Lung Cancer Symptoms and Causes in Pali

Pali: पाली जिले में फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रहा है. दुनिया भर में तेजी से फैलने वाली यह जानलेवा बीमारी अब पाली के लोगों को भी अपनी चपेट में ले रही है. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, बांगड़ अस्पताल में हर सप्ताह औसतन दो नए मरीज फेफड़ों के कैंसर यानी लंग कैंसर के लक्षणों के साथ आ रहे हैं. यह आंकड़े न केवल चिकित्सा विभाग के लिए बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय हैं. सबसे बड़ी और डराने वाली बात यह है कि अधिकांश मरीजों को अपनी बीमारी का पता तब चलता है जब वे अंतिम चरणों में पहुंच चुके होते हैं. ऐसे में डॉक्टरों के लिए उनका इलाज करना बेहद चुनौतीपूर्ण और कई बार नामुमकिन हो जाता है.
पाली के बांगड़ अस्पताल के प्रसिद्ध श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. लक्ष्मण सोनी ने इस बढ़ती समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उनके अनुसार, जिले में इस बीमारी के मामलों में अचानक उछाल के तीन प्रमुख कारण हैं. सबसे पहला और बड़ा कारण धूम्रपान की लत है. जो लोग लंबे समय से बीड़ी, सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं, उनके फेफड़ों को सीधा और गंभीर नुकसान पहुंच रहा है. इसके अलावा, जिले में चल रहे अनगिनत निर्माण कार्य, सीमेंट फैक्ट्रियां और अत्यधिक धूल-धुएं वाला प्रदूषित माहौल भी लोगों को बीमार कर रहा है. इन जगहों पर काम करने वाले श्रमिकों में इस बीमारी का खतरा कई गुना अधिक होता है. तीसरा बड़ा कारण लोगों के खानपान में घोर लापरवाही है. भोजन में प्रोटीन और फाइबर की कमी के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कमजोर हो जाती है, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारियां आसानी से शरीर को जकड़ लेती हैं.
पाली में जांच की सुविधा, लेकिन इलाज के लिए जोधपुर जाना मजबूरीबांगड़ अस्पताल में लंग कैंसर की शुरुआती जांच के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है. अस्पताल में मरीजों के लिए एक्स-रे, सीटी स्कैन, ब्रोंकोस्कोपी, बायोप्सी और पीईटी स्कैन जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं. ब्रोंकोस्कोपी के जरिए एक पतली और लचीली ट्यूब की मदद से फेफड़ों के अंदर की स्थिति का सटीक पता लगाया जाता है. वहीं, बायोप्सी के जरिए संदिग्ध ट्यूमर के ऊतकों का सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है, जिससे कैंसर की सौ प्रतिशत पुष्टि होती है. पीईटी स्कैन यह बताता है कि कैंसर शरीर के अन्य अंगों तक फैला है या नहीं.
लेकिन दुर्भाग्यवश, जिले में कोई भी विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) और एडवांस्ड कैंसर केयर यूनिट उपलब्ध नहीं है. इसके चलते, जैसे ही किसी मरीज में कैंसर की पुष्टि होती है, उसे तुरंत आगे के इलाज के लिए जोधपुर रेफर कर दिया जाता है. स्थानीय स्तर पर पूर्ण उपचार की स्थायी व्यवस्था न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग के पास लंग कैंसर से होने वाली मौतों और कुल मरीजों का कोई सटीक रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.
कैंसर के खतरनाक लक्षण और चार स्टेज की गंभीरतालंग कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है. डॉ. सोनी स्पष्ट करते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी हो रही है, खांसी के साथ खून आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही है, सीने में लगातार दर्द बना हुआ है, या बिना किसी कारण के वजन तेजी से गिर रहा है और अत्यधिक थकान महसूस हो रही है, तो उसे इन संकेतों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत जांच करानी चाहिए.
लंग कैंसर को गंभीरता के आधार पर चार अलग-अलग स्टेज में बांटा गया है. स्टेज-1 में कैंसर केवल फेफड़ों तक सीमित रहता है और इस समय इलाज मिलने पर मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है. स्टेज-2 और स्टेज-3 में कैंसर फेफड़ों के आसपास के लिम्फ नोड्स तक पहुंच जाता है, जहां समय पर इलाज से मरीज का जीवनकाल बढ़ाया जा सकता है. अंतिम और स्टेज-4 में कैंसर शरीर के अन्य अंगों तक बुरी तरह फैल चुका होता है, जहां इसे पूरी तरह खत्म करना असंभव हो जाता है, हालांकि उपचार से सिर्फ दर्द और लक्षणों में राहत दी जा सकती है.
बचाव और सतर्कता ही एकमात्र उपायलंग कैंसर की गंभीरता को देखते हुए अब आम जनमानस को जागरूक होना पड़ेगा. जब फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और एक घातक ट्यूमर का आकार ले लेती हैं, तब यह स्थिति लंग कैंसर कहलाती है. यह एक दिन में विकसित होने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि सालों की लापरवाही का भयानक परिणाम है. स्मोकिंग से दूरी बनाकर, औद्योगिक प्रदूषण से बचकर और समय पर स्वास्थ्य जांच कराकर इसके भारी खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.



