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Jalore News: भीनमाल का 600 साल पुराना वराह श्याम मंदिर, 8 फीट की प्रतिमा है सबसे बड़ा आकर्षण

Last Updated:September 13, 2026, 13:02 IST

राजस्थान के जालौर जिले के भीनमाल में स्थित करीब 600 साल पुराना वराह श्याम मंदिर भगवान विष्णु के वराह अवतार की अनोखी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है. यहां जैसलमेर के पीले पत्थर से बनी करीब 8 फीट लंबी भव्य प्रतिमा में भगवान वराह पृथ्वी देवी को धारण किए हुए हैं. वराह जयंती पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं, जिसमें भीनमाल के 36 समाजों के लोग श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं.

जालौर. जिले के भीनमाल में भगवान विष्णु के वराह अवतार से जुड़ा एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जो अपनी अनोखी प्रतिमा और सदियों पुरानी आस्था के लिए खास पहचान रखता है. शहर के बीच स्थित वराह श्याम मंदिर करीब 600 साल पुराना बताया जाता है. वराह जयंती के अवसर पर इस मंदिर की विशेषता और यहां विराजमान भगवान वराह श्याम की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती है.

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, वराह भगवान विष्णु के दशावतारों में तीसरे अवतार माने जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार जब पृथ्वी जल में डूब गई थी, तब भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण कर पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाकर बाहर निकाला था. इसी स्वरूप की आराधना भीनमाल के वराह श्याम मंदिर में की जाती है.

8 फीट की आदमकद प्रतिमा खासमंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान वराह श्याम की आदमकद प्रतिमा है. यह प्रतिमा करीब 8 फीट लंबी और 3 फीट चौड़ी है तथा जैसलमेर के पीले पत्थर से बनी बताई जाती है. प्रतिमा में भगवान वराह अपनी दाईं भुजा में पृथ्वी देवी यानी मेदिनी को धारण किए हुए हैं. वहीं उनके चरणों के पास नाग-नागिन का युगल दिखाई देता है। प्रतिमा के आसपास इंद्राणी और नारद की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं. मंदिर की दीवारों और परिसर में भी कई देवी-देवताओं की दुर्लभ प्रतिमाएं देखने को मिलती हैं. इनमें शेषशायी विष्णु, चक्रधारी विष्णु और यक्ष देवी-देवताओं की प्रतिमाएं शामिल हैं. यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि प्राचीन शिल्प और धार्मिक परंपरा को समेटे हुए धरोहर के रूप में भी देखा जाता है.

भीनमाल के आराध्य देववराह श्याम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्याम खेतावत ने लोकल18 को बताया कि भीनमाल के लोगों की आस्था भगवान वराह श्याम से गहराई से जुड़ी हुई है. स्थानीय लोग इन्हें अपना आराध्य मानते हैं और उनके आशीर्वाद से नगर में सुख-शांति और चैन बने रहने की मान्यता रखते हैं. वराह जयंती पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भगवान वराह श्याम के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है. करीब छह सदियों से आस्था का केंद्र बना यह मंदिर आज भी भीनमाल की धार्मिक पहचान और सामाजिक एकता से जुड़ा हुआ है.

धार्मिक आयोजनों में जुटते हैं सभी समाजमंदिर में पूरे साल अलग-अलग धार्मिक अवसरों पर आयोजन होते हैं. वराह जयंती, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और देवझूलनी ग्यारस के अवसर पर यहां मेले और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इन आयोजनों की खास बात यह है कि भीनमाल के 36 समाजों के सनातनी लोग मिलकर इनमें भाग लेते हैं.

About the Authorमोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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Jalor,Rajasthan

First Published :

September 13, 2026, 13:02 IST

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