ऑफिस की कुर्सी से HYROX के ट्रैक तक, भूपेश मालव ने रचा फिटनेस का इतिहास

Last Updated:August 09, 2026, 12:45 IST
KDA STP Bhupesh Malav: कोटा विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ नगर नियोजक भूपेश मालव ने दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिटनेस स्पर्धा ‘हाइरोक्स’ की कठिन ‘प्रो कैटेगरी’ रेस को सफलतापूर्वक पूरा कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. दफ्तरी व्यस्तताओं के बावजूद उन्होंने अनुशासित दिनचर्या और 5-6 महीनों की कड़ी मेहनत से 8 किमी रनिंग और 8 वर्कआउट स्टेशन्स वाली इस रेस को जीता. उन्होंने कामकाजी लोगों को नियमित वर्कआउट और बेहतर टाइम मैनेजमेंट का फिटनेस मंत्र भी दिया.
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KDA STP Bhupesh Malav: टेबल और चेयर पर घंटों बैठकर काम करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) के वरिष्ठ नगर नियोजक (STP) भूपेश मालव एक नई मिसाल बनकर उभरे हैं. भूपेश मालव ने दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिटनेस प्रतियोगिता ‘हाइरोक्स’ (HYROX) में अपनी शारीरिक क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. रोजमर्रा की दफ्तरी व्यस्तताओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने इस बेहद चुनौतीपूर्ण रेस में भाग लिया और सबसे कठिन मानी जाने वाली ‘प्रो कैटेगरी’ को सफलतापूर्वक पूरा कर कोटा का नाम रोशन किया है.
हाइरोक्स अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक कठिन और चर्चित फिटनेस स्पर्धा है, जिसकी शुरुआत जर्मनी से हुई थी. आज यह वैश्विक स्तर पर फिटनेस प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है. इस प्रतियोगिता का फॉर्मेट बेहद अनूठा और चुनौतीपूर्ण होता है. इसमें हिस्सा लेने वाले एथलीट्स को कुल 8 किलोमीटर की दौड़ लगानी होती है. खास बात यह है कि इस 8 किलोमीटर की रनिंग के दौरान बीच-बीच में 8 अलग-अलग वर्कआउट स्टेशन्स बनाए जाते हैं, जहां प्रतिभागियों को भारी-भरकम शारीरिक टास्क और फंक्शनल वर्कआउट पूरा करना पड़ता है.
स्लॉट नहीं मिलने पर मजबूरी में चुनी ‘प्रो कैटेगरी’अपनी इस उपलब्धि का अनुभव साझा करते हुए सीनियर टाउन प्लानर भूपेश मालव ने बताया कि एक सरकारी अधिकारी होने के नाते उनका ज्यादातर समय कार्यालय में एक ही जगह बैठकर फाइलें निपटाने में बीतता था. अपनी सेहत में सुधार लाने के उद्देश्य से उन्होंने जिम जाना शुरू किया, जहां साथी ट्रेनर्स और दोस्तों ने उन्हें इस अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा के लिए प्रेरित किया. मालव ने बताया कि वे मूल रूप से ‘ओपन कैटेगरी’ में भाग लेना चाहते थे, लेकिन स्लॉट उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में सबसे कठिन ‘प्रो कैटेगरी’ में रजिस्ट्रेशन कराना पड़ा. प्रो कैटेगरी में वर्कआउट का स्तर और वजन बहुत ज्यादा होता है.
सवा दो घंटे का कड़ा इम्तिहान और मानसिक मजबूतीलगभग सवा दो घंटे तक बिना रुके चले इस कड़े शारीरिक श्रम के अनुभव पर मालव ने कहा कि इतना हैवी वर्कआउट रोज नहीं होता. जब आप डेढ़ से दो घंटे तक शरीर को उसकी चरम सीमा तक धकेलते हैं, तो हर कदम पर रेस छोड़ने का ख्याल आता है. इसके लिए 5 से 6 महीनों का हार्ड वर्क, अनुशासित खान-पान और सही दिनचर्या जरूरी होती है. उन्होंने कहा कि हाइरोक्स पूरा करने पर मिलने वाला ‘बैज’ अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है.
व्यस्त कामकाजी लोगों के लिए दिए फिटनेस मंत्रअपनी सफलता का श्रेय साथी ट्रेनर्स अंकुश और विपुल को देते हुए भूपेश मालव ने युवाओं और कामकाजी लोगों के लिए खास टिप्स साझा किए:
समय का सही प्रबंधन: सुबह 9:30 बजे ऑफिस पहुंचने के बावजूद वे अर्ली मॉर्निंग वर्कआउट के लिए समय निकालते थे.
डिसिप्लिन ट्रेनिंग: हफ्ते में 3 से 4 दिन भी 1 से 2 घंटे अनुशासित ट्रेनिंग करने से 2-3 महीनों में शरीर में सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं.
निरंतर सुधार: अपनी दिनचर्या में हर बार 5 से 10 प्रतिशत मेहनत बढ़ाने की कोशिश करें और फिटनेस को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Kota,Kota,Rajasthan
First Published :
August 09, 2026, 12:45 IST



