राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को हुआ ‘इंफेक्शन’, व्यवस्थाएं गई ‘कोमा’ में, शहर-दर-शहर टूट रहा भरोसा

Last Updated:June 22, 2026, 13:48 IST
Jodhpur News : राजस्थान का हेल्थ सिस्टम ‘स्ट्रेचर’ पर आ गया है. कोटा और बीकानेर में सात प्रसूताओं की मौत के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में भी आठ प्रसूताओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई है. इनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है. एक के बाद एक तीन बड़े शहरों में इस तरह गड़बड़ी सामने आने से भजनलाल सरकार चौतरफ घिर गई है. वहीं महकमे के मंत्री गजेन्द्र सिंह खींमसर के बयानों ने मौत के मुंह में समा चुकी प्रसूताओं और जिंदगी तथा मौत के बीच झूल रही अन्य प्रसूताओं के परिजनों के दर्द को और बढ़ा रहा है.
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कोटा, बीकानेर और जोधपुर की घटनाओं पर स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींमसर विवादास्पद बयान दे रहे हैं.
जयपुर. राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं के ‘इंफेक्शन’ हो गया है. पहले कोचिंग सिटी कोटा तथा फिर बीकानेर में हुई प्रसूताओं की और अब जोधपुर में उनकी जान पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए साफ है कि सूबे का हेल्थ सिस्टम ‘स्ट्रेचर’ पर है. व्यवस्थाएं ‘कोमा’ में चली गई हैं. अस्पतालों में मौत का ‘तांडव’ हो रहा है. लचर सिस्टम भरोसा तोड़ रहा है. लचर सिस्टम को ढकने के लिए बयानों के पैबंद लगाए जा रहे हैं. इलाज के नाम पर कथित एक्शन हो रहा है. प्रसूताएं या तो मौत के मुंह में समा रही हैं या फिर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं.
राजस्थान के हेल्थ सिस्टम में इन दिनों जो हो रहा है वह सबसे सामने है. लेकिन कोई कुछ नहीं कर पा रहा है. हर बार चिकित्सा महकमे के मंत्री आगे आते हैं और सिस्टम का बचाव कर एक्शन की बात कहकर आगे निकल जाते हैं. मामला एक शहर या एक अस्पताल में हो माना जा सकता है कि वहां लापरवाही से कुछ गड़बड़ हो गई होगी. लेकिन जब मामला शहर-दर-शहर सामने आए और वो भी संभाग मुख्यालायों पर हो तो उसे क्या कहा जाए. राजस्थान में ‘छलनी’ हुए हेल्थ सिस्टम की वजह से बीते एक माह में सात प्रसूताएं मौत के मुंह में समा चुकी हैं.
कोटा और बीकानेर में अब तक सात प्रसूताएं दम तोड़ चुकी हैं
इनमें से पांच प्रसूताएं कोटा में तो दो बीकानेर में दम तोड़ चुकी हैं. इन प्रसूताओं को इलाज के नाम पर सूबे के बड़े सरकारी अस्पतालों में क्या मिला सबके सामने है. इनके परिजनों का आरोप है कि कोई यह तक बताने वाला नहीं है किन उनकी जान आखिर कैसे गई? राजस्थान को मेडिकल हब बनाने का ख्वाब दिखाने वाले बुनियादी इलाज के सिस्टम तक को नहीं संभाल पा रहे हैं तो हब बनाना तो दूर की बात है. ‘तुमने (कांग्रेस) क्या किया’, ‘हमने (बीजेपे) ये किया’ जैसे आरोप और प्रत्यारोपों की राजनीति के बीच प्रसूताएं दम तोड़ रही हैं. उनके परिजन रो रहे हैं. जो प्रसूताएं जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं उनके परिजन धक्के खा रहे हैं. पिछले एक महीने से प्रसूताओं की जान पर बन आई है.
मंत्री खींमसर का तर्क सभी मामले अलग-अलग है
कोटा में पांच और बीकानेर में दो प्रसूताओं की मौत के बाद जोधपुर में जिन आठ प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी है उनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है. बीकानेर में पीबीएम अस्पताल में बिगड़ी प्रसूताओं की मौत के बाद सूबे के हेल्थ मिनिस्टर गजेन्द्र सिंह खींमसर ने कॉलेज के प्रिंसिपल को मीडिया के सामने कहा था कि इनको बताइए महिलाएं अस्पताल कैसें आई थीं. नाचते हुए या आराम से. वहीं अब जोधपुर के केस के बाद मंत्री खींमसर ने फिर बेतुका बयान देते हुए तर्क दिया है कि सारे मामले अलग अलग हैं.
मंत्री बोले यहां लोग गंभीर हालत में धक्के खाकर आते हैंजोधपुर में 6 महिलाओं की तबीयत बिल्कुल ठीक है. एक को एम्स रेफर किया गया है. बकौल खींमसर आज की युवा पीढ़ी दर्द नहीं चाहती. इसलिए सीजेरियन मामले बढ़ रहे हैं. कोटा और बीकानेर के बाद जोधपुर से जुड़े मामले पर खींमसर ने अपने पहले वाले बयान से एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि ‘हमारे पास महिलाएं रेफर होकर आती हैं. यहां लोग गंभीर हालत में धक्के खाकर आते हैं. सरकार के रवैये और मंत्री के इस तरह के बयान से विपक्ष ही नहीं आमजन भी हैरान है.
सात परिवार भुगत रहे हैं लापरवाही की कीमतहैरानी की बात यह भी है कि ये तीनों मामले तीन बड़े और नामचीन शहरों में हुए हैं. कोटा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का क्षेत्र है. बीकानेर केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का लोकसभा क्षेत्र है. वहीं जोधपुर केन्द्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह का निर्वाचन क्षेत्र है. तीनों ही शहर देशभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं. तीन बड़े शहरों के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं के साथ इलाज में हुए इस खिलवाड़ की कीमत अब तक सात परिवार भोग चुके हैं. कोटा और बीकानेर में हुई घटनाओं के बाद भी सरकार नहीं चेती और वैसा ही कांड जोधपुर में रिपीट हो गया.
व्यवस्था में आई भारी गिरावट और गंभीर लापरवाहीसूबे के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने इन सभी घटनाक्रमों पर आज फिर से तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो माताओं की हालत गंभीर होने का समाचार बेहद चिंताजनक है. प्रसूताओं को सेप्टीसीमिया होना और किडनी खराब होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा होना चिकित्सा व्यवस्था में आई भारी गिरावट और गंभीर लापरवाही को दर्शाता है. हैरान करने वाली बात है कि एक तरफ शहर में सरकारी आयोजन और वीआईपी दौरों की चमक बिखेरी जा रही थी. वहीं दूसरी तरफ हमारी माताओं-बहनों की जिंदगी खतरे में थी और प्रशासन सच्चाई छिपाने में जुटा रहा.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें
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