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Mahanya Singh Bikaner | 5-Year-Old Sets Asia Book of Records

Last Updated:May 11, 2026, 09:19 IST

Mahanya Singh Bikaner: बीकानेर की 5 वर्षीय महान्या सिंह राजपुरोहित ने ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज कराया है. उन्होंने 6 मिनट 18 सेकंड में लगातार 50 कार्टव्हील लगाते हुए दुनिया के विभिन्न देशों के झंडे, उनकी राजधानी और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की पहचान की. भाजपा नेता गुमान सिंह की पौत्री महान्या ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया है. अब उनका अगला लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भारत का नाम रोशन करना है.

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बीकानेर की 5 साल की बेटी का कमाल: हवा में कलाबाजी के साथ पहचाने दुनिया के देशZoomबीकानेर की 5 साल की बेटी का कमाल: हवा में कलाबाजी के साथ पहचाने दुनिया के देश, बना डाले 2 रिकॉर्ड.

बीकानेर. प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती और इस कहावत को बीकानेर की महज 5 वर्षीय नन्ही परी महान्या सिंह राजपुरोहित ने पूरी दुनिया के सामने सच साबित कर दिखाया है. महान्या ने अपनी शारीरिक चपलता और विलक्षण याददाश्त का ऐसा हैरतअंगेज प्रदर्शन किया है कि देखने वाले दंग रह गए. इस ‘वंडर किड’ ने एक साथ दो बड़े कीर्तिमान स्थापित करते हुए ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया है. महान्या की इस उपलब्धि ने न केवल मरुधरा बल्कि पूरे देश का मान वैश्विक पटल पर बढ़ाया है.

महान्या ने जो कारनामा कर दिखाया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है. उन्होंने लगातार 6 मिनट 18 सेकंड तक बिना रुके 50 ‘कार्टव्हील’ (हवा में कलाबाजियां) लगाईं. ताज्जुब की बात यह है कि इस शारीरिक श्रम के दौरान भी उनका मस्तिष्क पूरी तरह सक्रिय था. हर कलाबाजी के साथ वे टेलीविजन स्क्रीन पर तेजी से बदल रहे विभिन्न देशों के झंडों को पहचान रही थीं. उन्होंने न केवल देशों के नाम बताए, बल्कि उनकी राजधानी और वहां स्थित ‘यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट’ का सटीक नाम बताकर निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

सफलता के पीछे परिवार का समर्पणभाजपा नेता गुमान सिंह राजपुरोहित की पौत्री महान्या अपनी इस अभूतपूर्व सफलता का पूरा श्रेय अपनी माता प्रतिभा सिंह और पिता पुष्पेंद्र सिंह को देती हैं. महान्या का कहना है कि उनके माता-पिता ने न केवल उनके भीतर की प्रतिभा को पहचाना, बल्कि उसे निखारने के लिए घर पर ही अभ्यास का विशेष सेटअप तैयार किया. साथ ही उन्हें पेशेवर कोचिंग भी उपलब्ध कराई गई, जिससे उनकी शारीरिक लचीलापन और एकाग्रता में सुधार हुआ. परिवार के अटूट विश्वास और मार्गदर्शन ने ही उन्हें आज इस मुकाम तक पहुँचाया है.

अगला लक्ष्य: गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्सएशिया और इंडिया बुक में नाम दर्ज कराने के बाद अब इस नन्ही खिलाड़ी के हौसले बुलंद हैं. महान्या ने बताया कि उनका अगला और सबसे बड़ा लक्ष्य ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम दर्ज कराना है. वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का तिरंगा लहराना चाहती हैं और दुनिया को दिखाना चाहती हैं कि भारतीय बच्चे मानसिक और शारीरिक दोनों ही क्षेत्रों में अद्वितीय हैं. महान्या की इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और हर कोई इस नन्ही परी के उज्जवल भविष्य की कामना कर रहा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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