Goat Care Tips In Rainy Season | Goat Care In Monsoon

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Goat Care Tips: बारिश में बकरियों को बीमार होने से बचाएंगे ये 4 देसी आहार
Last Updated:July 01, 2026, 11:06 IST
Goat Care Tips In Rainy Season: बारिश के मौसम में बकरियों में संक्रमण और पेट के कीड़ों का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचाव के लिए सहजन, नीम गिलोय, अमरूद और नीम की पत्तियां खिलाना बेहद फायदेमंद होता है. ये देसी आहार बकरियों की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, पाचन ठीक रखते हैं और वजन बढ़ाने में मदद करते हैं. इसके साथ ही पशुओं का विकास सही तरीके से हो, इसके लिए पशु चिकित्सक की सलाह पर समय से डीवॉर्मिंग कराना और बीमार होने पर तुरंत इलाज कराना भी बेहद जरूरी है.
बारिश के मौसम में बकरियों के भीतर संक्रमण, पेट के कीड़े और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है, लेकिन अगर पशुपालक इस दौरान उनके खान-पान पर विशेष ध्यान देते हुए समय पर सही आहार दें, तो बकरियों को न सिर्फ स्वस्थ रखा जा सकता है बल्कि उनका वजन भी तेजी से बढ़ाया जा सकता है.
बरसात के दिनों में बकरियों को सहजन यानी मोरिंगा की पत्तियां खिलाना बेहद लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इसकी 100 ग्राम पत्तियों में अच्छी मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और अन्य जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जिन्हें बकरियां आसानी से पचा लेती हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहतर रहने के साथ-साथ वजन बढ़ने में भी काफी मदद मिलती है.
नीम के पेड़ पर उगने वाली गिलोय औषधीय गुणों से भरपूर होती है और इसकी पत्तियां खासकर बकरी के बच्चों के लिए बेहद लाभदायक मानी जाती हैं, क्योंकि सीमित मात्रा में इन्हें खिलाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है जिससे वे जल्दी बीमार नहीं पड़ते हैं.
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अमरूद के पत्तों में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो बकरियों के पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं, इसलिए बरसात के मौसम में इन्हें खिलाने से बकरियां न सिर्फ पूरी तरह स्वस्थ रहती हैं बल्कि उनका शरीर भी मजबूत बनता है.
नीम की पत्तियों में टैनिन जैसे औषधीय तत्व पाए जाते हैं जो बकरियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं, इसलिए बारिश के मौसम में सीमित मात्रा में इन्हें खिलाने से संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है और पशु पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं.
अगर बकरियों के पेट में कीड़े हो जाएं तो उनका विकास पूरी तरह रुक जाता है और चाहे उन्हें कितना भी अच्छा चारा क्यों न खिलाया जाए, उसका पूरा फायदा उनके शरीर को नहीं मिल पाता है, इसलिए समय-समय पर पशु चिकित्सक की सलाह से कृमिनाशक यानी डीवॉर्मिंग दवा देना बेहद जरूरी है, खासकर उन पशुपालकों के लिए जो फार्म में स्टॉल फीडिंग कराते हैं.
बरसात के मौसम में सहजन, नीम गिलोय, अमरूद और नीम की पत्तियां बकरियों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती हैं, हालांकि इन्हें हमेशा संतुलित मात्रा में और सामान्य हरे चारे के साथ मिलाकर ही खिलाना चाहिए, और यदि किसी बकरी में बीमारी के थोड़े भी लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए पशु चिकित्सक से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित उपाय है.



