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केर-सांगरी छोड़िए, इस बार ट्राई करें मारवाड़ स्पेशल केर के फूलों का रायता; स्वाद ऐसा कि उंगलियां चाटते रह जाएंगे

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केर-सांगरी छोड़िए, ट्राई करें केर के फूलों का रायता; स्वाद में भी है लाजवाब

Last Updated:June 18, 2026, 15:32 IST

Marwari Ker Flower Raita Recipe: मारवाड़ के पारंपरिक स्वाद में केर, सांगरी और पंचकूटा का नाम तो हर कोई जानता है, लेकिन केर के फूलों का रायता भी राजस्थान की एक बेहद खास और पौष्टिक रेसिपी है. गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला यह रायता ताजे केर के फूलों, गाढ़े दही, मसालों और देसी तड़के से तैयार किया जाता है. इसकी खासियत इसका अनोखा स्वाद और स्वास्थ्य लाभ हैं. केर के फूलों में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. बाजरे की रोटी और काचरी की चटनी के साथ परोसा जाने वाला यह रायता मारवाड़ की पारंपरिक रसोई की पहचान माना जाता है.

जब बात राजस्थान और हमारे मारवाड़ के स्वाद की आती है, तो सबसे पहले जुबान पर नाम आता है पंचकूटा, केर और सांगरी की सूखी सब्जी का. लेकिन क्या आपने कभी केर के फूलों से बना बिल्कुल देसी, गाढ़ा और तड़के वाला रायता चखा है? जी हां, मारवाड़ की तपती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच हमारे बुजुर्गों की रसोई से निकला यह रायता स्वाद में जितना लाजवाब है, उतना ही सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे केर के कच्चे और कोमल फूलों, चुनिंदा मसालों तथा ताजी छाछ-दही के मेल से आप घर पर ही यह अमृत जैसा रायता तैयार कर सकते हैं. इससे न केवल आपकी सेहत अच्छी रहेगी, बल्कि गर्मी के मौसम में यह रायता खाते ही आप और आपके परिवार के लोग उंगलियां चाटते रह जाएंगे.आइए जानते हैं इसकी पूरी पारंपरिक और स्वादिष्ट रेसिपी…

केर के फूलों का पारंपरिक रायता बनाने के लिए सबसे पहले 1 कप ताजे और कोमल केर के फूल लें और उन्हें अच्छी तरह साफ कर लें. इसके लिए 2 से 3 कप गाढ़ा देसी दही लें और उसे अच्छी तरह मथकर तैयार करें. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें 1 छोटा चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, काला नमक और सादा नमक स्वादानुसार मिलाएं. तड़के के लिए 1 छोटा चम्मच सरसों का तेल या देसी घी, आधा छोटा चम्मच राई और जीरा, एक चुटकी हींग तथा बारीक कटी हुई हरी मिर्च का उपयोग करें. इन सभी सामग्री के मेल से तैयार यह रायता स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संगम माना जाता है.

केर के फूलों का रायता बनाने की शुरुआत फूलों की कड़वाहट निकालने से होती है, क्योंकि ताजे केर के फूलों में हल्का कसैलापन होता है. इसके लिए सबसे पहले फूलों को साफ पानी से 2 से 3 बार धो लें. अब एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें थोड़ा सा नमक डालकर इन फूलों को 5 से 7 मिनट के लिए मध्यम आंच पर उबलने दें. जब फूल हल्के मुलायम हो जाएं, तो इन्हें छानकर ठंडे पानी से धो लें और हाथों से हल्का सा दबाकर अतिरिक्त पानी निकाल दें. कुछ लोग पारंपरिक तरीके से इन्हें छाछ में एक दिन भिगोकर भी रखते हैं, जिससे इनका स्वाद और भी ज्याद बेहतर हो जाता है.

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अब रायते को पारंपरिक स्वाद देने के लिए एक छोटे पैन में सरसों का तेल या देसी घी गर्म करें. इसमें राई, जीरा और एक चुटकी हींग डालकर तड़काएं. इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड भून लें. तैयार तड़के को दही और केर के फूलों के मिश्रण पर डाल दें और अच्छी तरह मिला लें. कुछ मिनट के लिए रायते को ढककर रख दें, ताकि मसालों और तड़के का स्वाद पूरी तरह उसमें घुल-मिल जाए.

तेल या घी गर्म होने पर उसमें राई, जीरा, हींग और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर सुगंधित तड़का तैयार करें. इसके बाद इस गर्म तड़के को तुरंत रायते के ऊपर डाल दें. तड़का डालते ही बर्तन को करीब 2 मिनट के लिए ढककर रखें, ताकि हींग, जीरे और मसालों की खुशबू रायते में पूरी तरह समा जाए. यह छोटा-सा पारंपरिक तरीका रायते के स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है. तड़के की महक और केर के फूलों का अनोखा स्वाद मिलकर इसे बेहद लजीज बना देते हैं, जिसे एक बार चखने के बाद हर कोई दोबारा जरूर खाना चाहेगा.

रायता तैयार होने के बाद इसे मिट्टी के कुल्हड़ या सकोरे में ठंडी-ठंडी छाछ के साथ परोसें. राजस्थान में इस पारंपरिक व्यंजन का स्वाद बाजरे की रोटी, काचरी की चटनी और देसी घी के साथ और भी बढ़ जाता है. स्वादिष्ट होने के साथ-साथ यह रायता सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. केर के फूलों में प्राकृतिक एंटी-ऑक्सीडेंट्स, खनिज तत्व और पोषक गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद करते हैं. यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने, पेट संबंधी समस्याओं को कम करने और गर्मी के मौसम में होने वाली मौसमी बीमारियों से बचाव में भी सहायक माना जाता है. यही वजह है कि मारवाड़ में इसे पारंपरिक सुपरफूड के रूप में देखा जाता है.

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