कौन हैं अजातशत्रु? जिन्होंने इंजीनियरिंग छोड़ अध्यात्म की पकड़ ली राह, कोटा के इस मंदिर में 10 वर्षो से दे रहे सेवा

Last Updated:May 14, 2026, 15:53 IST
IIT Engineer Turns Devotee: कोटा-चित्तौड़ रोड स्थित इस्कॉन नंदग्राम धाम हरे कृष्णा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है. सुबह 4:30 बजे मंगला आरती से शुरू होने वाली भक्ति और संकीर्तन की अनोखी छटा यहां देखने को मिलती है. मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में भक्त भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. खास बात यह है कि यहां IIT और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके युवा भी भक्ति मार्ग अपनाकर मंदिर सेवा में जुटे हुए हैं. मंदिर में प्रसाद, भोजनशाला और आध्यात्मिक पुस्तकों की भी व्यवस्था की गई है.
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कोटा. राजस्थान के कोटा शहर में स्थित इस्कॉन नंदग्राम धाम इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां सुबह होने से पहले ही भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो जाती है. भोर में गूंजते हरे कृष्ण महामंत्र, संकीर्तन और भजन-नृत्य का माहौल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है. लेकिन इस मंदिर की सबसे खास बात यहां सेवा दे रहे प्रभु अजातशत्रु दास हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई और बेहतर करियर का रास्ता छोड़ अध्यात्म की राह चुन ली.
अजातशत्रु दास पिछले 10 वर्षों से इस्कॉन मंदिर से जुड़े हुए हैं और युवाओं को सनातन संस्कृति तथा भगवद्गीता का संदेश देने का काम कर रहे हैं. उन्होंने प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की, लेकिन भौतिक जीवन से अलग आध्यात्मिक जीवन को अपनाने का फैसला किया. उनका मानना है कि केवल आधुनिक शिक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में शास्त्र ज्ञान भी उतना ही जरूरी है.
अध्यात्म युवाओं को सही दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम
प्रभु अजातशत्रु दास बताते हैं कि आज की युवा पीढ़ी तेजी से नशे, तनाव और गलत आदतों की ओर बढ़ रही है. कॉलेज जीवन में कई छात्र गलत संगति का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है. ऐसे समय में अध्यात्म युवाओं को सही दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है. इसी सोच के साथ वे मंदिर में आने वाले युवाओं को भगवद्गीता पढ़ने, सकारात्मक सोच अपनाने और भारतीय संस्कृति को समझने के लिए प्रेरित करते हैं.
मंदिर में रोजाना भक्तों की जुटती है भीड़
कोटा-चित्तौड़ रोड स्थित इस्कॉन नंदग्राम धाम शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर नंदग्राम क्षेत्र में बना हुआ है. मंदिर निर्माण की शुरुआत 2 अप्रैल 2022 को हुई थी. आज यहां रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. सुबह 4:30 बजे मंगला आरती के साथ मंदिर की दिनचर्या शुरू होती है. इसके बाद भक्त हरे कृष्ण महामंत्र का जाप, संकीर्तन और भजन-नृत्य करते हैं. शाम तक यहां धार्मिक गतिविधियां जारी रहती हैं.
कोटा के प्रथम राजा भीम सिंह से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
मंदिर परिसर में भोजनशाला, प्रसाद वितरण, आध्यात्मिक पुस्तकों और पूजा सामग्री की भी व्यवस्था की गई है. मंदिर के सेवक भक्ति दास के अनुसार “नंदग्राम” नाम का इतिहास कोटा के प्रथम राजा भीम सिंह से जुड़ा है. इसी ऐतिहासिक पहचान के आधार पर मंदिर का नाम इस्कॉन नंदग्राम रखा गया. यहां यमुना नदी की तर्ज पर दीपदान स्थल भी बनाया गया है, जो श्रद्धालुओं को मथुरा-वृंदावन जैसी आध्यात्मिक अनुभूति कराता है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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