यह प्रोजेक्ट वर्षों तक फाइलों में ही अधर में लटका रहा और श्रद्धालुओं को मजबूरन पुराने और खतरनाक रास्तों का ही सहारा लेना पड़ा. इस गंभीर स्थिति और जनभावनाओं को देखते हुए जून 2024 में क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की विशेष पहल पर सरकार द्वारा 3.60 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बजट राशि स्वीकृत की गई. इस अतिरिक्त बजट के मिलने के बाद पहाड़ी पर नालियों, सेफ्टी वॉल (सुरक्षा दीवार) और अन्य सुरक्षा संबंधी तकनीकी कार्य दोबारा शुरू तो हुए, लेकिन निर्माण की कछुआ गति के कारण सड़क आज (जून 2026) भी पूरी तरह से तैयार नहीं हो सकी है.
परियोजना के तहत दो बड़ी पार्किंग का हो रहा है निर्माणइस वृहद सड़क परियोजना के डिजाइन के तहत पहाड़ी मार्ग पर श्रद्धालुओं के वाहनों की सुगम आवाजाही के लिए दो बड़ी पार्किंग विकसित की जा रही हैं. इसमें पहली पार्किंग मंदिर से करीब 800 मीटर की दूरी पर बनाई जा रही है, जिसकी क्षमता 50 से अधिक वाहनों को पार्क करने की होगी. वहीं, मुख्य मंदिर के बिल्कुल निकट दूसरी बड़ी पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ एक साथ 100 से 125 चार पहिया वाहनों के खड़े होने की बेहतरीन व्यवस्था होगी. यह सड़क और दोनों पार्किंग का काम पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को बहुत बड़ी राहत मिलेगी और जोबनेर शहर के मुख्य बाजार में लगने वाला भारी ट्रैफिक का दबाव भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा.
पर्यटन और स्थानीय व्यापार को नए साल 2027 से आसस्थानीय व्यापारियों, भोजनालय संचालकों और निवासियों का दृढ़ता से मानना है कि यह सड़क बनते ही जोबनेर में धार्मिक पर्यटन को एक नया और बड़ा बढ़ावा मिलेगा. मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी, जिससे स्थानीय दुकानों, धर्मशालाओं, परिवहन सेवाओं और छोटे-मोटे हस्तशिल्प कारोबारियों की आय में भी भारी इजाफा होगा. फिलहाल, जोबनेर की जनता और श्रद्धालुओं की निगाहें सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) पर टिकी हुई हैं, जिसने अब नए साल (जनवरी 2027) तक इस पूरी सड़क का निर्माण कार्य हर हाल में पूरा करने की नई उम्मीद जताई है. पिछले चार वर्षों से इंतजार कर रहे श्रद्धालु अब उत्सुकता से उस शुभ दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जब उनके वाहन बिना किसी बाधा के सीधे माता के चरणों में पहुंच सकेंगे.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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