बाजरा बोने जा रहे हैं तो पहले पढ़ लें ये खबर, वरना हो सकता है नुकसान; ये तरीका बढ़ाएगा पैदावार

Last Updated:June 17, 2026, 05:14 IST
Bajra Farming Tips: राजस्थान में खरीफ सीजन की मुख्य फसल बाजरे की बुवाई का सही समय आ गया है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग चौधरी के अनुसार पहली मानसून बारिश के साथ बुवाई करने से बेहतर अंकुरण होता है. किसानों को उन्नत किस्मों जैसे आरएचबी-173, 223 और बीजोपचार का उपयोग करना चाहिए. दीमक और सफेद लट से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड से उपचार करें तथा कतारों के बीच 40-50 सेमी की दूरी रखें.
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नागौर. राजस्थान में बाजरा खरीफ सीजन की प्रमुख फसल है. यह किसानों की आय का मुख्य स्त्रोत है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरे की खेती की जाती है. अभी इसकी बुवाई का सही समय है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग चौधरी ने बताया कि बाजरे की मानसून की पहली अच्छी बारिश के साथ बाजरे की बुवाई कर देने से बेहतर अंकुरण और अधिक उत्पादन प्राप्त मिलता है. साथ ही उन्नत किस्मों का चयन, बीजोपचार और सही प्रबंधन अपनाकर किसान अपनी उपज में बढ़ोतरी कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि बाजरे की खेती के लिए जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है. किसानों को इसकी खेती के दौरान खेत की मिट्टी को भुरभुरी बनाने के लिए गर्मियों में देसी हल से एक गहरी जुताई करनी चाहिए. इसके बाद में आवश्यकता अनुसार मिट्टी पलटने वाले हल या हैरो से एक-दो जुताई करनी चाहिए. इससे खरपतवार नियंत्रण के साथ नमी संरक्षण में भी मदद मिलती है.
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग चौधरी ने बताया बाजरे कर खेती में आरएचबी-173, आरएचबी-177, आरएचबी-223, आरएचबी-228 तथा बायोफोर्टिफाइड किस्में आरएचबी-233 और आरएचबी-234 को खेती के लिए सबसे उपयुक्त रहती है. किसान प्रति हेक्टेयर लगभग चार किलोग्राम प्रमाणित बीज का उपयोग कर सकते हैं. इसके अलावा बुवाई से पहले बीजोपचार अवश्य करें. गूंदिया और चैंपा रोग से बचाव के लिए बीजों को 20 प्रतिशत नमक के घोल में पांच मिनट तक डुबोकर हल्के एवं संक्रमित बीज अलग कर देने चाहिए. इसके बाद साफ पानी से धोकर छाया में सुखाएं. सफेद लट और दीमक जैसे कीटों से बचाव के लिए किसानों को इमिडाक्लोप्रिड 600 एफएस की 8.75 मिली या क्लोथायोनिडीन 50 डब्ल्यूडीजी की 7.5 ग्राम मात्रा प्रति किलो बीज की दर से उपचार करना चाहिए. उपचारित बीजों की बुवाई दो घंटे के भीतर कर देनी चाहिए. बाजरे की बुवाई का उपयुक्त समय मध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक माना जाता है, जबकि पहली बारिश के साथ बुवाई सबसे बेहतर रहती है.
बुवाई के दौरान कतार की दूरी और उर्वरक प्रबंधनबुवाई के दौरान कतार से कतार की दूरी 40 से 50 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. इसके अलावा बुवाई के 15 से 20 दिन बाद पौधों की छंटाई कर दूरी 15 सेंटीमीटर बनाए रखना आवश्यक है. वहीं, जहां पौधों की संख्या कम हो, वहां किसान छांटे गए पौधों का रोपण कर सकते हैं. उर्वरक प्रबंधन में बुवाई से पहले 10 से 12 टन गोबर की सड़ी खाद या 2.5 टन वर्मी कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर देना चाहिए. इसके अलावा सिंचित क्षेत्रों में 90 किलोग्राम नत्रजन और 30 किलोग्राम फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में 50 से 60 किलोग्राम नत्रजन एवं 20 से 30 किलोग्राम फॉस्फोरस का उपयोग करना चाहिए. नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और शेष आधी मात्रा 25 से 30 दिन बाद वर्षा होने पर देनी चाहिए.
कीट नियंत्रण और फसल सुरक्षा के उपायकिसानेां को रोग एवं कीट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना भी जरूरी है. ब्लास्ट रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रोपिकोनाजोल या ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन एवं टेबुकोनाजोल आधारित फफूंदनाशक का छिड़काव करें. सफेद लट के नियंत्रण के लिए बुवाई के लगभग 20 दिन बाद अनुशंसित दवा का प्रयोग करें. वहीं अरगट रोग की रोकथाम के लिए बालियां निकलने के समय समय पर दवा का छिड़काव करना चाहिए. इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर राजस्थान के किसान बाजरे की फसल से कम लागत में बंपर मुनाफा कमा सकते हैं और फसलों को नुकसान से बचा सकते हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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