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क्या आप इस ऐतिहासिक धरोहर को जानते हैं? राजस्थान के इस शहर में 1913 में ही बन गई थी विधानसभा!

Last Updated:July 10, 2026, 12:14 IST

Bikaner Dharohar: बीकानेर के शिक्षा निदेशालय परिसर में स्थित ऐतिहासिक भवन उत्तर भारत की पहली विधानसभा होने का गौरव रखता है. 1913 में महाराजा गंगा सिंह द्वारा स्थापित यह प्रतिनिधि सभा आज भी अपनी स्थापत्य कला के लिए जानी जाती है. इसमें ऊंची छत, कलात्मक नक्काशी और अनोखे उल्टे पंखे लगे हुए हैं. यह भवन भारतीय लोकतंत्र के विकास और बीकानेर की दूरदर्शी शासन व्यवस्था का जीवंत प्रतीक है, जो आज भी रियासती कालीन लोकतांत्रिक मूल्यों को सहेजकर रखे हुए है.

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Bikaner: आधुनिक लोकतंत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इस लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ें राजस्थान के बीकानेर में एक सदी से भी पहले जम चुकी थीं? बीकानेर शहर के शिक्षा निदेशालय परिसर में स्थित एक ऐतिहासिक भवन आज भी उस गौरवशाली लोकतांत्रिक परंपरा का मूक साक्षी बना हुआ है, जिसकी नींव महाराजा गंगा सिंह ने रखी थी.

वर्ष 1913 में महाराजा गंगा सिंह ने बीकानेर राज्य की प्रतिनिधि सभा की स्थापना की थी. इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह उत्तर भारत की पहली और पूरे भारत में मैसूर के बाद दूसरी ऐसी प्रतिनिधि सभा थी. उस दौर में जब भारतीय रियासतों में जनभागीदारी का अभाव था, महाराजा गंगा सिंह का यह कदम बेहद साहसी और दूरदर्शी था. उन्होंने जनता की आवाज को शासन का हिस्सा बनाने के लिए इस मंच का गठन किया था.

स्थापत्य कला और वास्तुकला का बेजोड़ नमूनायह भवन केवल एक राजनीतिक केंद्र नहीं, बल्कि वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण भी है. राजकीय डूंगर महाविद्यालय के इतिहास विभाग के सहायक आचार्य डॉ. श्रीराम नायक के अनुसार, इस भवन की भव्यता आज भी पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती है. इसके विशाल सभा कक्ष की ऊंची छत, अर्धवृत्ताकार डिजाइन, नक्काशीदार खिड़कियां और विशाल लकड़ी के दरवाजे अंग्रेजी शैली और भारतीय स्थापत्य के मिश्रण को दर्शाते हैं. कहा जाता है कि उस समय इस विशाल हॉल में 100 से अधिक सदस्य एक साथ बैठकर राज्य के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा किया करते थे.

वास्तुकला की अनोखी विशेषताइस भवन की सबसे खास और अनोखी पहचान यहाँ लगे ‘उल्टे पंखे’ हैं. ऊंची छत के कारण हवा के उचित संचार (वेंटिलेशन) के लिए उस समय यह इंजीनियरिंग का अनूठा तरीका अपनाया गया था. लंबी रॉड से लटके ये पंखे आज भी उस दौर की आधुनिक सोच और निर्माण तकनीक की याद दिलाते हैं. भवन के अंदर लगी पुरानी पेंटिंग्स और कलात्मक नक्काशी भी बीकानेर की समृद्ध रियासती विरासत को जीवंत करती हैं.

संरक्षण और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणावर्तमान में यह ऐतिहासिक इमारत शिक्षा निदेशालय के रूप में उपयोग में लाई जा रही है. हालांकि, इसकी दीवारें आज भी बीकानेर के लोकतांत्रिक इतिहास की गाथा सुनाती हैं. इतिहासकारों का मानना है कि इस धरोहर का और बेहतर संरक्षण होना चाहिए. यह भवन नई पीढ़ी को यह सिखाता है कि लोकतंत्र की जड़ें हमारे इतिहास में कितनी गहरी हैं. यह भवन बीकानेर की उस दूरदर्शी शासन व्यवस्था का प्रतीक है, जिसने देश के अन्य हिस्सों से पहले लोकतंत्र की मशाल जलाई थी.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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