Nagaur News: न फीस, न इनाम…30 साल से निस्वार्थ पशु सेवा, 5 हजार से ज्यादा प्रसव में मदद कर चुके सीताराम

Last Updated:August 16, 2026, 11:45 IST
नागौर के मिंडा कस्बे के 63 वर्षीय सीताराम कुमावत पिछले करीब 30 वर्षों से निस्वार्थ भाव से पशुओं की सेवा कर रहे हैं. गाय, भैंस, भेड़ या बकरी के प्रसव में परेशानी की सूचना मिलते ही वे अपना काम छोड़कर मौके पर पहुंच जाते हैं. अब तक वे 5 हजार से अधिक पशुओं के सुरक्षित प्रसव में मदद कर चुके हैं. न कोई शुल्क लेते हैं, न इनाम की उम्मीद रखते हैं. उनके सेवा भाव ने उन्हें आसपास के गांवों में ‘बेजुबानों का दोस्त’ बना दिया है.
आज के दौर में जहां लोग अपने निजी जीवन और व्यस्तताओं तक सीमित होते जा रहे हैं. वहीं मिंडा कस्बे के 63 वर्षीय सीताराम कुमावत पिछले करीब तीन दशक से ऐसी सेवा में जुटे हैं, जिसमें न कोई शुल्क है और न किसी इनाम की उम्मीद. गाय, भैंस, भेड़ या बकरी के प्रसव में परेशानी की सूचना मिलते ही सीताराम अपना काम छोड़कर पशुपालक के घर पहुंच जाते हैं, उनका यही सेवा भाव अब आसपास के गांवों में अलग पहचान बन चुका है.
सीताराम पेशे से मिंडा कस्बे में किराना की दुकान चलाते हैं, लेकिन उनकी दूसरी पहचान पशुओं के लिए मददगार के रूप में है. गांव-ढाणियों में जब किसी पशु का प्रसव सामान्य तरीके से नहीं हो पाता और पशुपालक परेशान हो जाता है, तो सबसे पहले सीताराम को याद किया जाता है. वर्षों के अनुभव के कारण उन्हें प्रसव के दौरान आने वाली मुश्किलों की अच्छी समझ हो गई है और वे अपने अनुभव के आधार पर कई जटिल मामलों में पशुपालकों की मदद कर चुके हैं.
करीब 30 वर्षों के इस सफर में सीताराम अब तक 5 हजार से अधिक गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों का सुरक्षित प्रसव कराने में मदद कर चुके हैं. यह आंकड़ा केवल उनकी सेवा के विस्तार को नहीं बताता, बल्कि ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों के भरोसे की कहानी भी कहता है. कई पशुपालकों का मानना है कि समय पर उनकी मदद मिलने से अनेक पशुओं और नवजात बच्चों की जान बच सकी है.
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सीताराम के लिए यह काम कमाई का जरिया नहीं है. वे पशुपालकों से किसी तरह का शुल्क नहीं लेते, उनका कहना है कि बेजुबान पशु अपनी परेशानी किसी को बता नहीं सकते, ऐसे में उनकी मदद करना इंसान का दायित्व है. इसी सोच के साथ उन्होंने वर्षों पहले शुरू की गई इस सेवा को आज भी जारी रखा है. किराना की दुकान उनकी रोजी-रोटी है, लेकिन पशु सेवा उनके जीवन का ऐसा हिस्सा बन चुकी है, जिसे वे किसी परिस्थिति में छोड़ना नहीं चाहते.
बिना किसी प्रचार और पारिश्रमिक के तीन दशक से जारी सीताराम की यह सेवा ग्रामीण समाज में इंसान और पशु के बीच संवेदना की मिसाल पेश करती है. उन्होंने अब तक हजारों पशुओं के सुरक्षित प्रसव में मदद की है और आज भी जरूरत पड़ने पर उसी तत्परता से मौके पर पहुंचते हैं. उनके लिए गोसेवा कोई दिखावा नहीं, बल्कि धर्म, सेवा और मानवता से जुड़ा दायित्व है. यही वजह है कि क्षेत्र के लोग उन्हें बेजुबान पशुओं का दोस्त कहकर पुकारते हैं.
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August 16, 2026, 11:45 IST



