नई रफ्तार की ओर से बढ़ रहा जयपुर, 41 किलोमीटर लंबी ऑरेंज लाइन और 36 स्टेशन

Last Updated:July 06, 2026, 12:07 IST
Jaipur Metro Phase-2 Project Latest Updates : पिंक सिटी जयपुर में यातायात के दबाव को कम करने के लिए शुरू किए गए जयपुर मेट्रो फेज-2 में भविष्य में ड्राइवरलेस ऑपरेशन जैसी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं. मेट्रो के फेज 2 का दो दिन पहले ही पीएम नरेन्द्र मोदी ने शिलान्यास किया है. इस फेज में मेट्रो की 41 किमी लंबी ऑरेंज लाइन डवलप की जाएगी. इसमें 36 स्टेशन बनाए जाएंगे. जयपुर मेट्रो फेज-2 का हाल ही में पीएम नरेन्द्र मोदी ने शिलान्यास किया है.
जयपुर. गुलाबी नगरी जयपुर अब नई रफ्तार की तरफ बढ़ रही है. बढ़ती आबादी और हर दिन लंबा होता ट्रैफिक जाम. सड़कों पर बढ़ता वाहनों का दबाव और प्रदूषण की चुनौती के बीच जयपुर को जयपुर मेट्रो फेज-2 के रूप में एक एक नई उम्मीद मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई 2026 को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया. इसे जयपुर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में एक बड़े बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है. अब तक जयपुर मेट्रो की ‘पिंक लाइन’ मानसरोवर से बड़ी चौपड़ तक सीमित थी. लेकिन फेज-2 के बाद मेट्रो शहर के उत्तर से दक्षिण तक दौड़ती नजर आएगी.
करीब 13 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह ‘ऑरेंज लाइन’ लगभग 41 किलोमीटर लंबी होगी और इसमें 36 स्टेशन बनाए जाएंगे. यह लाइन प्रहलादपुरा और सीतापुरा से शुरू होकर टोडी मोड़ तक जाएगी. रास्ते में एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल, गांधी नगर रेलवे स्टेशन, अंबाबाड़ी और सीकर रोड जैसे जयपुर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण इलाके मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेंगे.
सभी के लिए आसान होगा सफरयानी अब जयपुर की तस्वीर कुछ ऐसी हो सकती है जहां ऑफिस जाने वाला कर्मचारी ट्रैफिक में घंटों फंसने के बजाय तय समय पर पहुंचे. एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को जाम की चिंता न रहे. छात्रों से लेकर मरीजों तक सभी के लिए सफर पहले से आसान हो जाए. जयपुर में लगातार बढ़ती गाड़ियों की संख्या शहर के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. टोंक रोड, सीकर रोड और एयरपोर्ट मार्ग पर हर दिन लंबा ट्रैफिक जाम आम बात हो गई है. ऐसे में मेट्रो फेज-2 को केवल एक परिवहन परियोजना नहीं बल्कि शहर को राहत देने वाले बड़े समाधान के तौर पर देखा जा रहा है.
आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम बेहद जरूरी हैसबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि मेट्रो जितनी ज्यादा चलेगी, उतने कम निजी वाहन सड़क पर उतरेंगे. इससे ट्रैफिक दबाव कम होने के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है. यानी यह परियोजना केवल सुविधा नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ी हुई है. इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर जयपुर कलेक्टर संदेश नायक बताया कि जयपुर मेट्रो फेज-2 शहर के भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई परियोजना है. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में जयपुर की आबादी और ट्रैफिक दोनों तेजी से बढ़ेंगे. ऐसे में मजबूत और आधुनिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम बेहद जरूरी है. इस परियोजना से शहर के नए इलाकों में विकास को रफ्तार मिलेगी. लोगों का सफर आसान होगा और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी.
ड्राइवरलेस ऑपरेशन जैसी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैंमेट्रो फेज-2 में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें CBTC तकनीक और भविष्य में ड्राइवरलेस ऑपरेशन जैसी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं. अधिकांश ट्रैक एलिवेटेड होंगे जबकि कुछ स्टेशन भूमिगत बनाए जाएंगे. सरकार का लक्ष्य सितंबर 2031 तक इस परियोजना को पूरा करने का है. शुरुआती चरण में करीब 12 किलोमीटर हिस्से पर काम शुरू करने की तैयारी है. तेजी से बदलते जयपुर के लिए मेट्रो फेज-2 सिर्फ एक नई लाइन नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों का जवाब बनकर सामने आ रही है. आने वाले समय में यह परियोजना शहर की रफ्तार, ट्रैफिक व्यवस्था, पर्यावरण और लोगों की जिंदगी चारों को बदलती नजर आ सकती है.
जयपुर को मिली नई रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी जयपुर मेट्रो फेज-2 की नींव.
13 हजार करोड़ की लागत से बनेगी ऑरेंज लाइन.
41 किलोमीटर लंबी होगी जयपुर मेट्रो की नई लाइन.
36 स्टेशनों के जरिए शहर के उत्तर-दक्षिण हिस्से जुड़ेंगे.
सीतापुरा से टोडी मोड़ तक दौड़ेगी मेट्रो.
एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अस्पताल सीधे मेट्रो नेटवर्क से जुड़ेंगे.
टोंक रोड और सीकर रोड के ट्रैफिक को मिलेगी बड़ी राहत.
बढ़ती आबादी और बढ़ते वाहनों के दबाव का समाधान बनेगी मेट्रो.
निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने की तैयारी.
प्रदूषण कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगी मेट्रो.
जयपुर के भविष्य का ट्रांसपोर्ट मॉडल बनेगा मेट्रो फेज-2.
आधुनिक तकनीक और ड्राइवरलेस सिस्टम की भी संभावना.
2031 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य.
जयपुर की बदलती जरूरतों का जवाब बनेगी मेट्रो फेज-2.
शहर के विकास और ट्रैफिक समाधान में मील का पत्थर साबित होगी परियोजना.
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें
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