लक्ष्मीनाथ मंदिर में ‘रंग मल्हार’ का आगाज, बारिश की दुआ के साथ बॉक्स आर्ट में बिखरे रंग

Last Updated:July 12, 2026, 15:03 IST
Bikaner News: बीकानेर के ऐतिहासिक लक्ष्मीनाथ मंदिर में मानसून की अच्छी बारिश की कामना के साथ ‘रंग मल्हार’ के 17वें संस्करण की शुरुआत हुई, जिसमें 100 से 150 कलाकारों ने भाग लिया. इस वर्ष की थीम ‘बॉक्स आर्ट’ रखी गई है, जहाँ कलाकार लकड़ी, गत्ते और लोहे के बॉक्स पर चित्रकारी कर रहे हैं. चित्रकार कमल किशोर जोशी ने बताया कि इसका उद्देश्य पर्यावरण और प्रकृति का संदेश देना है, और वे स्वयं इस पर बीकानेर की प्रसिद्ध उस्ता कला उकेर रहे हैं.
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Bikaner News: मानसून की अच्छी बारिश और प्रकृति की खुशहाली की मंगलकामना के साथ बीकानेर के ऐतिहासिक लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर में ‘रंग मल्हार’ के 17वें संस्करण का रविवार को भव्य आगाज हुआ. शहर के इस पारंपरिक और अनूठे कला उत्सव में नन्हे बच्चों से लेकर वरिष्ठ और सिद्धहस्त कलाकारों तक, करीब 100 से 150 चित्रकारों का हुजूम उमड़ा है. ये सभी कलाकार अपनी सृजनात्मकता और कल्पनाओं को जीवंत रंगों के माध्यम से साकार करने में जुटे हैं.
हर वर्ष किसी नए और रचनात्मक विषय पर आधारित होने वाले इस आयोजन में इस बार कलाकारों को कैनवास की जगह विभिन्न प्रकार के बॉक्स पर चित्रकारी करने का अनूठा अवसर दिया गया है. क्यों है खास? कलाकार लकड़ी, गत्ते और लोहे से बने अलग-अलग आकार, वजन और डिजाइन के बॉक्सों पर अपनी कला उकेर रहे हैं. किसी कलाकार ने अपनी कला के लिए पारंपरिक लोक शैली को चुना है, तो कोई आधुनिक (मॉडर्न) आर्ट के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहा है. इसके चलते पूरा लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर एक जीवंत ‘ओपन एयर आर्ट गैलरी’ में तब्दील हो चुका है.
उस्ता कला से सज रहे हैं लकड़ी के बॉक्सआयोजन से जुड़े विख्यात चित्रकार कमल किशोर जोशी ने बताया कि ‘रंग मल्हार’ का मुख्य उद्देश्य केवल कला का प्रदर्शन करना नहीं है, बल्कि अच्छी वर्षा, पर्यावरण संरक्षण और समाज को प्रकृति से जोड़ने का एक सकारात्मक संदेश देना भी है. कमल किशोर स्वयं इस अनूठे उत्सव में 4 से 5 इंच चौड़े और 14 से 15 इंच लंबे एक विशेष लकड़ी के बॉक्स (वजन करीब 500 ग्राम) पर चित्रकारी कर रहे हैं. वे इस बॉक्स पर बीकानेर की विश्वप्रसिद्ध उस्ता कला को जीवंत कर रहे हैं, ताकि स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सके.
कला प्रेमियों और श्रद्धालुओं का लगा तांतारंग-बिरंगे बॉक्स, कलाकारों की सृजनात्मकता और मंदिर परिसर के आध्यात्मिक व पवित्र वातावरण ने इस कला उत्सव को बेहद खास बना दिया है. मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में कला प्रेमी भी यहाँ पहुँच रहे हैं. लोग कलाकारों को लाइव पेंटिंग करते देख रहे हैं और उनकी नायाब कलाकृतियों की जमकर सराहना कर रहे हैं. आयोजकों को विश्वास है कि कला के माध्यम से समाज, संस्कृति और प्रकृति को एक सूत्र में पिरोने का यह सुंदर प्रयास भविष्य में भी इसी तरह निरंतर जारी रहेगा.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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