Jodhpur News: भगत की कोठी लोको शेड में रेल सुरक्षा को बढ़ावा, पांच माह में 66 इलेक्ट्रिक इंजनों में लगा कवच

Last Updated:August 25, 2026, 11:05 IST
भगत की कोठी लोको शेड में रेल इंजनों की सुरक्षा और रखरखाव को बेहतर बनाने के लिए कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं. पांच माह में 132 में से 66 इलेक्ट्रिक इंजनों में ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली लगाई जा चुकी है. नई तकनीक के चलते डीजल इंजन फेलियर में 40 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक इंजन फेलियर में 21 प्रतिशत की कमी आई है. इसके साथ ही स्वदेशी ‘पी पाइप फ्लो टेस्ट बेंच’, उपयोगी उपकरणों के पुन: इस्तेमाल और जलरहित यूरिनल जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं.
जोधपुर. भगत की कोठी लोको शेड में रेल सुरक्षा को लेकर बड़े तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं. यहां पांच माह में 132 में से 66 इलेक्ट्रिक इंजनों में ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली फिट की जा चुकी है, वहीं तकनीकी सुधारों के चलते डीजल लोको फेलियर में 40 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक लोको फेलियर में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है. खास बात यह है कि शेड में स्वदेशी तकनीक से तैयार ‘पी पाइप फ्लो टेस्ट बेंच’ के जरिए इंजन के महत्वपूर्ण उपकरणों की पहले ही जांच की जा रही है, साथ ही करोड़ों रुपए के उपयोगी उपकरणों का पुन: इस्तेमाल और जल संरक्षण के लिए जलरहित यूरिनल जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं. यानी बीजीकेटी लोको शेड में तकनीक, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के साथ रेलवे की अनुरक्षण व्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है.
शेड की प्रमुख उपलब्धियों में इलेक्ट्रिक इंजनों में ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली की फिटमेंट शामिल है. निर्धारित 132 इलेक्ट्रिक इंजनों में से पांच माह में 66 यानी 50 प्रतिशत इंजनों में कवच लगाया जा चुका है. शेष इंजनों में भी चरणबद्ध तरीके से फिटमेंट का काम किया जा रहा है. वहीं, नए बनने वाले इलेक्ट्रिक लोको में कवच सिस्टम पहले से उपलब्ध रहेगा. तकनीकी सुधारों का असर लोको की विश्वसनीयता पर भी दिखाई दे रहा है. पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में एचएचपी डीजल लोको फेलियर में 40 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक लोको फेलियर में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. रेलवे बोर्ड के लक्ष्य की तुलना में डीजल लोको आउटेज में 21 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक लोको आउटेज में छह प्रतिशत सुधार हुआ है.
स्वदेशी तकनीक से जांच, खराबी की पहले पहचानबीजीकेटी लोको शेड में विकसित ‘पी पाइप फ्लो टेस्ट बेंच’ स्वदेशी तकनीकी नवाचार का उदाहरण है. इसके जरिए पिस्टन कूलिंग पाइपों को इंजन में फिट करने से पहले उनकी ऑयल फ्लो और स्प्रे क्षमता की जांच की जाती है. इससे खराब पाइपों की पहचान पहले ही हो जाती है और इंजन में संभावित नुकसान की आशंका को कम किया जा सकता है. संसाधनों के पुन: उपयोग की दिशा में भी शेड ने काम किया है. 4.73 करोड़ रुपए मूल्य के 84 उपयोगी लोको उपकरण विभिन्न रेलवे शेडों, कार्यशालाओं और उत्पादन इकाइयों को उपलब्ध कराए गए हैं. इसके अलावा तीन माह में 10 इलेक्ट्रिक लोको के टीओएच और 11 एचएचपी डीजल लोको के प्रमुख अनुरक्षण शेड्यूल पूरे किए गए.
जल संरक्षण के साथ अनुरक्षण व्यवस्था में सुधारपर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बीजीकेटी लोको शेड लगातार कदम उठा रहा है. 181 इलेक्ट्रिक लोको में से 77 में जलरहित यूरिनल लगाए जा चुके हैं, इससे पानी की खपत कम करने के साथ अनुरक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है. मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के अनुसार आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण अनुरक्षण और स्वदेशी नवाचार के जरिए बीजीकेटी लोको शेड रेलवे के ‘सुरक्षा पहले’ के संकल्प को मजबूती दे रहा है. ऐसे में शेड में हो रहे तकनीकी बदलाव केवल अनुरक्षण व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पटरियों पर दौड़ती ट्रेनों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और बेहतर संचालन को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
August 25, 2026, 11:05 IST



