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बूचड़खाने बंद हो! सीएम बनते ही सुवेंदु अधिकारी का एक और मास्टरस्ट्रोक, आदेश न मानने वालों की खैर नहीं

West Bengal Public Animal Slaughter Case: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही बड़े और कड़े फैसलों का सिलसिला शुरू हो गया है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने राज्य में खुलेआम और गैरकानूनी तरीके से होने वाले पशु वध पर सख्त चाबुक चलाया है. सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने 13 मई की देर रात एक कड़ा आदेश जारी किया है, जिसके बाद अब राज्य में सड़कों, चौराहों या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर जानवरों को काटना एक बड़ा अपराध माना जाएगा. सरकार का यह कदम जन स्वास्थ्य, स्वच्छता और कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है.

सुवेंदु सरकार द्वारा जारी किए गए इस नए आदेश में सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं ताकि अवैध बूचड़खानों और सार्वजनिक पशु वध पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके. यदि कोई भी व्यक्ति इस नए नियम का उल्लंघन करता हुआ पाया गया, तो उसे 6 महीने की कैद या 1000 रुपये का जुर्माना या फिर दोनों सजाएं एक साथ भुगतनी पड़ सकती हैं. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में पुलिस और स्थानीय प्रशासन को किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए गए हैं.

पशु वध के लिए तय की गईं 5 बेहद सख्त शर्तें

अब राज्य में गाय, भैंस या अन्य मवेशियों का वध करना इतना आसान नहीं रह गया है. इसके लिए सरकार ने एक लंबी और सख्त प्रक्रिया तय कर दी है. वध केवल तभी और वहीं हो सकेगा, जब निम्नलिखित शर्तें पूरी होंगी:

सिर्फ चिन्हित स्थानों पर अनुमति: पशुओं को अब मनमर्जी से किसी भी जगह नहीं काटा जा सकेगा. इसके लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा पहले से अधिकृत और चिन्हित स्थानों का ही उपयोग करना होगा.

म्युनिसिपैलिटी की इजाजत: किसी भी पशु के वध से पहले संबंधित स्थानीय म्युनिसिपैलिटी (नगर पालिका) से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है.

उम्र सीमा का कड़ा नियम: आदेश के मुताबिक, जिन मवेशियों (भैंस, गाय आदि) को काटा जाना है, उनकी आयु कम-से-कम 14 वर्ष से अधिक होनी चाहिए. इससे कम उम्र के स्वस्थ और उपयोगी जानवरों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा.

सरकारी डॉक्टर का सर्टिफिकेट: यह सुनिश्चित करने के लिए कि काटा जाने वाला जानवर नियमों के दायरे में आता है, एक सरकारी पशु चिकित्सक का सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा. डॉक्टर की मंजूरी के बिना कोई भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी.

बीमार पशुओं पर रोक: आदेश में साफ तौर पर यह भी कहा गया है कि जिस पशु को काटा जा रहा है, वह किसी भी तरह की बीमारी से ग्रसित नहीं होना चाहिए. बीमार पशुओं का मांस मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होता है, इसलिए इस पर विशेष निगरानी रखी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन

राजनीतिक और कानूनी जानकारों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी की सरकार का यह फैसला पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के उन दिशा-निर्देशों के अनुरूप है, जिनमें सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध को अवैध ठहराया गया है. खुले में जानवरों को काटने से न केवल प्रदूषण और बीमारियां फैलती हैं, बल्कि इससे समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाएं भी आहत होती हैं. नई सरकार के इस एक्शन से पश्चिम बंगाल में अवैध मांस के कारोबार पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है.

पश्चिम बंगाल सरकार ने सार्वजनिक पशु वध को लेकर क्या नया आदेश जारी किया है? सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने 13 मई की देर रात आदेश जारी कर राज्य में सार्वजनिक स्थानों और गैरकानूनी तरीके से पशुओं को काटने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. अब वध केवल म्युनिसिपैलिटी द्वारा अधिकृत और चिन्हित स्थानों पर ही हो सकेगा.

नए नियम का उल्लंघन करने पर क्या सजा तय की गई है? यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर या बिना अनुमति के पशु वध करता है, तो उसे 6 महीने की जेल, 1000 रुपये का जुर्माना, या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं.

मवेशियों के वध के लिए सरकार ने क्या आयु सीमा निर्धारित की है? नए सरकारी आदेश के अनुसार, जिन मवेशियों (गाय, भैंस आदि) का वध किया जाना है, उनकी आयु 14 वर्ष से अधिक होनी चाहिए.

पशु वध से पहले किन लोगों या विभागों से अनुमति लेना अनिवार्य है? वध से पहले स्थानीय म्युनिसिपैलिटी (नगर पालिका) की इजाजत लेनी होगी और साथ ही एक सरकारी पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) से सर्टिफिकेट प्राप्त करना भी अनिवार्य कर दिया गया है.

क्या बीमार पशुओं का वध किया जा सकता है? नहीं, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिस पशु का वध किया जाना है, वह स्वस्थ होना चाहिए और किसी भी बीमारी से ग्रसित नहीं होना चाहिए.

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