Indonesia Volcano Eruption : इंडोनेशिया में फटा ‘नर्क का दरवाजा’, चारों तरफ काला धुआं, खतरे में डेढ़ लाख लोग

इंडोनेशिया में कुदरत का खौफनाक रूप देखने को मिला है. जावा और सुमात्रा के बीच मौजूद माउंट अनाक क्राकाताऊ ज्वालामुखी अचानक से फिर फट पड़ा है और ऐसा लग रहा है मानो धरती का सीना चीरकर ‘नर्क का दरवाजा’ खुल गया हो. हवा में कई किलोमीटर ऊपर तक सिर्फ जहरीली राख और काला धुआं फैला हुआ है. इस खतरनाक मंजर की वजह से इंडोनेशिया के 4 बड़े एयरपोर्ट्स पर उड़ानों को पूरी तरह बंद करना पड़ा है. राजधानी जकार्ता की तरफ राख का विशाल गुबार तेजी से बढ़ रहा है जिससे लाखों लोगों की सांसों पर संकट मंडराने लगा है. इस भयानक माहौल में करीब 1.7 लाख यात्री अलग-अलग हवाई अड्डों पर फंस गए हैं.
आसमान में सिर्फ काला धुआं और 4 बड़े एयरपोर्ट बंद
अनाक क्राकाताऊ ज्वालामुखी से निकले धुएं और राख ने पूरे आसमान को अपने आगोश में ले लिया है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्रशासन ने 4 बड़े हवाई अड्डों पर फ्लाइट्स का संचालन सोमवार शाम 6 बजे तक के लिए रोक दिया है. जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा और हलीम परदानाकुसुमा एयरपोर्ट्स के साथ-साथ लाम्पुंग के राडिन इंटेन-II और बांडुंग के हुसैन सास्त्रानेगारा एयरपोर्ट पर सन्नाटा पसरा हुआ है. हवाई अड्डा का काम काज देखने वाली कंपनी अंगकासा पुरा का कहना है कि जब तक हवा में राख का खतरा पूरी तरह टल नहीं जाता, तब तक किसी भी जहाज को उड़ान भरने की इजाजत नहीं दी जाएगी.
1,500 से ज्यादा उड़ानें रद्द, 1.7 लाख यात्री फंसे
इस धमाके के बाद से अब तक 1,500 से भी ज्यादा फ्लाइट्स रद्द या प्रभावित हो चुकी हैं. वीकेंड पर अपने घरों से निकले लगभग 1,70,000 यात्री अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर फंसे हुए हैं. टर्मिनल के अंदर लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं और यात्री बेहद परेशान हैं. कई लोग घंटों से फ्लाइट के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन धुएं और राख के कारण पूरा एयर ट्रैफिक ठप पड़ा हुआ है.
जकार्ता की तरफ बढ़ रहा है मौतों का गुबार
इंडोनेशिया की मौसम और भूभौतिकी एजेंसी ने एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है. सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से साफ पता चल रहा है कि ज्वालामुखी की राख के दो बड़े गुबार सीधे राजधानी जकार्ता की तरफ बढ़ रहे हैं. सोमवार सुबह 6 बजे तक ये राख जकार्ता के आसमान तक पहुंचती हुई दिखाई दी है. जकार्ता इंडोनेशिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है. अगर ये जहरीली राख पूरे शहर में फैलती है तो लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि ये राख न सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है बल्कि उड़ते हुए हवाई जहाजों के इंजन को भी पूरी तरह से जाम कर सकती है.
