Sojat Fort I pali news I rajasthan news I जाने पाली के सोजत दुर्ग का इतिहास

Last Updated:June 20, 2026, 17:30 IST
राजस्थान के सोजत नगर में स्थित ऐतिहासिक किला अपनी प्राचीनता और समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता है. माना जाता है कि इसकी नींव गुप्तकाल में रखी गई थी और बाद में राव मालदेव जैसे शासकों ने इसे मजबूत दुर्ग के रूप में विकसित किया. लोककथाओं के अनुसार इस नगरी का संबंध राजा त्रवणसेन की पुत्री राजकुमारी सेजल से जोड़ा जाता है, जिनके नाम पर इसका नामकरण हुआ माना जाता है. यह किला मारवाड़ के कई महत्वपूर्ण शासकों और ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है, जिनमें राव चंद्रसेन का राजतिलक और वीर दुर्गादास राठौड़ की माता का अंतिम संस्कार जैसे उल्लेख शामिल हैं.
पाली. जब भी इतिहास के पन्नों को पलटा जाता है और बात राजस्थान के राजा-महाराजाओं या आलीशान किलों की आती है तो हमारे ज़हन में सबसे पहले जोधपुर के भव्य मेहरानगढ़ फोर्ट का नाम आता है, या फिर गुलाबी नगरी जयपुर के आमेर और नाहरगढ़ के किलों की तस्वीर उभरती है. लेकिन मरुधरा के आंचल में एक ऐसा किला भी मौजूद है, जो इतिहास के पन्नों में चर्चाओं में तो थोड़ा कम रहा, लेकिन उसकी प्राचीनता और शान जोधपुर और जयपुर के किलों से भी कई ज्यादा पुरानी है. एक ऐसा किला, जिसका इतिहास दिल्ली और जोधपुर की रियासतों के वजूद में आने से बहुत पहले ही लिखा जा चुका था. आज हम आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं देश-विदेश में मेहंदी नगरी के नाम से मशहूर सोजत के उस ऐतिहासिक किले और उसकी अनकही दास्तान से जिसका नामकरण राजा त्रवणसेन की चमत्कारी बेटी राजकुमारी सेजल के नाम पर हुआ था.
महान शासको की हुकूमत का जीवंत गवाह आज वैश्विक पटल पर अपनी सुगन्धित मेहंदी के लिए मशहूर सोजत सिटी का ऐतिहासिक किला अपने आंचल में सदियों पुराना वैभव समेटे खड़ा है. इतिहास के पन्नों को पलटें तो सोजत का यह प्राचीन दुर्ग वास्तुकला और सामरिक महत्व का एक ऐसा बेजोड़ नमूना है, जो राजस्थान की दो सबसे बड़ी रियासतों—जयपुर के आमेर दुर्ग और जोधपुर के मेहरानगढ़ किले से भी अधिक प्राचीन है. चारों ओर से मजबूत परकोटे से घिरा यह किला मारवाड़ के शौर्य और कई महान शासकों की हुकूमत का जीवंत गवाह रहा है.
राजकुमारी ‘सेजल’ और सोजत की स्थापना का अनोखा कनेक्शनइस ऐतिहासिक नगरी की स्थापना और इसके नामकरण के पीछे एक बेहद चमत्कारी और दिव्य लोककथा जुड़ी हुई है. मान्यता है कि इस भूभाग पर प्राचीन काल में राजा त्रवणसेन का शासन हुआ करता था. उनकी एक करीब 8-10 वर्ष की पुत्री थी, जिनका नाम राजकुमारी सेजल था. राजकुमारी सेजल को देवताओं की विशेष कलाएं प्राप्त थी और उन्हें साक्षात दिव्य शक्ति का अवतार माना जाता था. उन्हीं के पावन नाम सेजल के आधार पर इस नगरी की स्थापना हुई और समय के साथ इसका नाम बदलकर सोजत हो गया.
किले का निर्माण और स्थापत्यसोजत दुर्ग का इतिहास बेहद समृद्ध है, जिसकी नींव गुप्तकाल के समय रखी गई थी. बाद के काल में राजा त्रवणसेन और जोधपुर के प्रतापी शासक राव मालदेव जैसे राजाओं ने इस दुर्ग का जीर्णोद्धार करवाकर इसे एक अभेद्य किले के रूप में बेहद मजबूत बनाया. इसी ऐतिहासिक दुर्ग के भीतर मारवाड़ के प्रतापी शासक राव मालदेव और स्वतंत्रता के प्रथम संवाहक राव चंद्रसेन का राजतिलक हुआ था. वीर शिरोमणि दुर्गादास राठौड़ की वीर माता नेत कंवर का दाह संस्कार भी इसी पावन धरा पर हुआ था, जो इस किले के ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ा देता है.
हुल राजाओं का राज और सोजत के धार्मिक स्थलराजकुमारी सेजल के काल में सोजत के राजा रहे बांधर हुल ने लोक-आस्था को सहेजने के लिए भाखरी के नीचे मां सेजल माता का भव्य मंदिर और एक पवित्र चबूतरा बनवाया. इसके साथ ही उन्होंने पावटा जाव के पीछे प्रसिद्ध रामेलाव तालाब का निर्माण करवाया. बांधर हुल के बाद यहां लंबे समय तक हुलों का राज रहा, जिनमें राजा हरिसिंह हुल सबसे प्रसिद्ध हुए. आज यह प्राचीन किला भले ही सरकार के अधीन है, लेकिन इसके नीचे बसा सोजत शहर अपने रामेलाव तालाब, सेजल माता मंदिर, चारभुजा मंदिर, चामुंडा माता मंदिर, पुरणेश्वर धाम, भुतेश्वर मन्दिर, शितला माता मंदिर, जामा मस्जिद और ईदगाह दरगाह जैसे धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है.
राजस्थानी हीना के रूप में विश्व पटल पर पहचानसोजत का यह प्राचीन किला जिस क्षेत्र की सुरक्षा करता था, आज वह क्षेत्र दुनिया की सबसे बड़ी मेहंदी मंडी के रूप में स्थापित हो चुका है. यहां उत्पादित होने वाली मेहंदी को दुनिया भर में ‘राजस्थानी हीना’ के नाम से जाना जाता है और इसका निर्यात करीब 130 देशों में किया जाता है. कृषि और व्यापार के लिहाज से सोजत के पास से गुजरने वाली लीलड़ी व सुकड़ी नदी यहां के किसानों के लिए लाइफलाइन हैं. मेहंदी के अलावा, वर्तमान में सोजत कली चूना और अजवाइन के बंपर उत्पादन के लिए भी देश के विभिन्न राज्यों में अपनी खास पहचान रखता है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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Pali,Pali,Rajasthan



