Rajasthan

पानी की मांग बदली जातियों की वर्चस्व की लड़ाई में, समझें पांचना का पूरा पेंच

Last Updated:June 17, 2026, 15:19 IST

Panchna Dam Farmers Agitation : राजस्थान के पांचना बांध का पानी दो जिलों के बीच उलझकर रह गया है. वहीं पानी की यह जंग अब जातीय संघर्ष में भी तब्दील होती दिखाई दे रही है. पांचना बांध के पानी की मांग को लेकर मीणा पट्टी और गुर्जर पट्टी के किसान लगभग आमने सामने आ गए हैं. जानें क्या है यह विवाद और क्यों है चर्चा में. पांचना बांध किसान आंदोलन: पानी की मांग बदली जातियों की वर्चस्व की लड़ाई मेंZoomसवाई माधोपुर के खंडीप गांव में बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हैं.

गिरीराज शर्मा/धर्मेन्द्र शर्मा

सवाई माधोपुर/करौली. राजस्थान के करौली जिले में स्थित पांचना बांध फिर चर्चा में है. करीब दो दशक से पांचना बांध के पानी का विवाद बना हुआ है. लेकिन इसका अभी तक समाधान नहीं निकल पाया है. बीते एक मई को उच्च न्यायालय की ओर से 3 सप्ताह में नहरों में बांध से पानी छोड़ने के आदेश दिए जाने के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया. इस बांध के कमांड एरिया में कुल 35 गांव आते हैं. इनमें करौली जिले के साथ ही इससे सटे सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी विधानसभा क्षेत्र गांव भी शामिल हैं. कमांड एरिया वाले गांव चाहते हैं पांचना बांध की नहरों से उनके खेतों को पानी मिले. लेकिन करौली जिले में पांचना बांध के आसपास के दूसरे 39 गांव वाले चाहते हैं कि नहर का पानी पहले उन्हें मिले. उनकी पूर्ति पूरी होने के बाद अन्य को दिया जाए. वहीं यह मामला अब पानी तक सीमित नहीं रहकर जाति के वर्चस्व की भी जंग बन गया है.

दरअसल कमांड एरिया के 35 गावों के लोग अपनी मांग को लेकर 13 दिन से गंगाुर सिटी इलाके के खंडीप गांव में महापड़ाव डाले हुए बैठे हैं. 5 जून से अपनी अपनी मांगों को मनवाने के लिए महापड़ाव डाले बैठे ये किसान सोमवार, मंगलवार और बुधवार को लगातार तीन दिन तक रेलवे ट्रैक भी जाम कर चुके हैं. उनकी मांग है कि नहरों में पानी छोड़ा जाए. यह विवाद पिछले 20 साल से चला आ रहा है. पांचना बांध के निर्माण कार्य से लेकर अब तक इस मसले की लड़ाई कमांड एरिया के गांवों की तरफ से गंगापुर सिटी विधायक रामकेश मीणा लड़ते आ रहे हैं. लेकिन उन्हें आज तक सिंचाई के लिए बांध की नहर से पानी नहीं मिला. दूसरी तरफ पांचना बांध के आसपास के करौली जिले के बांध के आसपास के 39 गांवों के किसान चाहते हैं कि पांचना बांध का पानी पहले उन्हें मिले. इन गांवों के लोग भी अपनी मांग को लेकर 15 मई से पांचना बांध पर धरना दिए बैठे हैं.

28 जून को रेल रोकने की चेतावनीअब इस मामले में एक और लड़ाई जातिवाद को लेकर भी शुरू हो गई है. गंगापुर सिटी में मीणा समाज इसकी लड़ाई लड़ रहा है तो दूसरी ओर करौली जिले के गुर्जर समाज के लोग इस मामले को लेकर अपनी जिद पर अड़े हुए हैं. ऐसे में अब यह लड़ाई केवल बांध से पानी की नहीं बल्कि जातियों के वर्चस्व की भी हो रही है. गंगापुर सिटी में समूचे आंदोलन का नेतृत्व विधायक रामकेश मीणा कर रहे हैं. वहीं डाउनस्ट्रीम के 39 गांवों की पंचायती की कमान गुर्जर समाज के अशोक सिंह धाबाई के पास है. खंडीप में बैठे ग्रामीणों ने 28 जून को रेल रोकने की चेतावनी भी दे रखी है.

