Rajasthan

लोगों ने उड़ाया मजाक, बसंत ने नहीं छोड़ी बांसुरी, नाक से धुन निकालने की हुनर देख संगीतकार भी करते हैं सलाम

Last Updated:August 11, 2026, 13:28 IST

Bikaner Flute Player Basant Kumar Ojha: बीकानेर के रहने वाले बसंत कुमार ओझा विरले बांसुरी वादक हैं, जो मुंह के बजाए नाक से बजाते हैं. बसंत कुमार ओझा पेशे से शिक्षक है और पिछले 30 वर्षो से बांसुरी बजा रहे हैं. फिलहाल वो देशभक्ति के रंग में डूगे हुए हैं और स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारी को लेकर रियाज कर रहे हैं. नाक से बांसुरी बजाने पर उन्हें मजाक का पात्र भी बनाया गया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उनके इस विरले प्रतिभा को कई संगीतकार तारीफ भी करते हैं. बसंत को एक ही बात का मलाल है कि जो उन्हें एक्सपोजर मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है.

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Amazon Prime DayTop Deals Insideमुंह नहीं नाक से बजाते हैं बांसुरी, बसंत का अनोखा हुनर देखकर रह जाएंगे हैरानZoomबीकानेर के बसंत कुमार ओझा नाक से बांसुरी बजाने में हैं माहिर

बीकानेर. स्वतंत्रता दिवस का पर्व और आपके कानो में बांसुरी की धुन पर वन्देमातरम गीत सुनाई दे तो आपका मन-मस्तिक इस धुन की तरफ जरूर जाएगा. बांसुरी की धुन भी नाक से बजाई जा रही हो तो आप चौकेंगे जरूर. जी हां,बीकानेर के बसंत कुमार ओझा ऐसे ही कलाकार हैं जो अपनी नाक से ऐसी मधुर बांसुरी बजाते हैं कि फिजा सुरमयी हो जाती है. बीकानेर में रहने वाले पेशे से सरकारी शिक्षक बसंत कुमार ओझा जब अलग अंदाज में बांसुरी बजाते हैं. वे होठों से नहीं अपनी नाक से बांसुरी बजाकर लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गए हैं.

वैसे तो ओझा को सभी प्रकार के वाद्य यंत्र बजाना उनका शौक है, लेकिन बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया और रोनू मजूमदार को देखकर उन्होंने बांसुरी बजाना सीखा और करीव 30 साल से बांसुरी बजा रहे हैं. 10 या 12 साल पहले उन्होंने एक बार किसी कार्यक्रम में ऐसे ही नाक से बांसुरी बजाई तो लोग मजाक करने लगे थे. हालांकि नाक से बांसुरी बजाने की कला को लेकर लोग अचंभित भी हुए. उसके बाद से वो अपनी सांसो पर नियंत्रण बनाकर नाक से बांसुरी का रियाज करते रहे.

आसान नहीं है नाक से बासुंरी बजाना

बसंत कुमार ओझा अब तक कई कार्यक्रमों में प्रस्तुतिया दे चुके हैं. अभी वे देशभक्ति के रंग में डूबे हुए हैं. स्वत्रंतता दिवस के पर्व को लेकर देश भक्ति धुनों को बांसुरी पर बजाने का रियाज करने में जुटे हैं. वहीं संगीत के क्षेत्र से जुड़े लोग एवं संगीतकार दामोदर तंवर का मानना है कि ऐसा करने के लिए बहुत ताकत की जरूरत होती है. मन और मस्तिक को योग से नियंत्रित करके हवा को बांसुरी में भेजा जाता है, जिससे यह मधुर संगीत उत्पन्न होता है. यह बहुत कठिन कार्य है, लेकिन बसंत कुमार ओझा ने इसमें निपुणता प्राप्त की है. यह हमारे लिए गर्व की बात है और बांसुरी की मधुर धुन पर देशभक्ति के गीत तो और भी अद्भुत कार्य है.

एक्सपोजर नहीं मिलने का है मलाल

बसंत कुमार ओझा देश भक्ति की भावना को नाक से बांसुरी बजाकर अभिव्यक्त कर रहे हैं. युवाओ को इस कला को सीखनी चाहिए. बीकानेर के एकमात्र ऐसे कलाकार होना भी सभी के लिए गर्व की बात है. बसंत कुमार ओझा को मलाल है कि अपने विरले गुण के बावजूद उन्हें अब तक वह एक्सपोजर और पहचान नहीं मिली है, जिसके वो हकदार हैं. उनका सपना है कि वो देश का नाम विदेशों में रोशन करे. उम्मीद यही है कि सरकार ऐसे कलाकारों को प्रोत्साहन दे ताकि वो अपनी कला से देश का मान बढ़ा सके.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Bikaner,Rajasthan

First Published :

August 11, 2026, 13:28 IST

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