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कम खर्च में खेती से ज्यादा मुनाफा, ‘सरल हाई पावर’ से बढ़ेगा उत्पादन, कीट-रोग दूर, किसानों को होगा डबल फायदा

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घर पर आसान तरीके से बनाएं सरल हाई पावर, फसलों का बढ़ेगा उत्पादन

Last Updated:April 21, 2026, 15:06 IST

Agriculture news : कम लागत में ज्यादा उत्पादन की तलाश कर रहे किसानों के लिए ‘सरल हाई पावर’ देसी फॉर्मूला तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. गोमूत्र और चुने से तैयार यह घोल फसल की वृद्धि बढ़ाने, मिट्टी सुधारने और कीटों से बचाव में मददगार है. आसान और सस्ता होने के कारण किसान इसे तेजी से अपना रहे हैं.

भीलवाड़ा – खेती में बेहतर उत्पादन और कम लागत के उपायों की तलाश में जुटे किसानों के लिए “सरल हाई पावर” एक कारगर देसी फॉर्मूला बनकर उभर रहा है. यह घोल पूरी तरह स्थानीय और आसानी से उपलब्ध सामग्रियों से तैयार किया जाता है, जिससे फसल की बढ़त में तेजी आती है और उत्पादन में भी  वृद्धि देखी जा रही है. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा खर्च नहीं होता, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से इसका उपयोग कर सकते हैं. यह फॉर्मूला मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ पौधों की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.

“सरल हाई पावर” बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान है और इसे किसान अपने खेत पर ही तैयार कर सकते हैं. इसके लिए 1.5 लीटर गोमूत्र और तम्बाकू पान में उपयोग होने वाले 2 ट्यूब चुना लिया जाता है. इन दोनों को 13.5 लीटर साफ पानी में अच्छी तरह मिलाया जाता है. इस मिश्रण को तैयार करने के बाद इसे कुछ समय के लिए ढककर रखा जाता है, ताकि सभी तत्व अच्छी तरह घुल-मिल जाएं. इसके बाद यह घोल छिड़काव के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है और खेत में उपयोग किया जा सकता है.

इस घोल का छिड़काव फसलों पर नियमित अंतराल पर करने से पौधों की वृद्धि में तेजी आती है. खासकर शुरुआती अवस्था में इसका उपयोग करने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और उनकी बढ़त समान रूप से होती है.  इसके उपयोग से पत्तियों का रंग गहरा हरा हो जाता है, जो पौधों के अच्छे स्वास्थ्य का संकेत है. साथ ही यह घोल फसल को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व भी प्रदान करता है, जिससे पौधे तेजी से विकसित होते हैं और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है.

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सरल हाई पावर का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह प्राकृतिक तत्वों से तैयार होता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है. रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से जहां जमीन की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं इस देसी घोल के उपयोग से मिट्टी की संरचना बेहतर होती है. यह घोल मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणुओं को भी सक्रिय करता है, जिससे जमीन लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है. यही कारण है कि जैविक खेती की ओर बढ़ रहे किसान इसे तेजी से अपना रहे हैं.

इसके अलावा यह घोल फसलों को कीट और रोगों से बचाने में भी सहायक माना जाता है. गोमूत्र में मौजूद तत्व प्राकृतिक कीटनाशक का काम करते हैं, जबकि चुना फसल पर लगने वाले फफूंद और अन्य संक्रमण को कम करने में मदद करता है. इसके नियमित उपयोग से रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटती है, जिससे लागत कम होती है और उत्पादन सुरक्षित रहता है. किसान इसे एक सस्ता और असरदार विकल्प मान रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है.

“सरल हाई पावर” के उपयोग से उनकी फसलों में पहले की तुलना में बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं. उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ-साथ गुणवत्ता भी सुधरी है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिल रही है. खासकर सब्जी और अनाज की फसलों में इसका सकारात्मक असर देखने को मिला है. कम लागत में अधिक लाभ मिलने के कारण यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और किसान एक-दूसरे को भी इसके बारे में जागरूक कर रहे हैं.

कृषि विभाग भी किसानों को ऐसे देसी और कम लागत वाले उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.  यदि किसान इस तरह के प्राकृतिक घोलों का सही तरीके से उपयोग करें, तो वे अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं. “सरल हाई पावर” जैसे उपाय न केवल उत्पादन बढ़ाते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देते हैं. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि आने वाले समय में यह देसी फॉर्मूला किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प बन सकता है.

First Published :

April 21, 2026, 15:06 IST

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