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सुपरस्टार पिता का फ्लॉपस्टार बेटा, 1985 में सबके स्टारडम पर पड़ा भारी, हिला डाला था अमिताभ-राजेश खन्ना का सिंहासन

Last Updated:June 29, 2026, 13:31 IST

बॉलीवुड में शुरू से ही कपूर खानदान को सफलता की गारंटी माना जाता रहा है, लेकिन इसी खानदान में एक ऐसा स्टार भी था जिसे जिंदगी भर ‘फ्लॉप स्टार’ का टैग झेलना पड़ा. इस रेप्युटेशन के बावजूद, उसने 1985 में बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई की, जिसने उस जमाने के सुपरस्टार्स अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना की गद्दी पूरी तरह हिला दी. जी हां, हम बात कर रहे हैं शोमैन राज कपूर के सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर और उनकी कल्ट क्लासिक फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ की.

नई दिल्ली. साल 1985 बॉलीवुड के इतिहास में एक अनोखा और असाधारण साल था. जहां एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन बॉक्स ऑफिस पर एक तरफा राज कर रहे थे और राजेश खन्ना भी अपनी रोमांटिक इमेज से छाए हुए थे. वहीं एक युवा एक्टर, जिसका करियर शुरू होते ही लोगों ने खत्म मान लिया था, उसने सबको हैरान कर दिया था.

हम बात करते हैं राज कपूर के सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर. जब राज कपूर की डायरेक्ट की हुई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ रिलीज हुई, तो इसने रिकॉर्ड तोड़ कमाई की और उस साल की सभी बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया. तो आइए, इस ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर की सफलता और इसके शानदार इतिहास के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.

‘राम तेरी गंगा मैली’ बहुत कम बजट में बनी थी, लेकिन रिलीज होने पर, सिंगल-स्क्रीन थिएटर में टिकटों के लिए बहुत भीड़ हो गई. इस फिल्म ने 1985 में बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई की, और साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई.

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ऑडियंस के जबरदस्त रिस्पॉन्स और थिएटर में महीनों तक टिके रहने की वजह से यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ‘ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर’ साबित हुई थी. फिल्म के गानों (जैसे ‘सुन साहिबा सुन’) और बैकग्राउंड स्कोर ने इसकी कमाई में इजाफा किया था.

1980 के दशक के बीच में, अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना के बीच बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त मुकाबला था. लेकिन, 1985 में राजीव कपूर की फिल्म ने जो कमर्शियल सुनामी मचाई, उसके आगे इन दोनों महान कलाकारों की फिल्में भी फीकी पड़ गईं. ‘राम तेरी गंगा मैली’ ने न सिर्फ कपूर परिवार के आरके बैनर को फिर से स्थापित किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि राज कपूर का डायरेक्शन किसी भी बड़े स्टार पावर को मात दे सकता है.

इस सोशल-रोमांटिक ड्रामा की असली यूएसपी इसका मजबूत और बोल्ड कंटेंट था. फिल्म में पहाड़ों की सादगी और शहरों के भ्रष्टाचार के बीच फंसी एक औरत (गंगा) की कहानी दिखाई गई थी. मंदाकिनी ने इसी फिल्म से डेब्यू किया था और उनके बोल्ड और मासूम किरदार ने उन्हें रातोंरात नेशनल क्रश बना दिया था.

राजीव कपूर ने नरेंद्र का रोल किया था, जो गंगा से प्यार करता है लेकिन परिवार और समाज की बंदिशों में बंधा हुआ है. हालांकि इसके बाद राजीव कपूर का करियर नहीं चला और उन्हें कई फ्लॉप फिल्में मिलीं, लेकिन इस फिल्म में उनकी सीरियस परफॉर्मेंस हमेशा याद रखी जाती है.

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