अनाक क्राकाताऊ का खौफनाक इतिहास
जावा और सुमात्रा के बीच सुंडा स्ट्रैट में बसा माउंट अनाक क्राकाताऊ कोई आम पहाड़ नहीं है. इसे दुनिया के सबसे सक्रिय और हिंसक ज्वालामुखियों में गिना जाता है. हाल के कुछ सालों में ये कई बार फट चुका है. साल 2018 में भी इसमें एक बहुत ही भयानक विस्फोट हुआ था. उस समय ज्वालामुखी का एक बड़ा हिस्सा ढहकर समंदर में गिर गया था, जिससे समंदर में ऊंची-ऊंची लहरें उठी थीं और भयानक सुनामी आ गई थी. उस दर्दनाक हादसे में 400 से ज्यादा बेकसूर लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों घर तबाही की भेंट चढ़ गए थे. आज एक बार फिर वही खौफनाक मंजर लोगों की आंखों के सामने तैरने लगा है.
माउंट सेमेरू में भी हुआ था भयंकर विस्फोट
इंडोनेशिया के लोगों के लिए ज्वालामुखियों का फटना कोई नई बात नहीं है. अभी पिछले ही महीने इंडोनेशिया के पूर्वी जावा प्रांत में स्थित माउंट सेमेरू ज्वालामुखी भी अचानक फट गया था. उस समय ज्वालामुखी के शिखर से लगभग 2,000 मीटर ऊपर तक राख का विशाल गुबार आसमान में छा गया था. इसके अलावा गर्म राख, पत्थर और मलबे का बहाव पास की नदी के किनारे लगभग 2 किलोमीटर दूर तक देखा गया था. उस समय भी प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना पड़ा था और क्रेटर के 5 किलोमीटर के दायरे में सभी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगानी पड़ी थी.
जब माउंट डुकोनो ने ली थी 3 लोगों की जान
इसी साल मई के महीने में भी इंडोनेशिया के उत्तरी मालुकु प्रांत में माउंट डुकोनो ज्वालामुखी ने भारी तबाही मचाई थी. 8 मई की सुबह करीब 7:40 बजे अचानक पहाड़ में जोरदार धमाका हुआ और लगभग 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक काले रंग की राख आसमान में फैल गई. इस खौफनाक हादसे में 3 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. इसके बाद 17 मई को फिर से इस पहाड़ में विस्फोट हुआ और चोटी से 5,000 मीटर ऊपर तक राख निकली. राहत बचाव दल ने उस समय क्रेटर के 4 किलोमीटर के दायरे को खाली कराया था क्योंकि भारी बारिश के दौरान ज्वालामुखी के कीचड़ का बहाव नीचे आने का बहुत बड़ा खतरा बना हुआ था.
आखिर इंडोनेशिया में ही बार-बार क्यों फटते हैं ज्वालामुखी?
इसका जवाब छिपा है ‘रिंग ऑफ फायर’ में. इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के उस इलाके में स्थित है जिसे दुनिया भर में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है. इस इलाके में धरती के अंदर की टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती रहती हैं जिससे लगातार भूकंप आते हैं और ज्वालामुखी फटते हैं. अकेले इंडोनेशिया में ही 120 से ज्यादा एक्टिव ज्वालामुखी हैं. यही वजह है कि ये देश दुनिया का सबसे ज्यादा ज्वालामुखी प्रभावित इलाका माना जाता है और यहां के लोग हमेशा मौत के साये में जीने को मजबूर रहते हैं.
पूरे देश में हाई अलर्ट, लोग घरों में रहने को मजबूर
फिलहाल अनाक क्राकाताऊ की राख और जहरीले धुएं ने पूरे इंडोनेशिया की सांसें फुला दी हैं. राहत और बचाव एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं. प्रशासन ने लोगों को सख्त हिदायत दी है कि वे क्रेटर के पास बिल्कुल न जाएं और बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें. अगर हवा की दिशा ऐसे ही जकार्ता की तरफ बनी रही, तो आने वाले दिनों में ये कुदरती आपदा एक बड़े मानवीय संकट का रूप ले सकती है. फिलहाल पूरा देश दुआ कर रहा है कि ये ‘नर्क का दरवाजा’ जल्द से जल्द शांत हो जाए.



