दुकान कर्मचारी निकला 10 लाख की चोरी का मास्टरमाइंड, साड़ियों की रस्सी बनाकर भागा, 7.90 लाख बरामद

निराला समाज जयपुर। माणकचौक थाना पुलिस ने जौहरी बाजार स्थित रामलला जी का रास्ता में रतनश्री कॉम्पलेक्स की एक कपड़ा दुकान में हुई 10 लाख रुपये की चोरी का खुलासा करते हुए दुकान के ही कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी की रकम में से 7 लाख 90 हजार रुपये बरामद किए हैं।

डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा ने बताया कि 18 जून को जौहरी बाजार स्थित एम/एस पीतांबर अटायर एलएलपी के संचालक प्रदीप मुलराजानी ने माणकचौक थाने में चोरी का मामला दर्ज कराया था। परिवादी ने रिपोर्ट में बताया कि 17 जून की रात दुकान बंद कर घर जाने के बाद अगले दिन सुबह दुकान पहुंचने पर पीछे की खिड़की खुली मिली तथा लॉकर में रखे करीब 10 लाख रुपये गायब थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त जयपुर प्रथम नीरज पाठक, सहायक पुलिस आयुक्त माणकचौक पीयूष कविया तथा थानाधिकारी राकेश ख्यालिया के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तथा दुकान कर्मचारियों से पूछताछ की।
जांच के दौरान सामने आया कि दुकान में कार्यरत 21 वर्षीय सचिन प्रजापत को नकदी रखने के स्थान और दुकान की पूरी जानकारी थी। वारदात वाले दिन उसने जल्दी घर जाने की बात कही, लेकिन मौका पाकर दुकान के अंदर ही छिप गया। दुकान मालिक के जाने और दुकान बंद होने के बाद आरोपी ने तिजोरी का ताला तोड़कर उसमें रखे करीब 10 लाख रुपये निकाल लिए।
इसके बाद आरोपी ने दुकान में रखी साड़ियों को बांधकर रस्सी बनाई और पीछे की खिड़की से नीचे उतरने का प्रयास किया। हालांकि साड़ियों की रस्सी छोटी पड़ जाने के कारण उसे लगभग 10 फीट की ऊंचाई से छलांग लगानी पड़ी, जिससे उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया। इसके बावजूद वह चोरी की रकम लेकर फरार होने में सफल रहा।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने चोरी करना स्वीकार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से 7 लाख 90 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं, जबकि शेष राशि की बरामदगी के प्रयास जारी हैं।
इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
वारदात का सफल खुलासा करने में माणकचौक थानाधिकारी राकेश ख्यालिया, सहायक उप निरीक्षक सोहनलाल, हेड कांस्टेबल हरदयाल सिंह, कांस्टेबल गिरधर सिंह तथा कांस्टेबल छीतरमल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



