Rajasthan

मानसून से पहले किसान कर लें ये 5 काम, खरीफ फसलों में मिलेगा बंपर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा

Last Updated:June 16, 2026, 07:17 IST

Pre-Monsoon Farming Preparations Tips: राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के साथ किसानों ने खरीफ फसलों की तैयारी तेज कर दी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मानसून से पहले मिट्टी परीक्षण, खेत की गहरी जुताई, प्रमाणित बीजों का चयन और बीज उपचार जैसे कदम फसल उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. मिट्टी जांच से पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है, जबकि गहरी जुताई से कीट और खरपतवार नियंत्रित होते हैं. विशेषज्ञ किसानों को जल निकासी की उचित व्यवस्था करने और जैविक खादों का उपयोग बढ़ाने की भी सलाह दे रहे हैं, ताकि फसल को बेहतर शुरुआत मिल सके.

मानसून से पहले की गई सही तैयारी किसानों के लिए पूरे सीजन में फायदेमंद साबित हो सकती है. मिट्टी परीक्षण, अच्छी जुताई, प्रमाणित बीजों का चयन, जल निकासी की व्यवस्था और संतुलित पोषण प्रबंधन जैसे छोटे-छोटे कदम फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. दक्षिण-पश्चिम मानसून के राजस्थान में पहुंचने के साथ ही किसानों ने खरीफ फसलों की तैयारी तेज कर दी है. खेतों की जुताई से लेकर बीज और उर्वरकों की व्यवस्था तक, इस समय किसान आगामी फसल सीजन को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून से पहले कुछ जरूरी तैयारियां कर ली जाएं तो फसल उत्पादन बेहतर होने के साथ लागत भी कम की जा सकती है.

उदयपुर के महाराणा प्रताप एग्रीकल्चर कॉलेज विशेषज्ञों के अनुसार, खेती की शुरुआत खेत की मिट्टी की जांच से करनी चाहिए.मिट्टी परीक्षण से यह पता चल जाता है कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है. इसके आधार पर किसान संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरकों का उपयोग कर सकते हैं. इससे फसल की वृद्धि अच्छी होती है और अनावश्यक खर्च से भी बचाव होता है.

मानसून से पहले खेत की गहरी जुताई करना फसल उत्पादन के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गहरी जुताई से मिट्टी में छिपे कीट, उनके अंडे और खरपतवार नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों पर नियंत्रण मिलता है. इसके अलावा मिट्टी भुरभुरी होने से वर्षा का पानी आसानी से जमीन में समा जाता है और लंबे समय तक नमी बनी रहती है. इससे पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है और फसल को पर्याप्त नमी मिलती है. गहरी जुताई मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और बेहतर पैदावार प्राप्त करने में भी सहायक होती है.

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कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को हमेशा प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का ही उपयोग करना चाहिए. क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और मौसम के अनुसार उपयुक्त किस्मों का चयन करने से फसल की वृद्धि बेहतर होती है और पैदावार बढ़ने की संभावना रहती है. विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना भी बेहद जरूरी है. बीज उपचार से फसलों को शुरुआती अवस्था में लगने वाले रोगों, फफूंद और कीटों से सुरक्षा मिलती है. इससे पौधों का अंकुरण बेहतर होता है और स्वस्थ फसल तैयार होने में मदद मिलती है.

बारिश के मौसम में जल निकासी की व्यवस्था भी बेहद जरूरी होती है. कई बार अधिक वर्षा के कारण खेतों में पानी भर जाता है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचता है. इसलिए किसानों को पहले से ही खेतों में नालियों और जल निकासी के उचित प्रबंध कर लेने चाहिए. विशेषज्ञ किसानों को जैविक खाद और गोबर खाद के उपयोग की भी सलाह दे रहे हैं. इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और लंबे समय तक उत्पादन क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. साथ ही रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होती है.

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखना भी जरूरी है.बारिश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बुवाई का समय तय करने से फसल को बेहतर शुरुआत मिलती है. जल्दबाजी या देरी से की गई बुवाई कई बार उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा किसानों को कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली सलाह का पालन करना चाहिए. नई तकनीकों, आधुनिक उपकरणों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है.

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