Rajasthan

बारिश में टपकी छत, दवाइयां खराब; मौत के साये में इलाज, 60 साल पुराने खंडहरनुमा भवन में चल रहा स्वास्थ्य केंद्र

Last Updated:July 08, 2026, 12:20 IST

Ground Report: जयपुर के किशोरपुरा गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र 60 साल पुराने जर्जर स्कूल भवन में चल रहा है. बारिश के कारण छत से पानी टपकने से दवाइयां खराब हो गई हैं और भवन में हर समय गिरने का डर बना रहता है. मरीज और कर्मचारी जान जोखिम में डालकर यहां इलाज करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार शिकायत की लेकिन केवल आश्वासन मिले. स्टाफ की सेवा भावना सराहनीय है, लेकिन अब ग्रामीण सुरक्षा के लिए नए भवन की तत्काल मांग कर रहे हैं ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके.

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Jaipur News: जयपुर शहर की सीमा से सटे झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के किशोरपुरा गांव में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल बेहद चिंतनीय है. गांव का उप स्वास्थ्य केंद्र पिछले डेढ़ साल से एक ऐसे भवन में संचालित हो रहा है जो स्वयं अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. यह भवन लगभग 60 साल पुराना है और कभी सरकारी स्कूल के रूप में उपयोग में आता था. वर्तमान में यह इमारत जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है और किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है. स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण ग्रामीण आज एक ऐसी सुविधा का लाभ लेने को मजबूर हैं जो उनकी जान की दुश्मन बनी हुई है.

हाल ही में हुई जोरदार बारिश ने इस जर्जर भवन की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है. लोकल 18 की टीम ने जब मौके का जायजा लिया तो वहां की स्थिति बेहद भयावह नजर आई. भवन की छत से पानी लगातार टपक रहा था और कई कमरों में पानी का भराव होने से स्वास्थ्य केंद्र में रखी महत्वपूर्ण दवाइयां भी खराब हो गईं. दीवारों और छत में जगह-जगह दिखाई दे रही बड़ी दरारें इस बात का प्रमाण हैं कि यह इमारत अब इंसानी उपयोग के लिए पूरी तरह असुरक्षित हो चुकी है. बारिश के मौसम में इन कमरों के भीतर बैठना जोखिम उठाने के बराबर है.

बाहर बैठकर इलाज कराने को मजबूर मरीज और स्टाफग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से नए भवन के निर्माण की मांग कर रहे हैं. उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पार्षद को कई बार अवगत कराया है, लेकिन आज तक केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं. भवन की हालत इतनी दयनीय है कि कई बार स्वास्थ्यकर्मियों को कमरे के भीतर बैठना भी सुरक्षित नहीं लगता है. इस कारण वे अक्सर भवन के बाहर बैठकर मरीजों की जांच और उपचार करने को मजबूर होते हैं. यह स्थिति न केवल मरीजों के लिए असहज है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के मनोबल को भी तोड़ती है.

स्टाफ की कार्यशैली की ग्रामीणों ने की सराहनाइतनी विकट परिस्थितियों के बावजूद, गांव के लोगों ने वहां पदस्थापित चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की जमकर सराहना की है. ग्रामीणों का कहना है कि सीमित संसाधनों और जर्जर भवन के बावजूद डॉक्टर और अन्य स्टाफ समय पर पहुंचकर लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं. यदि शासन-प्रशासन की ओर से उन्हें एक नया और सुरक्षित भवन मिल जाए, तो स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी हो सकती हैं.

दुर्घटना का इंतजार कर रहा प्रशासनग्रामीणों ने चेताया है कि स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना आसपास के कई लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं. यदि किसी दिन भवन का कोई हिस्सा अचानक ढह गया तो बड़ा हादसा हो सकता है. लोगों का मानना है कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते सुरक्षित भवन की व्यवस्था करनी चाहिए. किशोरपुरा के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि उप स्वास्थ्य केंद्र के लिए जल्द नया भवन उपलब्ध कराया जाए. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो वे इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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