फैक्ट्रियां बंद… तो बांडी में कहां से आया जहर? किसानों का आरोप- क्या प्रदूषण मंडल की है मिलीभगत?

पाली. जब कानून का डंडा चलता है, तो कागजों पर फैक्ट्रियों के शटर गिर जाते हैं. दावे किए जाते हैं कि प्रदूषण रुक गया है. लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है? या फिर दावों की आड़ में बंद कमरों के पीछे खेल कुछ और ही चल रहा है? आज बात बांडी नदी की, जहां एक ऐसा रहस्य सामने आया है जिसने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की नींद उड़ा दी है, या यूं कहें कि उनकी भूमिका पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं!
शहर में कपड़ा फैक्ट्रियां बंद हैं. नियम कायदे लागू हैं. लेकिन इसके बावजूद बांडी नदी में जहर का बहना बदस्तूर जारी है. जवड़िया, केरला, रूपावास और चाटेलाव… ये वो इलाके हैं, जहां नदी का पानी आज भी चीख-चीख कर कह रहा है कि फैक्ट्रियों के बंद होने का दावा एक छलावा है! भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष मदनसिंह जागरवाल ने बांडी नदी की जमीनी हकीकत देखने के बाद एक ऐसा खुलासा किया है.
फैक्ट्रिया बंद तो कैसे बह रहा पानी
पाली शहर में सभी कपड़ा फैक्ट्रियां बंद होने के बावजूद बांडी में जवड़िया, केरला, रूपावास और चाटेलाव क्षेत्र में प्रदूषित पानी दिख रहा है. यह आरोप लगाया है भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष मदनसिंह जागरवाल ने. उन्होंने नदी का हाल देखने के बाद आरोप लगाया कि केरला के पास रसायनयुक्त पानी बह रहा है. करीब एक माह से यह स्थिति बनी हुई है. किसान नेता ने बताया कि इसका वीडियो पर सुप्रीम कोर्ट की नियुक्त समिति को भेजा गया है. उन्होंने कलेक्टर और जल प्रदूषण मंडल से जांच की मांग की है.
पूरे वेग के साथ गंदा पानी यहां बह रहा है
किसान परिवार से जुडे मदनसिंह जागरवाल ने कहा कि पिछले एक महीने से कहा जा रहा है कि पाली की इंडस्ट्रीज बंद पडी है. उसके बावजूद भी पूरे वेग के साथ गंदा पानी यहां बह रहा है. नदी का रूप धारण किया हुआ केमिकल युक्त यह पानी इस तरह बह रहा है. यह पानी आगे तक किसानो के खेतो और नदियो तक पहुंच रहा है. जल प्रदूषण बोर्ड के आरओ राहुल शर्मा से आग्रह है कि वह सत्य देखने के लिए केरला के पुलिया पर आए और इसको देखे. मैं भी और किसानों की तरह इस क्षेत्र का रहने वाला पीडित किसान हूं.
35 सालो में बर्बाद हो चुके यह कई गांव
पुनायता, जोडिया, केरला, चाटेलाव, जवडिया, सुपरलाइ, जेतपुर और धोलेरिया सहित कई गांव है जो इस केमिकल युक्त पानी की वजह से 35 साल पहले ही बर्बाद हो चुके है. यह पानी इधर से गुजरता है उसके बाद इन गांवो तक पहुंचना शुरू होता है. हालात यह है कि हमारा इस गांव में रात के समय सोना तक मुश्किल हो चुका है, क्योंकि पानी से बदबू इतनी आती है कि हम कहा जाए. यह बदबूदार पानी से कई कैंसर जैसी बीमारियां सामने आ चुकी है, जिनका इलाज एम्स के अंदर चल रहा है.
किसान मजबूरन यह पानी भरकर जाएंगे अधिकारियों के समक्ष
मदनसिंह कहते है कि मेरा यही आग्रह है कि अधिकारियों से आग्रह है कि वह ध्यान दे. अगर ऐसा नही होता है तो मजबूरन हम बडी संख्या में किसान मिलकर इस गंदे पानी को बोतले में भरकर अधिकारियों के डिपार्टमेंट के समक्ष ले जाएंगे ताकि उनको यह गंद पानी नजर अए. सुप्रीम कोर्ट की कमेटी है उनसे आग्रह है कि वह आए वह भी देखे कि जब फैक्ट्रियां बंद है तो पानी आखिर कहा से आ रहा है. मुझे लग रहा है कि अंदर ही अंदर अवैध रूप से फैक्ट्रिया चल रही है जिनके द्वारा रात को अंधेरे में टैंकरो के माध्यम से यह पानी यहां डाला जा रहा है.



