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दुनिया के वो 5 बल्लेबाज…जिन्होंने टी20 वर्ल्ड कप में जड़े सबसे तेज शतक, एक बैटर का दो बार आया नाम

नई दिल्ली. टी20 क्रिकेट का फॉर्मेट ‘स्पीड’ और ‘जोखिम’ पर टिका है. लेकिन जब इस छोटे प्रारूप के महाकुंभ यानी टी20 वर्ल्ड कप में कोई बल्लेबाज शतक जड़ता है, तो वह केवल एक स्कोर नहीं होता, बल्कि वह एक ‘स्टेटमेंट’ होता है. टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में कुछ ऐसी पारियां खेली गई हैं, जिन्होंने न केवल गेंदबाजों के हौसले पस्त किए, बल्कि क्रिकेट के आंकड़ों की किताबों को भी दोबारा लिखने पर मजबूर कर दिया. बात 11 सितंबर 2007 की है, जब टी20 वर्ल्ड कप का आगाज हुआ था. जोहान्सबर्ग के मैदान पर वेस्टइंडीज के क्रिस गेल ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जो किया, उसने क्रिकेट जगत को हमेशा के लिए बदल दिया. गेल ने उस दिन अपनी बल्लेबाजी का रौद्र रूप दिखाया और 50 गेंदों में शतक ठोक डाला. वह टी20 वर्ल्ड कप इतिहास का पहला शतक था, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि इस टूर्नामेंट में गेंदबाजों के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं है.

क्रिस गेल (Chris Gayle) यहीं नहीं रुके. लगभग नौ साल बाद, 16 मार्च 2016 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में उन्होंने फिर से वही करिश्मा दोहराया. इंग्लैंड के खिलाफ खेलते हुए गेल ने एक बार फिर अपनी ताकत का परिचय दिया और इस बार उन्होंने 47 गेंदों में शतक जड़कर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और उनका ‘यूनिवर्स बॉस’ वाला रुतबा आज भी कायम है. 47 गेंदों में शतक उस समय तक का वर्ल्ड कप का सबसे तेज शतक बन चुका था.

टी20 वर्ल्ड कप में सबसे तेज शतक जड़ने वाले पांच बल्लेबाज.

एक नया और आक्रामक युगदशक दर दशक क्रिकेट का खेल बदलता रहा है.2026 का साल टी20 इतिहास के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ, जब नई पीढ़ी के बल्लेबाजों ने पुरानी सीमाओं को तोड़कर एक नई इबारत लिखी. फरवरी 2026 का अंत क्रिकेट प्रशंसकों के लिए अविस्मरणीय रहा. 24 फरवरी 2026 को इंग्लैंड के हैरी ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ मैदान में उतरते ही कोहराम मचा दिया. उन्होंने 50 गेंदों में शतक पूरा किया. ब्रूक का यह प्रदर्शन वैसा ही था जैसे 2007 में गेल का. उन्होंने दिखाया कि कैसे तकनीक और आक्रामकता का मेल बड़े टूर्नामेंटों में मैच का रुख मोड़ सकता है.

असंभव का मुमकिन होनामार्च 2026 की शुरुआत ने तो जैसे क्रिकेट के सारे रिकॉर्ड्स को आईना दिखा दिया. यह समय था जब बल्लेबाजी एक अलग ही स्तर पर पहुंच गई थी. 4 मार्च 2026 को न्यूजीलैंड के फिन एलेन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जो किया, उसे देखने के बाद क्रिकेट पंडित भी हक्के-बक्के रह गए. एलेन ने महज 33 गेंदों में शतक पूरा कर लिया. यह केवल एक शतक नहीं था, यह टी20 वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे तेज शतक था। महज 33 गेंदों में 100 रन बनाना यह दर्शाता है कि आधुनिक क्रिकेट अब ‘पावर हिटिंग’ के किस चरम पर पहुंच चुका है. एलेन ने मैदान के चारों ओर शॉट्स लगाए और दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों को संभलने का मौका तक नहीं दिया. इसके ठीक एक दिन बाद, 5 मार्च 2026 को इंग्लैंड के जैकब बेथेल ने भारत के खिलाफ अपना जलवा बिखेरा. उन्होंने 45 गेंदों में शतक जड़कर यह साबित कर दिया कि यह हफ्ता बल्लेबाजों के नाम रहा है. बेथेल की पारी में आत्मविश्वास और नजाकत का अद्भुत मिश्रण था.

खेल का बदलता स्वरूपक्रिस गेल के 2007 के 50 गेंदों वाले शतक से लेकर फिन एलेन के 2026 के 33 गेंदों वाले रिकॉर्ड तक, टी20 वर्ल्ड कप ने एक लंबा सफर तय किया है. यह सफर केवल रनों का नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता का है जो अब टी20 क्रिकेट में हावी हो गई है’डर का त्याग’. आज का बल्लेबाज क्रीज पर टिकने के लिए नहीं, बल्कि विपक्षी टीम के मनोबल को तोड़ने के लिए आता है. चाहे वह गेल का स्वैग हो, ब्रूक की क्लास हो, या एलेन की विनाशकारी गति.इन खिलाड़ियों ने हमें सिखाया है कि टी20 वर्ल्ड कप में चमत्कार किसी भी ओवर में हो सकता है. यह खेल अब केवल कौशल का नहीं, बल्कि साहस का खेल बन चुका है, और इन रिकॉर्ड्स ने इस खेल को और भी अधिक रोमांचक बना दिया है.

टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड किस बल्लेबाज के नाम है?टी20 वर्ल्ड कप में सबसे तेज शतक लगाने का रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के फिन एलेन के नाम है. उन्होंने 4 मार्च 2026 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ महज 33 गेंदों में शतक जड़कर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की.

टी20 वर्ल्ड कप में शतक लगाने वाला पहला खिलाड़ी कौन था?टी20 वर्ल्ड कप का पहला शतक वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल ने लगाया था. उन्होंने टूर्नामेंट के पहले एडिशन (2007) में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 11 सितंबर 2007 को 50 गेंदों में यह शतक जड़ा था.

हैरी ब्रूक और जैकब बेथेल की पारियां टी20 क्रिकेट के बारे में क्या संकेत देती हैं?हैरी ब्रूक (50 गेंद) और जैकब बेथेल (45 गेंद) जैसी पारियां टी20 क्रिकेट में नई पीढ़ी के बल्लेबाजों की निडरता और आक्रामकता को दर्शाती हैं. ये पारियां साबित करती हैं कि मॉडर्न क्रिकेट में खिलाड़ी बड़े टूर्नामेंट के दबाव में भी गेंदबाजों पर हावी होने और तेजी से स्कोर बनाने की मानसिकता के साथ क्रीज पर उतर रहे हैं.

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