Justice Muralidhar Story: भारत के जज ने इजरायल की कलई खोल दी, 20 हजार बच्चों के खून का हिसाब दुनिया को बताया

भारत के एक जज ने दुनिया के सबसे बड़े मंच पर खड़े होकर इजरायल की कलई खोलकर रख दी है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सेना जिस कत्लेआम को लगातार झुठलाती आ रही थी, इस भारतीय जज ने उस सफेद झूठ का पर्दाफाश कर दिया है. उन्होंने दुनिया के सामने डंके की चोट पर बताया कि कैसे गाजा में 20 हजार से ज्यादा मासूम बच्चों का बेरहमी से खून बहाया गया. हम बात कर रहे हैं यूएन की इन्क्वायरी कमेटी के चेयरमैन और रिटायर्ड जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर की, जिनकी रिपोर्ट पर बवाल मचा हुआ है.
रिपोर्ट में ऐसा क्या लिखा
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष की जांच के लिए एक आयोग बनाया था. पिछले साल नवंबर में जस्टिस मुरलीधर इस आयोग के अध्यक्ष बने. 23 जून को इनकी टीम ने 94 पन्नों की एक ऐसी रिपोर्ट पेश की है, जिसे पढ़कर किसी का भी दिल दहल जाए. यह रिपोर्ट अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच गाजा में बच्चों पर हुए जुल्मों का कच्चा चिट्ठा है.
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि वहां क्या खेल हुआ
उनकी रिपोर्ट कह रही कि इजरायल ने दो साल के इस युद्ध में कम से कम 20,179 फिलिस्तीनी बच्चों की जान ली है. गाजा में जितनी मौतें हुई हैं, उनमें से 30 प्रतिशत सिर्फ बच्चे हैं. करीब 44,000 बच्चे बुरी तरह घायल हुए हैं और 58,000 बच्चे अनाथ हो गए हैं.
रिपोर्ट बताती है कि बच्चों को स्नाइपर्स और बेहद सटीक ड्रोन हमलों से चुन-चुनकर निशाना बनाया गया.मानवीय मदद रोक दी गई, जिससे बच्चे भुखमरी और बीमारियों से तड़प-तड़प कर मरे. यहां तक कि अस्पतालों के जच्चा-बच्चा वार्ड्स तक को नहीं बख्शा गया. वेस्ट बैंक के इलाके में फिलिस्तीनी बच्चों के साथ यौन हिंसा और उन्हें टॉर्चर करने के भी गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं.
इजरायल के हर झूठ का पर्दाफाश
जस्टिस मुरलीधर ने लाग-लपेट के बिना साफ शब्दों में कहा, सबूत चीख-चीख कर कह रहे हैं कि इजरायली सुरक्षा बलों ने फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर अपना निशाना बनाया और मारा है.
इजरायल कहता रहा है कि हमास वाले बच्चों को ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं. जस्टिस मुरलीधर ने इस दावे को एक सफेद झूठ बताकर खारिज कर दिया. उन्होंने बताया कि जिन बच्चों की जान गई, उनमें से ज्यादातर किसी युद्ध का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे थे.
इस रिपोर्ट ने सिर्फ आंकड़े नहीं दिए हैं, बल्कि एक तगड़ी सिफारिश भी की है. आयोग ने कहा है कि दुनिया भर के देश इजरायल को हथियार बेचना तुरंत बंद करें, क्योंकि इन हथियारों से जनसंहार हो रहा है. साथ ही इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित उन सभी इजरायली अधिकारियों को गिरफ्तार किया जाए, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ढूंढ रहा है.
कौन हैं जस्टिस मुरलीधर?
जस्टिस मुरलीधर की पहचान एक ऐसे जज की रही है, जो सत्ता के दबाव में कभी नहीं झुके और हमेशा नागरिक अधिकारों के लिए खड़े रहे. 64 साल के जस्टिस मुरलीधर ने साल 1984 में चेन्नई से अपनी वकालत शुरू की थी. शुरुआती दिनों से ही वो मजलूमों की आवाज बने. 1984 की भयानक भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए उन्होंने बिना कोई फीस लिए केस लड़ा. नर्मदा नदी पर बांध बनने से बेघर हुए आदिवासियों के हकों के लिए भी उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी.
बतौर जज दिए ऐतिहासिक फैसले
साल 2006 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया. यहां रहते हुए उन्होंने कई बड़े और रसूखदार लोगों के खिलाफ फैसले सुनाए.
1984 सिख विरोधी दंगे: साल 2018 में उनकी ही बेंच ने दंगों में भीड़ को उकसाने के जुर्म में सत्ताधारी कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
हाशिमपुरा कांड: 1987 में 40 से ज्यादा बेगुनाह मुस्लिमों को पुलिस कस्टडी में मारने वाले 16 पुलिसकर्मियों को तीन दशक बाद उन्होंने ही सलाखों के पीछे भेजा.
नजीब अहमद केस: जेएनयू छात्र नजीब अहमद के लापता होने के मामले में उन्होंने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) को उसकी लापरवाही के लिए कड़ी फटकार लगाई थी.
वो आधी रात का ट्रांसफर
जस्टिस मुरलीधर के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट फरवरी 2020 में आया. दिल्ली दंगों की आग में जल रही थी. घायलों को अस्पताल नहीं मिल रहा था. जस्टिस मुरलीधर ने आधी रात को अपने घर पर कोर्ट लगाई और पुलिस को घायलों को सुरक्षित निकालने का आदेश दिया. अगले ही दिन, उन्होंने भड़काऊ भाषण देने वाले नेता का वीडियो कोर्ट में चलवाया और पुलिस को 24 घंटे के अंदर FIR दर्ज करने का आदेश दे दिया. कहते हैं कि इसके बाद ही उनका ट्रांसफर 240 किलोमीटर दूर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट कर दिया गया.
UN से मिली खास पहचान
अपने बेखौफ अंदाज के चलते वो जनवरी 2021 में उड़ीसा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने. अगस्त 2023 में जब वो रिटायर हुए, तो वकीलों ने उनके सम्मान में उन पर फूल बरसाए थे. उन्हें यूएन ने सम्मान दिया. उन पर भरोसा जताया और आज वही जज गाजा में बच्चों के खून का हिसाब मांग कर इजरायल की आंखों की किरकिरी बन गए हैं.



