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Bharatpur Honey Production | भरतपुर का सरसों शहद उत्पादन | Bharatpur Mustard Honey Production and Export Success

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भरतपुर में सरसों के फूलों ने बदली किसानों की तकदीर, विदेशों में बढ़ी मांग

Last Updated:May 01, 2026, 13:17 IST

Bharatpur Mustard Honey Production and Export Success: भरतपुर जिला सालाना 2400 मीट्रिक टन शहद उत्पादन के साथ देश के टॉप-5 केंद्रों में शामिल हो गया है. यहाँ का शहद मुख्य रूप से सरसों के फूलों से तैयार होता है, जिसे इसकी शुद्धता और सुनहरे रंग के कारण ‘स्वर्ण शहद’ कहा जाता है. इस व्यवसाय से करीब 5000 लोगों को रोजगार मिल रहा है. यह शहद अब दिल्ली, आगरा समेत विदेशों में भी निर्यात हो रहा है. मधुमक्खी पालन न केवल किसानों की आय बढ़ा रहा है बल्कि फसलों के परागण में मदद कर पैदावार को भी बेहतर बना रहा है.

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Bharatpur Mustard Honey Production and Export Success: राजस्थान का भरतपुर जिला अपनी सरसों की पैदावार के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहाँ के सरसों के खेतों के बीच मधुमक्खी पालन (Apiculture) एक बड़ी आर्थिक क्रांति लेकर आया है. भरतपुर अब देश के उन शीर्ष पांच जिलों में शामिल हो गया है जो सबसे अधिक शहद का उत्पादन करते हैं. जिले में वर्तमान में लगभग 4500 से 5000 लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस व्यवसाय से जुड़कर अपना रोजगार चला रहे हैं. हर साल यहाँ करीब 2400 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हो रहा है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

भरतपुर के शहद की सबसे बड़ी खासियत इसका सरसों के फूलों से तैयार होना है. सरसों के पराग के कारण इस शहद में एक विशेष सुगंध और हल्का सुनहरा रंग होता है, जिसकी वजह से इसे ‘स्वर्ण शहद’ कहा जाता है. यह पूरी तरह से प्राकृतिक और बिना किसी मिलावट के तैयार किया जाता है. बाजार में इसकी शुद्धता की इतनी मांग है कि इसकी शुरुआती कीमत 350 रुपये प्रति किलो से शुरू होती है और गुणवत्ता के आधार पर यह और भी महंगी बिकती है. किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए सरसों के खेतों के पास मधुमक्खियों के बक्से रखते हैं, जिससे शहद का संचय आसान हो जाता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में धाकयहाँ का शहद अब केवल भरतपुर या राजस्थान की मंडियों तक सीमित नहीं है. दिल्ली, जयपुर और आगरा जैसे बड़े शहरों की मांग पूरी करने के बाद इसे विदेशों में भी बड़े स्तर पर निर्यात किया जा रहा है. आधुनिक प्रोसेसिंग और आकर्षक पैकेजिंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भरतपुर के शहद की एक अलग पहचान बनी है. इससे न केवल किसानों को विदेशी मुद्रा के रूप में लाभ मिल रहा है, बल्कि जिले को ग्लोबल स्तर पर एक नई ब्रांड वैल्यू भी मिली है.

खेती के लिए भी लाभकारीउद्यान अधिकारी जनक राज मीणा के अनुसार, मधुमक्खी पालन किसानों के लिए ‘बोनस’ की तरह है. यह न केवल शहद बेचकर अतिरिक्त आय देता है, बल्कि मधुमक्खियों के कारण खेतों में परागण (Pollination) की प्रक्रिया तेज हो जाती है. इससे सरसों और अन्य फसलों की पैदावार में भी सुधार होता है. इस प्रकार किसान कम लागत में दोहरा मुनाफा कमा रहे हैं. इस क्षेत्र में अब युवाओं के लिए प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और पैकेजिंग जैसे नए करियर विकल्प भी खुल रहे हैं, जिससे ग्रामीण पलायन रुकने में मदद मिल रही है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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