न दहेज न दिखावा, सीकर के बुरानिया परिवार ने शादी में लिया सिर्फ 1 रुपया और नारियल, संस्कारों पर रिश्ता तय

Last Updated:July 08, 2026, 12:32 IST
खाटूश्यामजी क्षेत्र के बुरानिया परिवार ने दहेज प्रथा के खिलाफ अनोखी मिसाल पेश की है. किसान परिवार ने शादी में न लाखों रुपये लिए और न कोई कीमती सामान, बल्कि सिर्फ 1 रुपया और एक नारियल का शगुन स्वीकार कर समाज को दहेज मुक्त विवाह का संदेश दिया. वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के जरिए परिवार ने साबित किया कि रिश्ते धन-दौलत से नहीं, बल्कि संस्कार, सम्मान और विश्वास से बनते हैं.
मदनी निवासी अर्जुनराम बुरानिया के पुत्र सुभाष बुरानिया का विवाह मंडा निवासी पंछीलाल राबिया की पुत्री सरोज, जो राजस्थान पुलिस में कार्यरत हैं, के साथ संपन्न हुआ. विवाह समारोह पूरी सादगी और सामाजिक संदेश के साथ आयोजित किया गया. खास बात यह रही कि दहेज की जगह दोनों परिवारों ने केवल 1 रुपया और एक नारियल का आदान-प्रदान किया. इतना ही नहीं, परिवार की बेटी पिंकी बुरानिया के विवाह में भी इसी परंपरा का पालन करते हुए केवल प्रतीकात्मक शगुन लिया और दिया गया.
बुरानिया परिवार की पहचान केवल इस परंपरा तक सीमित नहीं है. किसान परिवार होने के बावजूद उन्होंने हमेशा शिक्षा को सबसे बड़ा निवेश माना. परिवार की बेटियां डॉ. सुमन बुरानिया और डॉ. प्रियंका बुरानिया चिकित्सा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं, जबकि बड़े भाई महेश कुमार बुरानिया देश की सुरक्षा में एसएसबी में कार्यरत हैं. परिवार का कहना है कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना ही सबसे बड़ा दहेज है, इसलिए आर्थिक लेन-देन की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए.
डॉ. युद्धवीर सिंह ने बताया कि इस सामाजिक सोच को आगे बढ़ाने में परिवार के दामाद डॉ. पंकज निठरवाल भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. वे जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में सहायक आचार्य हैं. उन्होंने बताया कि परिवार लगातार लोगों को यह समझाने का प्रयास करता है कि विवाह एक पवित्र संस्कार है, जिसे दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों से जोड़ना रिश्तों की गरिमा को कम करता है. उनका मानना है कि जब शिक्षित परिवार आगे आएंगे, तभी समाज में वास्तविक बदलाव संभव होगा.
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बुरानिया परिवार की इस पहल को क्षेत्र के लोग सामाजिक जागरूकता की मिसाल मान रहे हैं. ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि आज जब दहेज के कारण कई परिवार आर्थिक बोझ और सामाजिक परेशानियों का सामना करते हैं, ऐसे समय में इस तरह की पहल समाज को नई दिशा देती है. ऐसे में खाटूश्यामजी क्षेत्र के बुरानिया परिवार ने अपने व्यवहार से यह साबित कर दिया कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े अभियान से नहीं, बल्कि अपने घर से लिए गए छोटे लेकिन दृढ़ संकल्प से होती है.
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