Rajasthan

दो सरहदों के बीच छिपा स्वर्ग! राजस्थान का मेघालय है ‘भील बेरी’, चेन्नई एक्सप्रेस के दूध सागर जैसा दिखता है नजारा

पाली. झमाझम बारिश का दौर शुरू होते ही हर किसी का मन पहाड़ों, हरियाली और कल-कल बहते झरनों की तरफ भागने लगता है. अगर आप भी इस मानसूनी मौसम में कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो राजस्थान के पाली जिले के पास आपका इंतजार कर रहा है प्रकृति का एक ऐसा अनमोल खजाना… जिसे देखकर आप खुद को रोक नहीं पाएंगे. जी हां, हम बात कर रहे हैं मारवाड़ के सुप्रसिद्ध ‘भील बेरी झरने’ की! करीब 182 फीट की हैरतअंगेज ऊंचाई से जब इस झरने का पानी दूध की सफेद धार की तरह नीचे गिरता है, तो वहां का नजारा किसी जन्नत से कम नहीं लगता.

अरावली की वादियों में छुपा यह खूबसूरत पर्यटन स्थल गोरम घाट से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. बारिश का मौसम आने को है. ऐसे में अब जल्द ही मारवाड़ व मेवाड़ की सरहद पर स्थित पर्यटक स्थल भील बेरी पर झरने जल्द ही शुरू होने वाले है. झरना एक बार शुरू होने के बाद करीब 2 महीने तक अनवरत बहता रहता है. यह झरना सिरियारी थाना क्षेत्र के करमाल चौराहा से करीब पांच किमी दूर है. यह क्षेत्र वैसे तो राजसमंद जिले में वन विभाग की ओर से अरावली टॉडगढ़-रावली सेंचुरी में शामिल किया गया है, लेकिन भील बेरी का झरना पाली जिले के भगोडा ग्राम पंचायत के तहत आता है.

85 रूपए में देखें राजस्थान का सबसे ऊंचा झरना

जुलाई में पर्यटकों का यहां पर जमावडा शुरू हो जाता है. इसके लिए उन्हें 85 रुपए का टिकट खरीदना पड़ेगा. भील बेरी झरना राजस्थान का सबसे ऊंचा झरना है. इस स्थान को राजस्थान का दूध सागर भी कहा जाता है. मारवाड़ जंक्शन से राणावास होते हुए सड़क मार्ग से करमाल चौराहा तक आने के बाद कामली घाट रोड पर 5 किलोमीटर दूर यह झरना स्थित है. जहां वन विभाग ने चौकी लगा रखी है, जबकि जंगल के रास्ते जाने के लिए गेट लगा रखा है. यहां जंगल से पहाड़ी के दुर्गम टेढ़े-मेढ़े रास्ते से पहुंचा जा सकता है. प्रकृति की वादियों में बसा यह स्थान चेन्नई एक्सप्रेस के दूध सागर जैसा लगता है. यहां आने पर आपको उत्तराखंड का एहसास होता है. भील बेरी को राजस्थान का मेघालय कहा जाता है.

चेन्नई एक्सप्रेस की शूटिंग में दिखाए झरने जैसा है यह झरना

अरावली की वादियों में बसा यह झरना फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस की शूटिंग के दौरान दिखाए गए दूध सागर जैसा लगता है. यहां आने पर ऐसा महसूस होता है कि आप दार्जिलिंग में आ गए हैं. मानसून में हजारों पर्यटक इस स्थान पर घूमने के लिए आते हैं. यह अरावली पर्वत श्रृंखला का सर्वाधिक उच्चतम झरना है जब यह झरना ऊंचाई से गिरता है तो वो देखने पर ऐसा ही लगता है कि यह दूध सागर है.

वन विभाग निकालता है विशेष टूर

हर साल उदयपुर वन विभाग की ओर से यह झरना देखने के लिए विशेष टूर निकाला जाता है. जिसमें आपको वन विभाग वहां की हर जगह का भ्रमण कराता है. उदयपुर वन विभाग की ओर से देसी-विदेशी पर्यटकों को विशेष ऑफर भी दिए जाते हैं, जिसमें पर्यटकों को वहां खाने से लेकर रुकने तक की सुविधा दी जाती है. झीलों की नगरी उदयपुर से गोरम घाट लगभग 5 से 6 घंटे की दूरी पर है. हालांकि, उदयपुर से गोरम घाट के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है. गोरम घाट जाने के लिए पहले हमें उदयपुर से पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन रेलवे स्टेशन पहुंचना होता है.

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