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Kidney Stone: किडनी स्टोन से बचने के लिए सिर्फ पानी पीना काफी है? एक्सपर्ट ने बताया क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी

Kidney Stone Prevention Tips: देहरादून में बदलते मौसम और खान-पान के साथ किडनी स्टोन यानी पथरी की समस्या भी बढ़ रही है. पहाड़ी और मैदानी इलाकों के बीच बसे शहर में पानी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद कैल्शियम को भी इसकी एक वजह माना जा रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर में पानी की कमी होने पर मिनरल्स जमा होकर छोटे-छोटे क्रिस्टल बनाने लगते हैं, जो धीरे-धीरे पथरी का रूप ले सकते हैं.

पथरी से बचने के लिए पर्याप्त पानी पीना सबसे जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञ के मुताबिक, सामान्य तौर पर रोजाना 3 से 4 लीटर पानी पीना फायदेमंद हो सकता है, हालांकि पानी की जरूरत व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और दूसरी स्थितियों पर निर्भर करती है. नारियल पानी, नींबू पानी और फाइबर वाले ताजे फलों को डाइट में शामिल करें. वहीं ज्यादा नमक, जंक फूड और कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें ऑक्सलेट अधिक होता है, उनका सेवन सीमित रखना चाहिए. अगर पेट या कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द हो तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट?देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी ने बताया कि उनके पास पथरी के कई मरीज आते हैं. इनमें छोटी पथरी से लेकर करीब 30 एमएम तक की बड़ी पथरी वाले मरीज भी शामिल हैं. बड़ी पथरी के कुछ मामलों को स्टैगहॉर्न कैलकुलस कहा जाता है. वहीं कुछ मरीजों में एक साथ कई पथरियां भी देखने को मिलती हैं.

उन्होंने बताया कि माइक्रोलिथ स्टोन भी होते हैं, जिनका आकार करीब 2 एमएम तक हो सकता है. इतनी छोटी पथरी कई बार अल्ट्रासाउंड में भी दिखाई नहीं देती. उनके मुताबिक, उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के कई इलाकों में भी पथरी की समस्या देखने को मिलती है.

पानी की कमी भी बड़ी वजहडॉ. सिराज सिद्दीकी के मुताबिक, कई मरीजों में कैल्शियम ऑक्सलेट स्टोन पाए जाते हैं. खाने-पीने की कुछ चीजों में ऑक्सलेट मौजूद होता है. इसके अलावा शरीर में पानी की कमी होने पर भी पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है. पानी कम पीने से मिनरल्स और दूसरे पदार्थ क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगते हैं और आगे चलकर पथरी बन सकती है. यूरिक एसिड भी पथरी बनने की एक वजह हो सकता है. डॉक्टर के मुताबिक, ज्यादा नॉनवेज खाने और पर्याप्त पानी नहीं पीने वाले कुछ लोगों में यूरिक एसिड बढ़ सकता है. इसके क्रिस्टल जमा होकर पथरी का रूप ले सकते हैं.

हिमालयन इंस्टीट्यूट की रिसर्च में क्या सामने आया?डॉ. सिद्दीकी ने बताया कि हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की एक स्टडी में 435 मरीजों को शामिल किया गया था. यह अध्ययन 2005 से 2018 के बीच किया गया. इसमें महिलाओं की तुलना में पुरुषों में पथरी की समस्या ज्यादा देखने को मिली. खास तौर पर 20 से 40 साल की उम्र के वयस्क पुरुषों में इसके मामले अधिक पाए गए.

उन्होंने बताया कि इस समस्या के पीछे डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी एक प्रमुख वजह रही. शुरुआत में छोटी पथरी ज्यादा परेशानी नहीं देती, लेकिन समय पर ध्यान नहीं देने पर इसका आकार बढ़ सकता है और किडनी पर भी असर पड़ सकता है. गंभीर मामलों में स्थिति काफी बिगड़ सकती है.

छोटी पथरी में इन चीजों का किया जाता है इस्तेमाल

डॉ. सिद्दीकी के मुताबिक, छोटी पथरी के कुछ मामलों में पारंपरिक तौर पर पत्थरचट्टा की पत्तियों का अर्क, गेहूं की दाल का पानी और भुट्टे के बाल उबालकर उसका पानी इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इन्हें इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए और किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है. अगर पथरी बड़ी है, दर्द लगातार बढ़ रहा है या पेशाब से जुड़ी परेशानी हो रही है तो घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने के बजाय विशेषज्ञ से जांच और उचित इलाज कराना जरूरी है. समय पर जांच और इलाज से गंभीर स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है.

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