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राजस्थान बीजेपी का ‘मिशन पसमांदा’! कांग्रेस के कोर वोट बैंक में सेंधमारी का बनाया सॉलिड प्लान

Last Updated:June 29, 2026, 13:12 IST

Rajasthan BJP Politics : राजस्थान में बीजेपी अब मुस्लिम समाज के पिछड़े तबके तक अपनी पहुंच बनाएगी ताकि आगामी पंचायत, निकाय और विधानसभा चुनावों में उसे इस वर्ग का समर्थन मिल सके. इसके लिए भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा सूबे में अगले महीने यानी जुलाई से ‘मिशन पसमांदा’ की शुरुआत करेगा. इस मिशन के जरिये बीजेपी कांग्रेस के कोर वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश करेगी. राजस्थान में करीब 40 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम वर्ग की बहुलता है.राजस्थान बीजेपी का ‘मिशन पसमांदा’! मुस्लिम वोट बैंक को जोड़ने में जुटेगी Zoomराजस्थान बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हमीद खान मेवाती ने बताया कि इस मिशन के जरिये पार्टी समाज के ग्रास रूट तक पहुंचने का प्रयास करेगी.

जयपुर. राजस्थान बीजेपी आगामी पंचायत, निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले मुस्लिम समाज के भीतर नई राजनीतिक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम करती नजर आ रही है. भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा राजस्थान में ‘मिशन पसमांदा’ की शुरुआत करने जा रहा है. इस अभियान का फोकस मुस्लिम समाज की पिछड़ी और सामाजिक रूप से वंचित उपजातियों तक भाजपा की पकड़ को मजबूत करना है. भारतीय जनता पार्टी का अल्पसंख्यक मोर्चा जुलाई से इस प्रस्तावित अभियान के जरिये मुसलमान बहुल 40 विधानसभा सीटों पर सघन जनसंपर्क करेगा.

बीजेपी की रणनीति अब अपने पारंपरिक वोट बैंक से निकल कर उस वोट बैंक तक पहुंचने की जुगत है जो अभी तक उससे दूर है. पार्टी संगठन का मानना है कि लंबे समय से मुस्लिम राजनीति सीमित नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है. जबकि पिछड़े और पसमांदा वर्ग राजनीतिक प्रतिनिधित्व में पीछे रहे हैं. इसी सोच के तहत भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा मेव, कायमखानी, कुरैशी, मंसूरी, मिरासी, देशवाली, बोहरा, सिंधी मुसलमान, पठान, गद्दी मुसलमान सहित विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संपर्क अभियान चलाएगा.

मुसलमानों में 15 फीसदी उच्च वर्ग के माने जाते हैं
अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हमीद खान मेवाती ने बताया कि इन समुदायों का प्रभाव अलवर, भरतपुर, नागौर, टोंक, जयपुर, कोटा, सीकर, झुंझुनूं, बाड़मेर, जैसलमेर और अजमेर सहित कई जिलों में माना जाता है. मेवाती के मुताबिक देशभर में रहने वाले मुसलमानों में 15 फीसदी उच्च वर्ग के माने जाते हैं. उन्हें अशरफ कहते हैं. इनके अलावा बाकी 85 फीसदी अरजाल, अजलाफ मुस्लिम पिछड़े हैं. इन्हें पसमांदा कहा जाता है. पसमांदा ऐसे मुसलमान हैं जिन्हें आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक यानी जीवन जीने के मापदंडों पर पिछड़े और दबे हुए हैं.

पसमांदा को मुख्यधारा की राजनीति में पर्याप्त अवसर नहीं मिले
राजस्थान में 200 में से करीब 40 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमान प्रमुख भूमिका में हैं. बीजेपी का अल्पसंख्यक मोर्चा इन्हीं के बीच जाकर मिशन पसमांदा चलाएगा. राजनीतिक तौर पर मुस्लिम वर्ग अलग अलग कुलीन और पिछड़ी जातियों में बंटे हुए हैं. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा इन्हीं को टारगेट करेगा. राजनीतिक रूप से इस अभियान के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं. एक तरफ कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा रही है. वहीं भाजपा भी अब उन वर्गों पर फोकस कर रही है जिन्हें पार्टी मानती है कि मुख्यधारा की राजनीति में पर्याप्त अवसर नहीं मिले. हमीद खान मेवाती का कहना है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार की कई योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव के अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंचा है.

बूथ स्तर तक मुस्लिम तबके पर पकड़ को मजबूत करेगीमेवाती के अनुसार अब संगठन स्तर पर इन योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों को सीधे पसमांदा मुस्लिम समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा. राजस्थान में भाजपा पंचायत और निकाय चुनाव तक बूथ स्तर तक मुस्लिम तबके पर पकड़ को मजबूत करेगी. भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा भविष्य के उम्मीदवारों की जमीन बनाने की दिशा में बढ़ रहा है. बीजेपी के इतिहास पर नजर डालें तो पार्टी और उसके पूर्ववर्ती दौर में मुस्लिम प्रतिनिधित्व पूरी तरह अनुपस्थित नहीं रहा है. यह तबका सरकार में मंत्री पद पर भी रहा है. असल में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में कुल मुस्लिम आबादी लगभग 62.15 लाख बताई गई थी, जो राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 9.1% थी. इसके नई जनगणना में बढ़ने की बात भी सामने आ रही है.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें

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