H1N1 स्वाइन फ्लू के विकराल होने की खतरनाक आहट, जे पी नड्डा ने की बैठक, पर बचे कैसे, जानिए उपाय

Swine Flu H1N1 Outbreak : स्वाइन फ्लू यानी H1N1 इंफ्लूएंजा खतरनाक रूप लेने की कगार पर है. देश में H1N1 के मामले तेजी से बढ़ने लगे है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने इसके लिए एक बड़ी बैठक की है. उन्होंने देश भर के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया है. दिल्ली में स्थिति और ज्यादा भयावह है. पिछले कुछ ही दिनों में दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 1700 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, इसलिए दिल्ली सरकार को तत्काल इस दिशा में उचित कदम उठाने को कहा गया है. नड्डा ने देश भर में इन्फ्लूएंजा की निगरानी और महामारी की स्थिति की समीक्षा करते हुए ILI और Severe Acute Respiratory Infection के ट्रेंड, टेस्टिंग, लैब सर्विलांस और मौसमी इन्फ्लूएंजा के मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों को तैयार रहने के आदेश दिए हैं.
H1N1 स्वाइन फ्लू इंफ्लूएंजा क्या है
H1N1 इंफ्लूएंजा को आमतौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है क्योंकि पहले यह सुअरों में हुआ करता था. लेकिन 2009-10 से यह इंसानों में होने लगा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2009 में H1N1 फ्लू को महामारी घोषित किया था. उस वर्ष इस वायरस के कारण दुनियाभर में 2,84,400 लोगों की मौत हुई थी. अगस्त 2010 में WHO ने महामारी के खत्म होने की घोषणा कर दी. हालांकि महामारी के दौरान फैलने वाला H1N1 फ्लू स्ट्रेन बाद में मौसमी फ्लू पैदा करने वाले वायरस के स्ट्रेन में शामिल हो गया. फ्लू से पीड़ित ज्यादातर लोग अपने आप ठीक हो जाते हैं लेकिन कभी-कभी इसकी जटिलताएं जानलेवा हो सकती हैं. खासकर उन लोगों के लिए जिनमें गंभीर बीमारी का जोखिम अधिक होता है.
स्वाइन फ्लू कैसे फैलती है
एच1एन1 का संक्रमण जब होता है तो यह सांसों की नली में सूजन फैला देता है. इससे सांस से संबंधित बीमारी होती है. स्वाइन फ्लू टाइप-A इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होता है. यह वायरस कोविड-19 या सामान्य सर्दी-जुकाम की तरह ही हवा के जरिए फैलता है. जब कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है या जब आप किसी संक्रमित सतह को छूकर अपनी नाक, आंख या मुंह को छूते हैं, तो यह शरीर में प्रवेश कर जाता है.
स्वाइन फ्लू में क्या परेशानी होती है
मायो क्लीनिक के मुताबिक H1N1 इंफ्लूएंजा वायरस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर नाक, गले और फेफड़ों की एपिथेलियल कोशिकाओं की सतह पर मौजूद सियालिक एसिड से जुड़ जाता है. इसके बाद यह कोशिका के भीतर जाकर अपना आरएनए को गुणित कर लेता है और हेल्दी कोशिका को नष्ट करने लगता है. लेकिन इसी दौरान शरीर का इम्यून सिस्टम सक्रिय होकर भारी मात्रा में साइटोकाइन्स रिलीज करता है. इस सूजन पैदा होती है और यह सूजन श्वसन झिल्ली छतिग्रस्त करने लगती है जिससे फेफड़ों में तरल पदार्थ भरने लगता है. इस कारण ऑक्सीजन का आदान-प्रदान बाधित होता है और निमोनिया या सांस लेने में गंभीर तकलीफ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है.
स्वाइन फ्लू के क्या लक्षण है
H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के लक्षण आमतौर पर सामान्य फ्लू की तरह ही होते हैं. इसमें अचानक और काफी तेज गति से लक्षण उभरते हैं. इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, ठंड लगना, लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी होना और गले में तेज दर्द या खराश महसूस होना शामिल है. इसके अलावा मरीज को सिरदर्द, मांसपेशियों व जोड़ों में तेज ऐंठन, अत्यधिक थकान, कमजोरी और नाक बहने या बंद होने की शिकायत होती है. कुछ मरीजों विशेषकर बच्चों में सांस लेने में तकलीफ के साथ-साथ उल्टी और दस्त जैसी पाचन संबंधी समस्याएं भी देखी जा सकती हैं.
डॉक्टर के पास कब जाएं
यदि आप हेल्दी हैं तो हल्के फ्लू के लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं होती. लेकिन गर्भवती महिलाओं और सांस, अस्थमा, डायबिटीज या दिल की पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. वयस्कों में सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, लगातार चक्कर आना, दौरा पड़ना, पेशाब न आना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण में इमरजेंसी की जरूरत होती है. इसलिए इसे हल्के में लेने की भूल न करें. वहीं, बच्चों में सांस लेने में परेशानी, त्वचा, होंठ या नाखूनों का रंग पीला, भूरा या नीला पड़ना, सीने में दर्द, डिहाइड्रेशन और मांसपेशियों में तेज दर्द दिखने पर तुरंत डॉक्टरी इलाज कराएं.
स्वाइन फ्लू से बचने के लिए क्या करें
स्वाइन फ्लू (H1N1) से बचने के लिए वैक्सीन सबसे प्रभावी तरीका है. 6 महीने या उससे अधिक उम्र के सभी लोग इस वैक्सीन को लगवा सकते है. वैक्सीन लगाने के बाद अगर बीमारी होती भी है तो इतनी गंभीर नहीं होगी. इससे अस्पताल जाने का जोखिम कम हो जाएगा. हालांकि यह वैक्सीन 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, गर्भवती महिलाओं, कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों और अस्थमा पीड़ित बच्चों को नहीं लगानी चाहिए. स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए अपने हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन-पानी या 60% अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र से बार-बार धोएं. खांसते या छींकते समय मुंह को टिशू या कोहनी से ढकें, अपने चेहरे, आंख, नाक, मुंह को छूने से बचें. बार-बार छुई जाने वाली सतहों को नियमित रूप से डिसइन्फेक्ट करें. बीमार लोगों से दूरी बनाएं, लक्षण दिखने पर घर पर रहें और स्वाइन फार्म या पशु मेलों के सूअर बाड़ों में जाने से बचें.



