Rajasthan

जयपुर, जोधपुर और कोटा बने रोजगार के नए केंद्र, बेरोजगारी दर में भारी गिरावट

Last Updated:July 06, 2026, 07:55 IST

MoSPI Report Rajasthan: MoSPI की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के तीन बड़े शहर जयपुर, जोधपुर और कोटा राज्य के आर्थिक विकास के नए इंजन बनकर उभरे हैं. इन शहरों में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट बढ़ा है और बेरोजगारी दर घटकर 4.9% के स्तर पर आ गई है. जयपुर में आईटी व टूरिज्म, जोधपुर में हैंडीक्राफ्ट और कोटा में कोचिंग-लिंक्ड सर्विसेज के चलते रेगुलर नौकरियों में बड़ा इजाफा हुआ है और वर्कर्स की मंथली इनकम में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है.

ख़बरें फटाफट

MoSPI Report: राजस्थान के बड़े शहरों में बढ़ी कमाई और रोजगार, बेरोजगारी दर घटीZoomMoSPI Report Rajasthan: जयपुर, जोधपुर और कोटा बने देश के बड़े आर्थिक हब, बेरोजगारी दर में भारी गिरावट

Jaipur: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने देश के बड़े शहरों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट का नाम ‘लेबर मार्केट डायनेमिक्स इन मिलियन-प्लस सिटीज’ है. इस सरकारी आंकड़े के विश्लेषण से साफ है कि राजस्थान के तीन सबसे बड़े शहर यानी जयपुर, जोधपुर और कोटा अब केवल राज्य तक सीमित नहीं हैं बल्कि पूरे देश की आर्थिक प्रगति में बड़ा योगदान दे रहे हैं. नेशनल लेवल पर मिलियन-प्लस शहरों का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) बढ़कर 52.4% हो गया है. इसका मतलब है कि बड़े शहरों में काम करने के इच्छुक लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसका सीधा फायदा राजस्थान के युवाओं को मिल रहा है.

इस रिपोर्ट की सबसे सकारात्मक बात यह है कि बड़े शहरों में बेरोजगारी की दर में तेजी से गिरावट आई है. नेशनल एवरेज के मुताबिक अब बेरोजगारी दर घटकर केवल 4.9% पर आ गई है. राजस्थान की राजधानी जयपुर इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है. जयपुर में जेम्स एंड ज्वेलरी, टूरिज्म, हस्तशिल्प और आईटी सेक्टर के विकास के कारण रेगुलर सैलरी वाली नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है. वहीं दूसरी तरफ ‘ब्लू सिटी’ जोधपुर ने हैंडीक्राफ्ट और सोलर एनर्जी के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं. जोधपुर में अब कैजुअल लेबर यानी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भरता कम हुई है और लोग स्थायी रोजगार की तरफ बढ़ रहे हैं.

कोचिंग कैपिटल कोटा का बदलता हुआ सर्विस प्रोफाइलएजुकेशन हब के नाम से मशहूर कोटा का आर्थिक ताना-बाना भी अब तेजी से बदल रहा है. MoSPI की रिपोर्ट के अनुसार कोटा का पूरा एंटरप्राइज लैंडस्केप काफी हद तक सर्विस सेक्टर पर निर्भर हो चुका है. यहाँ कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के साथ-साथ अलाइड सर्विसेज जैसे हॉस्टल्स, पीजी, मेस और रिटेल बिजनेस का एक बहुत बड़ा नेटवर्क खड़ा हो चुका है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि कोटा में महिलाओं की कमाई और उनका लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट पहले से काफी बेहतर हुआ है क्योंकि सर्विसेज सेक्टर में उन्हें सुरक्षित और रेगुलर काम के नए अवसर मिल रहे हैं.

रेगुलर सैलरी और हाई अर्निंग्स का नया दौर शुरूMoSPI की इस रिपोर्ट से यह साबित हो गया है कि मिलियन-प्लस शहरों में काम करने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति बाकी के शहरी भारत के मुकाबले बेहद मजबूत है. जहां बाकी छोटे शहरों में रेगुलर सैलरी वाले वर्कर्स की संख्या कम है, वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों में यह आंकड़ा 55% से भी ज्यादा है. स्वरोजगार (Self-employed) से जुड़े लोगों की औसत कमाई भी बड़े शहरों में ₹30,858 प्रति महीना तक पहुंच गई है जो कि छोटे शहरों के ₹23,013 के मुकाबले कहीं अधिक है. राजस्थान के इन तीनों शहरों को आगे बढ़ाने के लिए अब सरकार को अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल पॉलिसी पर और ज्यादा ध्यान देना होगा ताकि विकास की यह रफ्तार थमे नहीं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Location :

Jaipur,Jaipur,Rajasthan

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj