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India Rare Earth Push in Russia: चीन की दादागिरी खत्म करने का मास्टरप्लान, साइबेरिया के खजाने पर टिकी भारत की नजर; रूस संग ये डील है गेमचेंजर!

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चीन की दादागिरी खत्म करने का मास्टरप्लान, भारत-रूस की डील साबित होगी गेमचेंजर!

Last Updated:June 20, 2026, 15:19 IST

India Rare Earth Push in Russia: भारत ने चीन पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए रास्ता खोज लिया है. सरकारी कंपनी आईआरईएल रूस की रोसनेफ्ट के साथ बातचीत कर रही है. दोनों कंपनियां साइबेरिया के टॉमटोर डिपॉजिट में रेयर अर्थ मिनरल्स की तलाश करेंगी. चीन ने इन मिनरल्स के निर्यात पर सख्ती की है. इसलिए भारत रूस, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में संभावनाएं तलाश रहा है. इससे ईवी और डिफेंस सेक्टर को बड़ा फायदा होगा.चीन की दादागिरी खत्म करने का मास्टरप्लान, भारत-रूस की डील साबित होगी गेमचेंजर!Zoomचीन का खेल खत्म? साइबेरिया में खजाना तलाश रही भारत की IREL, जानिए पूरा प्लान. (AI Photo)

नई दिल्ली: भारत ने चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए एक मास्टरप्लान तैयार किया है. सरकार अब क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है. इसके लिए भारत की सरकारी माइनिंग कंपनी आईआरईएल ने रूस की रोसनेफ्ट के साथ बातचीत शुरू कर दी है. यह चर्चा साइबेरिया के टॉमटोर डिपॉजिट में रेयर अर्थ मिनरल्स की खोज को लेकर है. टॉमटोर दुनिया के सबसे बड़े अविकसित रेयर अर्थ भंडार में से एक है. वहां से मिनरल के सैंपल पहले रूस में प्रोसेस होंगे और फिर टेस्टिंग के लिए भारत आएंगे. चीन ने हाल ही में दुनिया भर में रेयर अर्थ मैटेरियल के एक्सपोर्ट पर कड़े नियम लागू किए हैं. इसके बाद से भारत समेत कई देशों में इसकी कमी महसूस की जा रही है. अब भारत रूस के साथ मिलकर अपनी जरूरतें पूरी करने की तैयारी कर रहा है. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स से लेकर डिफेंस सेक्टर तक इन मिनरल्स की भारी डिमांड है.

चीन के पास ऐसा क्या है जो भारत को रूस के पास जाना पड़ा?

चीन इस समय दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ सप्लायर है. उसने हाल ही में इन अहम खनिजों के एक्सपोर्ट पर रोक लगानी शुरू कर दी है. इसके कारण मार्केट में रेयर अर्थ मैग्नेट की भारी कमी हो गई है. इलेक्ट्रिक व्हीकल के मोटर, क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स में इसका बड़ा रोल है.

भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ रिजर्व है. इसका अनुमान करीब 7.23 मिलियन मीट्रिक टन है. फिर भी भारत इसका पूरा फायदा नहीं उठा पा रहा है. इसका कारण है कि भारत के पास कमर्शियल स्केल पर इसे रिफाइन करने की सुविधा नहीं है. इसलिए हम आज भी इसके आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं.

भारत और रूस की इस डील से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को क्या फायदा होगा?

भारत सरकार ईवी और क्लीन एनर्जी सेक्टर को लगातार प्रमोट कर रही है. इन टेक्नोलॉजी के लिए रेयर अर्थ एलिमेंट्स बहुत जरूरी हैं. रूस का टॉमटोर डिपॉजिट इस मामले में गेमचेंजर साबित हो सकता है.

दिसंबर में हुए एनुअल भारत-रूस समिट में भी इस पर चर्चा हुई थी. दोनों देशों ने इस सेक्टर में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया था.
रूस भारत की क्रिटिकल मिनरल स्ट्रैटेजी का एक बहुत अहम पार्टनर है. रोसनेफ्ट ने पिछले साल ही टॉमटोर डिपॉजिट का अधिग्रहण किया है.
मई में रूस की रोसाटॉम की एक डिवीजन ने भारत की नेक्सॉन जियोकेम के साथ एक एमओयू साइन किया था. यह रिसर्च रेयर अर्थ की प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी को लेकर था.

रूस के अलावा आईआरईएल और किन देशों में तलाश रही है खजाना?

आईआरईएल अब सिर्फ रूस तक सीमित नहीं है. यह कंपनी अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और मलावी में भी माइनिंग के मौके तलाश रही है. इसके अलावा कंपनी जापान और साउथ कोरिया की फर्म्स के साथ भी बात कर रही है. यह चर्चा कमर्शियल रेयर अर्थ मैग्नेट के प्रोडक्शन को लेकर है.

इस विषय पर एक रिपोर्ट में सूत्रों ने कहा, ‘आईआरईएल का बड़ा प्लान 2029 से 2030 के बीच घरेलू रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने का है’.

रूस के गिरेडमेट ने टेक्समिन के साथ भी एक लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया है. यह संस्था आईआईटी आईएसएम से जुड़ी है. दोनों मिलकर मैग्नेट बनाने की नई तकनीक विकसित करेंगे. यह पार्टनरशिप रेयर अर्थ मैग्नेट प्रोडक्शन के लिए मील का पत्थर साबित होगी.

About the Authorदीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा (Deepak Verma) की‍ गिनती हिंदी डिजिटल मीडिया के तेजी से उभरते चेहरों में होती है. वह हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज़ एडिटर की भूमिका में जुड़े हैं. प्रिंट से डिजिटल का रुख करने वाले दीपक के पास पत्र…और पढ़ें

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