राजस्थान में मानसून पड़ा सुस्त, जयपुर-भरतपुर में बूंदाबांदी, जानिए कब बदलेगा मौसम

Rajasthan Today Weather: राजस्थान में मानसून की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है और अगले एक सप्ताह तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश की संभावना काफी कम दिखाई दे रही है. आईएमडी और जयपुर मौसम विज्ञान केन्द्र के ताजा अपडेट के अनुसार फिलहाल मानसूनी गतिविधियां कमजोर बनी रहेंगी. इस दौरान अधिकांश जिलों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा और केवल कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या छिटपुट बौछारें दर्ज हो सकती हैं. बारिश की कमी के कारण दिन के तापमान में बढ़ोतरी और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है. खासकर पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में तेज गर्मी और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है.
हालांकि 13 और 14 जुलाई को उत्तर भारत में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के संकेत हैं, जिसके प्रभाव से राजस्थान के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रदेश में मानसून की असली वापसी 20 जुलाई के बाद संभव है, जब बंगाल की खाड़ी में नया मौसम तंत्र बनने से राजस्थान की ओर नमी बढ़ सकती है. ऐसे में फिलहाल किसानों और आम लोगों को कुछ दिनों तक बारिश का इंतजार करना पड़ सकता है.
राजस्थान में 12 जुलाई से अगले एक सप्ताह तक मानसून कमजोर रहने की संभावना है
अधिकांश जिलों में अगले 7 दिन कमजोर रहेगा मानसून
आज इन संभागों में हल्की बारिश की संभावना
12 जुलाई को पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है. वहीं पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर संभाग में भी कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा की संभावना जताई गई है. इसके अलावा कई जिलों में बादल छाने के बावजूद बारिश नहीं होने से उमस बनी रह सकती है.
आज जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और जोधपुर संभाग के कुछ इलाकों में बूंदाबांदी के आसार हैं.
मानसून ट्रफ और पश्चिमी विक्षोभ की क्या है स्थिति
आईएमडी के अनुसार मानसून ट्रफ इस समय श्रीगंगानगर, रोहतक, शाहजहांपुर, गोरखपुर, डेहरी, बांकुरा और कांथी होते हुए पूर्व-उत्तरपूर्वी बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है. वहीं पश्चिमी विक्षोभ मध्य क्षोभमंडल में ट्रफ के रूप में सक्रिय है, जिसका अक्ष 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर 71 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास बना हुआ है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण अब कमजोर पड़ गया है. यही वजह है कि राजस्थान में मानसूनी गतिविधियां सीमित बनी हुई हैं.
जयपुर में गर्मी, धूलभरी आंधी और उमस का असर
जयपुर में रविवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. शहर में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और कुछ इलाकों में धूलभरी आंधी चल सकती है. आर्द्रता 38 से 41 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है. शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 78 दर्ज किया गया है, जो ‘मॉडरेट’ श्रेणी में है.
जयपुर में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और कुछ इलाकों में धूलभरी आंधी चल सकती है
13-14 जुलाई को मिल सकती है राहत
13 और 14 जुलाई को सक्रिय होने वाले कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, सीकर और बीकानेर के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है. इसी दौरान नागौर, जयपुर, दौसा, भरतपुर, जोधपुर, पाली, राजसमंद, उदयपुर और जालौर के कुछ इलाकों में भी खंड वर्षा या बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है.
राजस्थान में फिलहाल मानसून रहेगा कमजोर
• राजस्थान में आगामी एक सप्ताह तक मानसून कमजोर रहने की संभावना है. इस दौरान अधिकांश जिलों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा और केवल कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है.
• मौसम विभाग के अनुसार 12 जुलाई को जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और जोधपुर संभाग के कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है, जबकि अधिकांश जिलों में गर्मी और उमस बनी रहेगी.
• आईएमडी के अनुसार मानसून ट्रफ इस समय श्रीगंगानगर, रोहतक, शाहजहांपुर, गोरखपुर, डेहरी, बांकुरा और कांथी होते हुए पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है.
• मध्य क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ फिलहाल ट्रफ के रूप में मौजूद है, लेकिन इसका प्रभाव सीमित रहने से राजस्थान में व्यापक बारिश की संभावना नहीं बन रही है.
• पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण कमजोर पड़ गया है. इसी कारण मानसून की सक्रियता में कमी आई है और बारिश का दायरा सीमित हो गया है.
• पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. इससे धूलभरी आंधी और गर्मी का असर लोगों को परेशान कर सकता है.
• जयपुर में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. नमी का स्तर 38 से 41 प्रतिशत रहने से दिनभर उमस महसूस हो सकती है.
• 13 और 14 जुलाई को कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, झुंझुनूं और आसपास के इलाकों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है.
• जयपुर मौसम विज्ञान केन्द्र का अनुमान है कि 17 से 18 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में नया मौसम तंत्र बनने के संकेत हैं, जिससे 20 जुलाई के बाद राजस्थान में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं.
• जुलाई के अंतिम सप्ताह में यदि बंगाल की खाड़ी से बनने वाले मौसम तंत्र मजबूत रहे तो राजस्थान के कई जिलों में अच्छी और व्यापक बारिश होने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों को बड़ा लाभ मिल सकता है.
20 जुलाई के बाद बदल सकता है मौसम
जयपुर मौसम विज्ञान केन्द्र के अनुसार 17 से 18 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में नया मौसम तंत्र बनने के संकेत हैं. यदि यह सिस्टम मजबूत होता है तो 20 जुलाई के बाद मध्य प्रदेश के रास्ते राजस्थान में नमी बढ़ेगी और 21 से 23 जुलाई के दौरान कई जिलों में अच्छी बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है. 23 और 24 जुलाई के आसपास एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई जा रही है. यदि यह सक्रिय हुआ तो जुलाई के अंतिम सप्ताह में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून फिर जोर पकड़ सकता है. इससे खरीफ फसलों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है.
राजस्थान में अगले एक सप्ताह मौसम कैसा रहेगा?
मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक राजस्थान में मानसून कमजोर रहने की संभावना है. अधिकांश जिलों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा. केवल कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है. दिन में गर्मी और उमस बनी रहेगी, जबकि पश्चिमी राजस्थान में तेज हवाएं और धूलभरी आंधी भी चल सकती है. व्यापक और लगातार बारिश की संभावना फिलहाल नहीं है.
13 और 14 जुलाई को किन जिलों में बारिश की संभावना है?
कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 13 और 14 जुलाई को श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है. इसके अलावा नागौर, जयपुर, दौसा, भरतपुर, जोधपुर, पाली, उदयपुर, राजसमंद और जालौर के कुछ इलाकों में भी खंड वर्षा या हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना मौसम विशेषज्ञों ने जताई है.
राजस्थान में मानसून कमजोर क्यों पड़ गया है?
राजस्थान में मानसून कमजोर होने का मुख्य कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण का कमजोर पड़ना है. साथ ही पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव भी सीमित है. मानसून ट्रफ प्रदेश से होकर गुजर रही है, लेकिन पर्याप्त नमी और मजबूत मौसम तंत्र नहीं होने के कारण व्यापक वर्षा की स्थिति नहीं बन पा रही है. यही वजह है कि बारिश सीमित क्षेत्रों तक सिमट गई है.
20 जुलाई के बाद मौसम में क्या बदलाव हो सकता है?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 17 से 18 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में नया मौसम तंत्र बनने के संकेत हैं. यदि यह कम दबाव का क्षेत्र मजबूत होता है तो मध्य प्रदेश के रास्ते राजस्थान में नमी बढ़ेगी. इसके बाद 20 जुलाई से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं. 21 से 23 जुलाई के दौरान कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है और जुलाई के अंतिम सप्ताह में मानसून फिर पूरी तरह सक्रिय हो सकता है.
किसानों के लिए यह मौसम पूर्वानुमान कितना महत्वपूर्ण है?
खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार के लिए जुलाई का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. फिलहाल बारिश कमजोर रहने से कई क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ सकती है, खासकर जहां सामान्य से कम वर्षा हुई है. हालांकि 20 जुलाई के बाद अच्छी बारिश की संभावना जताई जा रही है. यदि यह पूर्वानुमान सही साबित होता है तो बाजरा, मूंग, ग्वार, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिल सकेगी, जिससे उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है.