यह है पूरा विवादइस बांध का निर्माण 1978 में शुरू हुआ था. उस समय इसे पहले एशिया का मिट्टी का सबसे बड़ा बांध बनाया जाना था. लेकिन बाद में इसे पक्का बनाया गया. इसकी लागत 130 करोड़ के करीब आई है. इसका निर्माण 2004-05 पूरा हुआ था. इससे 2005 में एक बार ही नहरों में पानी छोड़ा गया था. उसके बाद कभी नहीं छोड़ा गया. करौली जिला मुख्यालय के समीप स्थित पांचना बांध की कुल भराव क्षमता 258.62 मीटर यानी 2100 एमसीएफटी है. बांध से करौली और सवाईमाधोपुर (गंगापुरसिटी क्षेत्र) जिलों के कमांड क्षेत्र के 35 गांवों की करीब 9985 हैक्टेयर भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन 2005 के बाद से अब तक सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा सका है.

हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद यह मसला फिर गरमा गयाइसके पीछे कारण बांध की डाउन स्ट्रीम के 39 गांवों के किसानों की मांग उनको पानी उपलब्ध कराने की है. इन गांवों के किसानों का कहना है कि बांध निर्माण के दौरान उनकी भूमि-खेत चले गए. ऐसे में पहले बांध से पानी उन्हें मिलना चाहिए. जबकि दूसरी तरफ कमांड क्षेत्र के किसान लगातार पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं. इसी विवाद के चलते नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा सका है. इस बीच शासन-प्रशासन की ओर से दोनों पक्षों में सहमति बनाने के भी प्रयास खूब किए गए, लेकिन ऐसा हो नहीं सका. अब हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद यह मसला फिर गरमा गया.

गंभीर नदी तट के किसान और ग्रामीण भी कर रहे हैं पानी की मांगकंमाड एरिया वाले गांवों से पहले इस मसले को लेकर गत 15 मई को बांध के डाउनस्ट्रीम वाले के करौली जिले के 39 गांवों के किसानों की पांचना बांध पर महापंचायत हुई थी. उसमें किसानों ने एक स्वर में पहले क्षेत्र के 39 गांवों को पानी देने की बात दोहराई. साथ ही उसी दिन से बांध पर निगरानी के लिए धरने पर बैठे हैं. गांववार धरना दिया जा रहा है. यह धरना 30 जून तक निर्धारित किया गया है. इसी बीच तीसरे पक्ष के रूप में गंभीर नदी तट के किसान और ग्रामीण भी बांध से पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं. पांचना बांध गंभीरी नदी पर बना है।

गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना से भी हल नहीं हो पाई समस्याहालांकि इस विवाद के समाधान के लिए राज्य सरकार की ओर से गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना का निर्माण कराया गया था. लेकिन बांध के समीपवर्ती किसानों का कहना है कि इस परियोजना से क्षेत्र के सभी गांवों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. वहीं परियोजना का कार्य भी घटिया स्तर हुआ है. अब सरकार की ओर से इस परियोजना को पूर्ण कराने सहित वंचित गांवों को भी पानी उपलब्ध कराने के लिए इसी बजट में 50 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया था. उसकी डीपीआर का कार्य चल रहा है. गंगापुरसिटी क्षेत्र के खंडीप गांव में चल रही महापंचायत में रोज एक गांव को जिम्मेदारी दे रखी है. वहां से हजारों की संख्या में किसान महापंचायत में पहुंचते हैं और 24 घण्टे ड्यूटी निभाते हैं. उनके खाने-पीने और नाश्ते की सुविधा वहीं पर उपलब्ध कराई जा रही है.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें

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