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Health Tips : जिसे घास-फूस समझते रहे, वो निकला जंगली पुदीना, क्या ये फायदेमंद भी उतना? गोंडा के वैद्य से जानिए

Last Updated:August 25, 2026, 20:57 IST

Wild mint benefits : ग्रामीण इलाकों में पाया जाने वाला जंगली पुदीना, जिसे गंधेली भी कहते हैं, घरेलू चिकित्सा में सदियों से इस्तेमाल होता आया है. इस पौधे में छोटे-छोटे सफेद या हल्के बैंगनी रंग के फूल आते हैं. यह पौधा खेतों के आसपास, खाली जमीन और बगीचों में आसानी से मिल जाता है. लोकल 18 से गोंडा के वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि इसे अलग-अलग इलाकों में जंगली पुदीना, विषादोड़ी और दूसरे स्थानीय नामों से जाना जाता है. जंगली पुदीने का सबसे पारंपरिक उपयोग छोटे घाव और चोट में होता है. इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने की परंपरा रही है. माना जाता है कि इससे खून बहना कम हो जाता है.

गांवों में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं, जिन्हें लोग सामान्य घास या जंगली पौधा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. इन्हीं में से एक पौधा जंगली पुदीना या गंधेली भी है. तस्वीर में दिखाई दे रहे पौधे की पहचान Ageratum conyzoides के रूप में की जाती है. इसे अलग-अलग क्षेत्रों में जंगली पुदीना, विषादोड़ी और दूसरे स्थानीय नामों से जाना जाता है. इस पौधे में छोटे-छोटे सफेद या हल्के बैंगनी रंग के फूल आते हैं. यह पौधा खेतों के आसपास, खाली जमीन और बगीचों में आसानी से दिखाई दे सकता है.

लोकल 18 से गोंडा के वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि जंगली पुदीने को कई जगह पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग किया जाता रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसके पत्ते और दूसरे हिस्सों का इस्तेमाल अलग-अलग घरेलू उपचार में करते रहे हैं. हालांकि, किसी भी औषधीय पौधे का इस्तेमाल करने से पहले उसकी सही पहचान और विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है.

जंगली पुदीने का सबसे पारंपरिक उपयोग छोटे घाव और चोट में होता है. इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने की परंपरा रही है. कुछ जगहों पर लोग इसकी पत्तियों का लेप घाव वाली जगह पर लगाते हैं. इसे घाव भरने में मददगार माना जाता है. हालांकि, गहरे घाव, ज्यादा खून निकलने या चोट गंभीर होने की स्थिति में घरेलू उपचार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से इलाज कराना जरूरी है.

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आयुष चिकित्सा में इस पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल छोटे घाव से होने वाले रक्तस्राव को रोकने के लिए भी होता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने की परंपरा मिलती है. माना जाता है कि इससे खून बहना कम हो जाता है, लेकिन यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि ज्यादा खून बहने पर यह घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं है. ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए.

जंगली पुदीने का इस्तेमाल कुछ स्थानों पर त्वचा से जुड़ी परेशानियों में भी किया जाता है. खुजली, सामान्य त्वचा संक्रमण और जलन जैसी समस्याओं में इसकी पत्तियों का बाहरी इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिलती है. इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पत्तियों को पीसकर लेप तैयार करने की परंपरा है. हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है. किसी भी पौधे का लेप लगाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.

कुछ पारंपरिक उपचार पद्धतियों में जंगली पुदीना का इस्तेमाल दस्त और पेचिश जैसी पेट की समस्याओं में भी होता है. इसके अलग-अलग हिस्सों से तैयार किए गए घरेलू नुस्खों का कई क्षेत्रों में इस्तेमाल होता रहा है. हालांकि, दस्त होने के कई कारण हो सकते हैं. बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर लोगों में लगातार दस्त होने से शरीर में पानी और जरूरी लवण की कमी हो सकती है. इसलिए ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खे के भरोसे रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

पुरानी चिकित्सा में जंगली पुदीना का उपयोग शरीर में होने वाली सूजन और दर्द जैसी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. इसकी पत्तियों का लेप कुछ स्थानों पर बाहरी रूप से इस्तेमाल किया जाता है. वैज्ञानिक स्तर पर भी Ageratum conyzoides पौधे में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्वों को लेकर अध्ययन हुए हैं. इन अध्ययनों में इसके एंटीऑक्सीडेंट, सूजन कम करने और कुछ सूक्ष्मजीवों के खिलाफ संभावित प्रभावों पर शोध किया गया है.

इसके पौधे का इस्तेमाल बुखार और सिरदर्द जैसी सामान्य परेशानियों में होता है. अलग-अलग रोगों में इसके इस्तेमाल का तरीका भी अलग हो सकता है. अगर बुखार लगातार बना रहे, बहुत तेज हो या उसके साथ दूसरी गंभीर परेशानी दिखाई दे तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. इसी तरह लगातार सिरदर्द को भी केवल घरेलू नुस्खे से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

जंगली पुदीना देखने में सामान्य पौधा जरूर है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे पौधे होते हैं जो एक-दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं. इसलिए केवल फोटो देखकर या किसी के बताए नाम के आधार पर किसी पौधे का सेवन नहीं करना चाहिए.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि औषधीय पौधों को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि प्राकृतिक होने का मतलब हमेशा पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं है. किसी पौधे की पत्तियां, जड़, फूल या बीज शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डाल सकते हैं. मात्रा भी महत्वपूर्ण होती है. जंगली पुदीना का रस, काढ़ा या अन्य रूप में सेवन बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए. खासकर गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और पहले से दवाएं ले रहे लोगों को किसी भी जड़ी-बूटी का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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August 25, 2026, 20:57 IST

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