दिमाग में जमा कचरे को निकालना है तो करें ये काम, नई रिसर्च में बताया गया फॉर्मूला, ब्रेन डिटॉक्स का है आसान तरीका

Last Updated:August 27, 2026, 15:52 IST
How to remove brain garbage: जिस तरह किसी भी चीज को बनाने में कुछ न कुछ कचरा जरूर होता है, उसी तरह हमारे शरीर में भी कचरा जमा होता है और हमारे दिमाग में भी कचरा जमा होता है. इसे निकालने के लिए सिस्टम बना हुआ है लेकिन जब कचरे की मात्रा बढ़ जाए तो इसे निकालना जरूरी हो जाता है. पर इसे निकालने के लिए क्या तरीका है. वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक साइंटिक फॉर्मूला निकाला है. आइए इसके बारे में जानते हैं.
ब्रेन को ज्यादा शार्प बनाने का तरीका.
How to clean brain: ब्रेन हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. ब्रेन अगर सही नहीं है तो इस शरीर का कोई मतलब नहीं. ब्रेन से पूरे शरीर का नियंत्रण होता है. ब्रेन के अंदर सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूड -CSF निरंतर इधर से उधर होता है. इससे ब्रेन के अंदर कई प्रक्रियाएं चलती रहती है. हमारे शरीर में कई चीजें बनती रहती है. जैसे प्रोटीन के बनने से कचरे के रूप मेंबीटा-एमीलोयड बनता है. उसी तरह टाउ प्रोटीन बनता है. ब्रेन का जब इस्तेमाल होता है उस दौरान एनर्जी बनती है. एनर्जी बनने के दौरान बाय प्रोडक्ट के रूप में लैक्टेट और अमोनिया बनता है. साथ जब कोशिकाएं मरती है तो उसका अवशेष भी रहता है. ये सारी चीजें दिमाग में कचरे की तरफ जमा होने लगती है. अगर यह साफ न हो तो ये सब न्यूरॉन्स के बीच जमा होकर प्लाक बनाने लगता है. इन सबसे कई तरह का नुकसान है. ऐसे में वैज्ञानिकों ने इस कचरे को साफ करने का एक तरीका निकाला है.
कैसे होगा दिमाग का कचरा साफ
मेलबर्न की विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ने अपने नए शोध में बताया कि खास तरह की एक्सरसाइज दिमाग के इस कचरे को साफ कर सकती है. रिसर्च के अनुसार एक्सरसाइज से रक्त वाहिकाएं बेहतर तरीके से काम करती हैं. ब्लड फ्लो बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर भी कम होता है. इससे दिमाग में सूजन कम करने में भी मदद मिल सकती है. दरअसल, दिमाग के कचरे को साफ करने के लिए शरीर में ऑटोमेटिक सिस्टम बना हुआ है. लेकिन खास तरह की एक्सरसाइज की जाए तो इन कचरों को बेहतर तरीकों से साफ किया जा सकता है.दरअसल, हमारे दिमाग में एक खास सिस्टम होता है, जिसे ग्लिम्फेटिक सिस्टम कहते हैं. यह दिमाग से बेकार और हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है. जब हम नींद में होते हैं तो यह काम बेहद तेजी से और अच्छे तरीके से होता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर हम इस ग्लिम्फेटिक सिस्टम को सही कर लेंगे तो दिमाग का कचरा आसानी से साफ हो जाएगा. अगर यह सिस्टम ठीक से काम न करे, तो दिमाग में नुकसान पहुंचाने वाले प्रोटीन और अन्य कचरा जमा हो सकता है. शोध में यह भी कहा गया है कि अगर दिमाग का कचरा सही से साफ नहीं होता है तो डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है यानी याददाश्त से संबंधित समस्याएं होने लगती है.
अच्छी नींद हो सकती है सबसे अहम कड़ी
ग्लिम्फेटिक सिस्टम गहरी नींद के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होता है. लेकिन आज के समय में नींद न आना बहुत बड़ी समस्या बन गई है. उम्र बढ़ने के साथ ही अक्सर नींद की समस्या बढ़ती जाती है. इसी उम्र में दिमाग को खुद की मरम्मत और सफाई की भी ज्यादा जरूरत होती है. लेकिन नियमित एक्सरसाइज करने से नींद की क्वालिटी बेहतर हो सकती है और इससे दिमाग की सफाई भी बेहतर हो सकती है.
डायबिटीज वालों के लिए क्यों है जरूरी
जिन लोगों को डायबिटीज हैं, उन्हें दिमागी कचरे के जमा होने का खतरा ज्यादा है. क्योंकि डायबिटीज का संबंध भी रक्त वाहिकाओं की बीमारी, सूजन, नींद की समस्या और डिमेंशिया से जुड़ा हुआ है. एक्सरसाइज इन सभी चीजों पर एक साथ असर डाल सकती है. यह इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर करती है. साथ ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है और नींद सुधार सकती है. संभव है कि यह दिमाग से बेकार पदार्थों की सफाई में भी मदद करे. वैज्ञानिकों को अभी यह पता लगाना है कि किस तरह की एक्सरसाइज, कितनी देर और किस समय करना सबसे ज्यादा फायदेमंद है. हो सकता है एरोबिक एक्सरसाइज, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या दोनों का मिश्रण अलग-अलग तरह से फायदा पहुंचाए. लेकिन सही जवाब मिलने का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. इससे पहले अगर आप नियमित रूप से अपने शरीर को चलाते-फिराते है तो दिमागी कचरे को साफ करने में आसानी होगी.
About the AuthorLakshmi Narayan
मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
August 27, 2026, 15:52 IST



