‘आज ही फिर बुद्ध मुस्कुराए थे…’ अटल बिहारी वाजपेयी के इस ऐतिहासिक ऐलान ने बदल दी थी दुनिया की सोच

Last Updated:May 11, 2026, 08:07 IST
Pokhran Nuclear Test: पोकरण परमाणु परीक्षण की 28वीं वर्षगांठ देशभर में गर्व और सम्मान के साथ मनाई जा रही है. 11 और 13 मई 1998 को पोकरण के खेतोलाई क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों और सेना ने सफल परमाणु परीक्षण कर दुनिया को भारत की सामरिक शक्ति का अहसास कराया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हुए इस मिशन को एपीजे अब्दुल कलाम की निगरानी में बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया. इस ऐतिहासिक घटना ने भारत को परमाणु संपन्न देशों की श्रेणी में मजबूती से स्थापित कर दिया.
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परमाणु परीक्षण वर्षगांठ
जैसलमेर: पोकरण परमाणु परीक्षण की 28वीं वर्षगांठ आज पूरे देश में गर्व और सम्मान के साथ याद की जा रही है. 11 मई और 13 मई 1998 को पोकरण के खेतोलाई गांव के पास भारतीय वैज्ञानिकों और सेना ने सफल परमाणु परीक्षण कर दुनिया को भारत की सामरिक शक्ति का एहसास कराया था. यह ऐतिहासिक घटना सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए हैरान वाली थी. तपते रेगिस्तान में हुए इन परीक्षणों ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई. सभी देशवासियों के मन में आत्मविश्वास और गौरव की भावना को मजबूत किया था.
उस समय भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे. दुनिया के तमाम दबावों के बावजूद उन्होंने भारत की सुरक्षा और मजबूती को प्राथमिकता देते हुए परमाणु परीक्षण का साहसिक निर्णय लिया. परीक्षण सफल होने के बाद वाजपेयी ने कहा था- ‘आज बुद्ध मुस्कुरा रहे हैं.’ यह बयान भारत की शक्ति, शांति और आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया. भारत के इस कदम से पाकिस्तान सहित कई देशों में हलचल मच गई थी. वहीं देशभर में लोगों ने इसे राष्ट्रीय गौरव की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि मानी थी.
एपीजे अब्दुल कलाम की गोपनीय रणनीतिइन परमाणु परीक्षणों को एपीजे अब्दुल कलाम की निगरानी में बहुत गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया था. भारतीय वैज्ञानिकों और सेना ने इतनी गोपनीयता बरती कि दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसियों में शामिल अमेरिकी एजेंसियों को भी इसकी हवा तक नहीं लगी थी.
रेगिस्तान की तपती रेत में दिन-रात मेहनत कर भारतीय वैज्ञानिकों और सैनिकों ने मिशन को सफल बनाया. 11 मई 1998 को 3 और 13 मई को दो परमाणु परीक्षण किए गए. इसके साथ ही भारत दुनिया के परमाणु संपन्न देशों की श्रेणी में मजबूती से शामिल हो गया.
“परमाणु नगरी” के रूप में मिली पहचानपोकरण परमाणु परीक्षण के बाद पोकरण को “परमाणु नगरी” के नाम से नई पहचान मिली. यह सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं थी, बल्कि भारत की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया था. आज भी खेतोलाई और आस-पास के लोग उस गौरवशाली पल को गर्व से याद करते हैं.
हालांकि स्थानीय लोगों की ओर से लंबे समय से क्षेत्र में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं मांग उठाई गई थी. लोगों का मानना है कि जिस भूमि ने देश को वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया, वहां विकास कार्यों को और तेज किया जाना चाहिए.
अटल संग्रहालय की मांग भी तेजक्षेत्र के विधायक महंत प्रतापपुरी महाराज लगातार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में पोकरण में “अटल संग्रहालय” स्थापित करने की मांग उठी थी. उनका कहना है कि इससे आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक घटना और भारत के गौरवशाली इतिहास को करीब से जान सकेंगी.
पोकरण की रेत में हुआ यह ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण आज भी देशवासियों के आत्मविश्वास, वैज्ञानिक क्षमता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बना हुआ है. यह घटना दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े फैसले खुद लेने में सक्षम है.
About the AuthorJagriti Dubey
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