14 अगस्त को ड्यूटी जॉइन करनी थी, तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचे JCO राकेश दूत, 5 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

Last Updated:August 06, 2026, 09:57 IST
Jhunjhunu Army JCO Funeral: झुंझुनूं-चिड़ावा हाईवे पर भीषण हादसे में शहीद हुए भारतीय सेना के जेसीओ राकेश कुमार दूत का उनके पैतृक गांव कोलसिया में सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया. 5 साल के मासूम बेटे ने चिता को मुखाग्नि दी. हाल ही में एजुकेशन हवलदार से JCO बने राकेश नासिक में तैनात थे और 14 अगस्त को ड्यूटी जॉइन करने वाले थे. वे परिवार के इकलौते बेटे थे. अंतिम यात्रा में ग्रामीणों और सेना के जवानों की आंखें नम हो गईं.
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दिल दहला देने वाला मंजर: 5 साल के बेटे ने दी सेना के JCO पिता को मुखाग्नि, नम हुईं आंखें
Jhunjhunu: झुंझुनूं-चिड़ावा स्टेट हाईवे पर बगड़ तिराहा बस स्टैंड के पास हुए भीषण सड़क हादसे में भारतीय सेना के जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) राकेश कुमार दूत का असमय निधन हो गया. हादसे के बाद उनके पैतृक गांव नवलगढ़ तहसील के कोलसिया में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया. सेना की टुकड़ी ने उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी. इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई है.
सैन्य सम्मान के साथ जेसीओ राकेश कुमार दूत का पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर सेना के विशेष वाहन से उनके पैतृक गांव कोलसिया लाया गया. जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा माहौल ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, राकेश तेरा नाम रहेगा’ के नारों से गूंज उठा. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. अंतिम दर्शन के लिए स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों का हुजूम उमड़ पड़ा.
5 वर्षीय मासूम बेटे ने दी मुखाग्नि, आंखें हुईं नममोक्षधाम में उस समय माहौल अत्यधिक भावुक हो गया जब राकेश कुमार के पांच वर्षीय मासूम बेटे ने अपने पिता को अंतिम बार देखा. सेना की टुकड़ी ने शस्त्र उल्टे कर गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अंतिम सलामी प्रस्तुत की. इसके बाद नियमानुसार पांच वर्षीय पुत्र ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी. अंतिम संस्कार की रस्मों के दौरान सेना के अधिकारियों ने पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा उनके मासूम बेटे को सौंपा.
हाल ही में हुए थे प्रमोट, 14 अगस्त को लौटना था ड्यूटी परराकेश कुमार दूत भारतीय सेना में एजुकेशन हवलदार के पद पर सेवारत थे. हाल ही में उनका प्रमोशन जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) के पद पर हुआ था. वह दिल्ली में अपना प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 23 जुलाई को ही छुट्टी पर अपने घर आए थे. 14 अगस्त को उन्हें नासिक स्थित अपनी मूल तैनाती पर दोबारा ड्यूटी जॉइन करनी थी, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया.
पिता भी थे पूर्व सैनिक, परिवार में इकलौते बेटे थे राकेशराकेश कुमार के पिता शीशराम दूत भी भारतीय सेना में पूर्व सैनिक रह चुके थे, जिनका वर्ष 2018 में निधन हो गया था. राकेश अपने परिवार के इकलौते बेटे थे. उनके परिवार में उनकी वृद्ध माता, पत्नी संजू, पांच साल का बेटा और एक विवाहित बहन डॉ. पूनम हैं. घर के इकलौते कमाऊ सदस्य और देश के जवान की इस असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jhunjhunu,Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
August 06, 2026, 09:57 IST



