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पेट की बेलगाम चर्बी पर ICMR का महाप्लान, लाखों लोगों पर हो रही रिसर्च, मोटापा दूर करने का निकालेगा फॉर्मूला

Last Updated:April 17, 2026, 18:25 IST

ICMR Plan for Belly Fat Control: भारत पेट की चर्बी से परेशान है. यहां चौथा वयस्कों के पेट पर बेलगाम चर्बी होती है. पेट की चर्बी घटाने के लिए तरह-तरह की बात की जाती है लेकिन कोई एक मानक फॉर्मूला अब तक तैयार नहीं हो पाया है. इसी समस्या को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR ने एक महाप्लान तैयार किया है. इसके तहत देश भर में लाखों लोगों पर अध्ययन किया जाएगा और ऐसा फॉर्मूला निकाला जाएगा जिससे पेट के मोटापे से मुक्ति मिले.पेट की बेलगाम चर्बी पर ICMR का महाप्लान, लाखों लोगों पर हो रही रिसर्च Zoomमोटापा कम करने का निकलेगा समाधान.

मोटापा कम करने के लिए हजारों तरह के फंडे आजमाए जाते हैं. कोई कहता है कि भोजन कम कर दो. कोई कहता है एक्सरसाइज करो. कोई कहता है वॉक करो. कोई कहता है फास्ट करो तो कोई कहता है योग करो लेकिन क्या कोई ऐसा फॉर्मूला है जिसमें दावे के साथ कहा जाए कि इससे मोटाप कम हो जाएगा. शायद कोई नहीं. किसी को भोजन कम करने से मोटापा कम हो जाता है तो किसी को भोजन कम करने से मोटापा बढ़ ही जाता है. मतलब अब तक कोई भी ऐसी चीज नहीं जिससे मोटापे का फुलप्रूव इलाज किया जा सके. इसी बात को मद्देनजर रखते हुए आईसीएमआर ने एक महाप्लान बनाया है. इस महाप्लान के तहत देश भर में लाखों लोगों पर अध्ययन किया जाएगा और पेट की चर्बी को खत्म करने के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका निकाला जाएगा.

भारत के लिए प्रभावी तरीका रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर चार में से एक वयस्क पेट की चर्बी से परेशान है. यहां मोटापाग्रस्त व्यक्तियों में अधिकांश के पेट पर चर्बी ही सबसे बड़ी समस्या है. मोटापा भारत में इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि भारतीय चिकित्सा जगत इससे परेशान है. मोटापा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर डिजीज जैसी मेटाबोलिक बीमारियों की प्रमुख वजह है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार इस मोटापे को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दे चुके है. अब इस चुनौती से निपटने के लिए देश की सर्वोच्च चिकित्सा संस्था ICMR ने एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है. संस्था अब लाखों लोगों के डेटा का विश्लेषण कर यह पता लगाएगी कि वास्तव में वजन घटाने का कौन सा तरीका भारतीय शरीर और भौगोलिक स्थितियों के हिसाब से सबसे प्रभावी है.

शुगर, कोलेस्ट्रॉल का भी विश्लेषण टीओआई के मुताबिक कई वर्षों से चल रही रिसर्च, अलग-अलग डाइट प्लान, फिटनेस रूटीन और जागरुकता अभियानों के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कौन-सा तरीका सबसे ज्यादा प्रभावी है और किस व्यक्ति पर कौन-सा उपाय बेहतर काम करता है. इस कमी को दूर करने के लिए आईसीएमआर ने विभिन्न अध्ययनों के शोधकर्ताओं से डेटा साझा करने का आह्वान किया है, ताकि एक बड़ा संयुक्त विश्लेषण किया जा सके. इस पहल का मकसद वजन कम करने के लिए विभिन्न उपायों जैसे कि डाइट, एक्सरसाइज, व्यवहार और मल्टी कंपोनेंट इंटवेंशन की प्रभावशालिता पर अध्ययन किया जएगा. यह देखा जाएगा विभिन्न समूहों पर इन सबका क्या असर होता है. यह विश्लेषण केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे मानकों पर भी नजर रखेगा, क्योंकि मोटापा कई लाइफस्टाइल बीमारियों से गहराई से जुड़ा हुआ है.

हर उम्र के लोगों के लिए निकलेगा फॉर्मूलाइसका एक अहम फोकस यह भी होगा कि एक ही तरीका कुछ लोगों पर काम करता है जबकि दूसरों पर नहीं. इसके लिए उम्र, लिंग, आय स्तर और भौगोलिक स्थितियों जैसे ग्रामीण इलाकों के आधार पर अंतर का अध्ययन किया जाएगा. ग्रामीण इलाकों में कुपोषण होते हुए भी मोटापा बढ़ रहा है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह समस्या अब और जटिल होती जा रही है, क्योंकि केवल वजन अब स्वास्थ्य जोखिम का भरोसेमंद पैमाना नहीं रह गया है. अब कई ऐसे लोग भी सामने आ रहे हैं जिनका वजन सामान्य है लेकिन वे मेटाबॉलिक समस्याओं से जूझ रहे हैं. बेशक अधिक वजन वाले लोगों में तुरंत कोई गंभीर जटिलता नहीं दिखती लेकिन बाद कई परेशानियां सामने आ जाती है. इस विश्लेषण से अखिल भारतीय प्रमाण मिलने की उम्मीद है. इस समग्र विश्लेषण के बाद पेट की चर्बी और मोटापे को कम करने के लिए एक सर्वमान्य फॉर्मूला तय किया जाएगा जो पूरे देश के सभी उम्र के लोगों के लिए प्रभावी होगा.

About the AuthorLakshmi Narayan

18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें

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First Published :

April 17, 2026, 18:25 IST

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