kamlesh prajapati encounter case | IPS Anand Sharma

Last Updated:June 19, 2026, 18:38 IST
Kamlesh Prajapati Encounter IPS Anand Sharma Case : जोधपुर सेशन कोर्ट ने कमलेश प्रजापति एनकाउंटर केस में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, आनंद शर्मा समेत 24 पुलिसकर्मियों को राहत, फायरिंग को आत्मरक्षा माना गया. यह मामला साल 2021 से लगातार सुर्खियों में रहा. एनकाउंटर के बाद विरोध प्रदर्शन हुए, राजनीतिक बयानबाजी हुई, सीबीआई जांच बैठी और फिर अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई चली.
जोधपुर. करीब पांच साल से राजस्थान की राजनीति, पुलिस महकमे और अदालतों में चर्चा का विषय बने कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में अब बड़ा मोड़ आ गया है. जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए तत्कालीन बाड़मेर एसपी आनंद शर्मा समेत 24 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत दे दी है. कोर्ट के इस फैसले को पुलिस पक्ष के लिए बड़ी कानूनी जीत के तौर पर देखा जा रहा है.
यह मामला साल 2021 से लगातार सुर्खियों में रहा. एनकाउंटर के बाद विरोध प्रदर्शन हुए, राजनीतिक बयानबाजी हुई, सीबीआई जांच बैठी और फिर अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई चली. अब सेशन कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इस पूरे मामले को लेकर एक नया अध्याय जुड़ गया है. हालांकि इस फैसले के बाद भी इस प्रकरण को लेकर चर्चा थमने वाली नहीं दिख रही.
कोर्ट ने माना आत्मरक्षा में हुई थी फायरिंगसेशन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि घटना के दौरान कमलेश प्रजापति ने मौके से भागने का प्रयास किया था और इसी दौरान उसने पुलिस टीम पर वाहन चढ़ाने की कोशिश की थी. अदालत ने माना कि उस स्थिति में पुलिस द्वारा की गई फायरिंग आत्मरक्षा में और एक हेड कांस्टेबल की जान बचाने के उद्देश्य से की गई जवाबी कार्रवाई थी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उपलब्ध तथ्यों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर इस घटना को फर्जी एनकाउंटर नहीं माना जा सकता. अदालत ने माना कि मामले में जो सामग्री रिकॉर्ड पर मौजूद है, वह पुलिस कार्रवाई को पूरी तरह संदेह के घेरे में नहीं लाती.
2021 में हुआ था एनकाउंटर, सीबीआई ने दी थी क्लीन चिटगौरतलब है कि 22 अप्रैल 2021 को बाड़मेर जिले के सदर थाना क्षेत्र में कमलेश प्रजापति का पुलिस एनकाउंटर हुआ था. घटना के बाद प्रजापति समाज और तत्कालीन पचपदरा विधायक मदन प्रजापत ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी. विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करने के बाद पुलिस कार्रवाई को सही माना और संबंधित पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को क्लीन चिट देते हुए अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी. लेकिन कमलेश प्रजापति की पत्नी ने इस रिपोर्ट को चुनौती दे दी. इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को पर्याप्त महत्व नहीं देते हुए सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर हत्या का संज्ञान ले लिया था. इसी आदेश के खिलाफ तत्कालीन एसपी आनंद शर्मा सहित अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी.
24 पुलिसकर्मियों को मिली राहतमामले की विस्तृत सुनवाई के बाद जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और आनंद शर्मा सहित सभी 24 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत प्रदान कर दी. अदालत के फैसले में वैज्ञानिक तथ्यों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को अहम आधार माना गया. करीब पांच वर्षों तक चले इस चर्चित एनकाउंटर मामले में आए फैसले को एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव माना जा रहा है. अदालत के आदेश से पुलिस पक्ष को बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन यह मामला आने वाले दिनों में भी कानूनी और सामाजिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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