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बरसात में हरी मिर्च की खेती या ‘लॉटरी’? जानिए पूसा की उन 5 सीक्रेट किस्मों के नाम… जो बदल देंगी किस्मत!

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बरसात में करें हरी मिर्च की खेती, पूसा की ये 5 किस्में बदल देंगी किस्मत!

Last Updated:July 02, 2026, 08:13 IST

Green Chilli Cultivation: बरसात के मौसम में हरी मिर्च की खेती किसानों के लिए एक लॉटरी साबित हो सकती है. इस सीजन में हरी मिर्च की मांग और कीमतें दोनों आसमान छूती हैं, जिससे कम लागत में भी रिकॉर्डतोड़ मुनाफा कमाया जा सकता है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा द्वारा विकसित टॉप 5 किस्में इस मौसम में बंपर पैदावार देने के लिए सबसे भरोसेमंद मानी जाती हैं.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि बरसात के दिनों में हरी मिर्च की खेती करना बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि इस दौरान फसलों को प्राकृतिक रूप से पानी मिल जाता है, जिससे सिंचाई की लागत लगभग शून्य हो जाती है. इसके अलावा, मानसून के महीनों में बाजार में हरी मिर्च की आवक कम होने के कारण थोक और रिटेल भाव काफी ऊंचे रहते हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतरीन दाम मिलता है.

पारंपरिक फसलों के मुकाबले हरी मिर्च की खेती में शुरुआती लागत बहुत कम होता है. पूसा की उन्नत किस्मों के रोग-प्रतिरोधी होने के कारण कीटनाशकों पर होने वाला खर्च भी काफी घट जाता है. मात्र 2 से 3 महीने की मेहनत के बाद जब इसकी तुड़ाई शुरू होती है, तो कम लागत में भी कई गुना ज्यादा रिटर्न मिलता है.

हरी मिर्च की पूसा सदाबहार (Pusa Sadabahar) सबसे लोकप्रिय किस्मों में से एक है, जिसके फल ऊपर की तरफ गुच्छों में लगते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘लीफ कर्ल’ यानी और मोजेक वायरस जैसी घातक बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है. उत्पादन की बात करें तो इससे प्रति हेक्टेयर लगभग 95 से 100 क्विंटल तक हरी मिर्च की शानदार पैदावार आसानी से मिल जाती है.

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पूसा ज्वाला किस्म के पौधे मध्यम आकार के होते हैं और इसकी मिर्चें लंबी, पतली और थोड़ी झुर्रीदार होती हैं. यह किस्म अपने तीखेपन और बेहतरीन स्वाद के लिए बाजार में तुरंत बिक जाती है. रोपाई के करीब 75 से 80 दिनों बाद इसकी पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है और इससे प्रति हेक्टेयर औसतन 80 से 85 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता है.

पूसा दीप्ति (Pusa Deepti) एक बेहतरीन किस्म है. अगर आप ठंडे या मध्यम पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बरसात के दौरान खेती कर रहे हैं, तो पूसा दीप्ति को लगा सकते हैं. इस किस्म के फल गहरे हरे, मोटे और आकर्षक होते हैं, जो मुख्य रूप से कम तीखी और सलाद वाली मिर्च के रूप में पसंद किए जाते हैं. इसकी उत्पादकता बहुत बढ़िया है और यह प्रति हेक्टेयर 100 क्विंटल से अधिक का उत्पादन देने की क्षमता रखती है.

पूसा तेज (Pusa Tej)<br />अपने नाम के मुताबिक ही यह किस्म बेहद तीखी होती है और इसके पौधे फैले हुए व मजबूत होते हैं. कम समय में तैयार होने वाली यह वैरायटी शुरुआती बारिश को अच्छी तरह सहन कर लेती है. इसके फलों की शेल्फ लाइफ लंबी होने के कारण इसे दूर की मंडियों में भी बिना खराब हुए भेजा जा सकता है, जिससे प्रति हेक्टेयर 70 से 80 क्विंटल तक पैदावार मिलती है.

बरसात में हरी मिर्च की खेती करते समय सबसे जरूरी ध्यान जल निकासी (Water Drainage) पर देना चाहिए. मिर्च के पौधों की जड़ों में पानी जमा होने से ‘आर्द्र गलन’ (Damping Off) रोग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए, बलुई दोमट या अच्छे जल निकास वाली ऊंची क्यारियों (Raised Beds) पर ही नर्सरी और पौधों की रोपाई करनी चाहिए ताकि रिकॉर्डतोड़ मुनाफा सुरक्षित रहे.

हरी मिर्च की खेती से अधिकतम मुनाफा कमाने के लिए मार्केटिंग की सही रणनीति जरूरी है. तुड़ाई के तुरंत बाद मिर्चों की छंटनी (Grading) कर उन्हें उनकी लंबाई और चमक के आधार पर अलग कर लें. स्थानीय मंडियों के अलावा, पास के शहरों की सब्जी मंडियों या सीधे होटलों और रेस्तरां से संपर्क करके आप बिचौलियों से बच सकते हैं, जिससे आपको अपनी फसल का दोगुना तक दाम मिल सकता है.

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