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वियतनाम बोट हादसा: टल सकती थीं 15 मौतें, क्या लापरवाही की वजह से हुआ हादसा? 5 सवाल और उसके जवाब

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वियतनाम बोट हादसा: टल सकती थीं 15 मौतें, क्या लापरवाही की वजह से हुआ हादसा?

Last Updated:July 12, 2026, 06:26 IST

Vietnam Speedboat Accident: वियतनाम में स्पीडबोट हादसे में 15 भारतीयों की मौत हो गई है. इस हादसे में 21 लोगों को बचा लिया गया. शुरुआती जांच में लापरवाही के संकेत मिले हैं. बोट में क्षमता से अधिक यात्री, खराब मौसम और तकनीकी खामियां की आशंका से कई सवाल खड़े हो रहे हैं.वियतनाम बोट हादसा: टल सकती थीं 15 मौतें, क्या लापरवाही की वजह से हुआ हादसा? Zoomइस हादसे में 15 भारतीयों की दर्दनाक मौत हो गई.

Vietnam Speedboat Accident: वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास शनिवार को हुआ हादसा क्या टल सकता था? शुरुआती जांच रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं थी. इसमें कई तरह की लापरवाहियां बरती गई और इस कारण 15 भारतीयों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इस हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई, जबकि 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. सभी भारतीय एक कॉरपोरेट कंपनी की ओर से आयोजित रिवॉर्ड ट्रिप पर वियतनाम गए थे.

स्पीडबोट में कुल 36 लोग सवार थे. इनमें 32 भारतीय पर्यटक और चार क्रू मेंबर शामिल थे. हादसा होन मे रुट नगोआई द्वीप से करीब 400 मीटर दूर हुआ, जब अचानक स्पीडबोट पलट गई. मृतकों में 13 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं. ज्यादातर पीड़ित तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के रहने वाले थे. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी बड़ी दुर्घटना कैसे हुई. शुरुआती जांच में पांच ऐसे सवाल सामने आए हैं, जिनके जवाब पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकते हैं.

पहला सवाल- क्या स्पीडबोट में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे?

जांच का सबसे अहम पहलू यही है कि जिस स्पीडबोट का रजिस्ट्रेशन नंबर AG 26751 था, उसमें कितने लोगों को ले जाने की अनुमति थी. हादसे के समय उसमें 36 लोग मौजूद थे. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी स्पीडबोट पर तय सीमा से ज्यादा भार हो जाए तो ऊंची लहरों के बीच उसका संतुलन तेजी से बिगड़ सकता है. ऐसे में जांच एजेंसियां बोट की आधिकारिक क्षमता, यात्रियों की संख्या और वजन के वितरण का पूरा गणित खंगाल रही हैं.

दूसरा सवाल- यात्री पलटी हुई नाव के अंदर कैसे फंस गए?

बचाव अभियान में शामिल स्थानीय नाव चालकों ने बताया कि कई लोगों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल था, क्योंकि वे उलट चुकी नाव के अंदर फंस गए थे. अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या बोट का केबिन ऐसा था, जिससे पलटने के बाद बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया. यह भी देखा जा रहा है कि क्या आपातकालीन निकास स्पष्ट रूप से चिन्हित थे और क्या रवाना होने से पहले यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई थी. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि क्या सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनने के निर्देश दिए गए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि बंद केबिन में कुछ परिस्थितियों में लाइफ जैकेट भी लोगों को बाहर निकलने में बाधा बन सकती है, क्योंकि वह व्यक्ति को ऊपर की ओर धकेल देती है और वह छत से टकराकर फंस सकता है.

तीसरा सवाल- क्या कप्तान ने खराब मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज किया?

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि हादसे के समय समुद्र में तेज हवाएं और ऊंची लहरें थीं. हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि उसी इलाके में दूसरी पर्यटन नौकाएं भी चल रही थीं और उनके साथ कोई हादसा नहीं हुआ. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्पीडबोट के कप्तान ने मौसम विभाग या तटरक्षक बल की चेतावनी के बावजूद यात्रा जारी रखी. जांच में उस दिन के मौसम के रिकॉर्ड, समुद्री परिस्थितियों और कप्तान के फैसलों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी.

चौथा सवाल- क्या स्पीडबोट तकनीकी रूप से सुरक्षित थी?

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बोट की तकनीकी स्थिति भी है. अधिकारी यह पता लगाएंगे कि स्पीडबोट का रखरखाव समय पर हुआ था या नहीं. इसके लिए मेंटेनेंस रिकॉर्ड, निरीक्षण प्रमाणपत्र और इंजन से जुड़ी तकनीकी रिपोर्ट की जांच होगी. यह भी देखा जाएगा कि हादसे से ठीक पहले कहीं इंजन बंद तो नहीं हुआ या स्टीयरिंग सिस्टम ने काम करना बंद तो नहीं कर दिया. साथ ही यह भी जांच होगी कि बोट के ढांचे में पहले से कोई दरार या कमजोरी तो मौजूद नहीं थी, जिससे पानी तेजी से अंदर भर गया.

पांचवां सवाल- क्या पर्यटन बढ़ने के साथ सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ गई?

फु क्वोक द्वीप पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में यहां 13 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक पहुंचे हैं. इतनी तेजी से बढ़ते पर्यटन के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या स्थानीय समुद्री प्रशासन सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन करवा पा रहा था. जांच एजेंसियां यह भी देखेंगी कि स्पीडबोट संचालित करने वाली कंपनी ‘ओशन पर्ल आइलैंड कंपनी’ के पास सभी जरूरी लाइसेंस थे या नहीं. साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या नियमित सुरक्षा निरीक्षण किए जा रहे थे या केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं.

About the Authorसंतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

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