Success Story: हार्डवेयर व्यापारी की बेटी का पहले ही अटेम्प्ट में CA फाइनल क्लियर, कोटा की कनिषा दयानी ने किया जिले का नाम

Last Updated:June 20, 2026, 06:20 IST
Kota CA Final Success Story: कोटा की कनिषा दयानी ने अपने पहले ही प्रयास में सीए फाइनल परीक्षा पास कर जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है. कनिषा ने फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल तीनों स्तर पहले ही अटेंप्ट में क्लियर किए हैं. 12वीं में 97 प्रतिशत अंक लाने वाली कनिषा ने बिना कोचिंग के केवल ऑनलाइन माध्यम से घर पर पढ़ाई की और फाइनल के दौरान रोजाना 14 घंटे अध्ययन किया. उनके पिता हार्डवेयर की दुकान चलाते हैं. जिला स्तर की टेबल टेनिस खिलाड़ी रहीं कनिषा अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और खेल-पढ़ाई के संतुलन को देती हैं.
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कोटा. सीए फाइनल परीक्षा के परिणाम में कोटा की रहने वाली होनहार छात्रा कनिषा दयानी ने शानदार सफलता हासिल करते हुए पूरे जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. कनिषा ने अपने पहले ही प्रयास में सीए (CA) के तीनों कठिन स्तरों यानी फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम हासिल की है. कनिषा ने अपनी इस सफलता से न केवल अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है बल्कि पूरे कोटा जिले का मान बढ़ाया है. परिणाम आने के बाद से ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.
अपनी इस शानदार यात्रा के बारे में बात करते हुए कनिषा ने बताया कि उन्होंने 12वीं कक्षा में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे. इसी उत्कृष्ट प्रदर्शन के दौरान उन्होंने मन में यह पूरी तरह तय कर लिया था कि उन्हें आगे चलकर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ही बनना है. 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद उन्होंने बिना समय गंवाए सीए फाउंडेशन की तैयारी शुरू कर दी थी. कनिषा ने बताया कि उन्होंने सीए का कोर्स इसलिए चुना क्योंकि यह इंजीनियरिंग और अन्य सभी पारंपरिक करियर विकल्पों से काफी अलग और सम्मानजनक है. उनका मानना है कि किसी भी व्यवसाय या उद्योग क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन और लेखांकन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, इसलिए एक सीए की भूमिका हर बिजनेस में हमेशा महत्वपूर्ण रहती है.
रोजाना 14 घंटे तक किया लगातार कठिन अध्ययनकनिषा ने अपनी पूरी सीए की तैयारी ऑनलाइन माध्यम से घर पर रहकर ही की. उनका कहना है कि सीए की परीक्षा बिल्कुल भी आसान नहीं होती है, इसके लिए निरंतर कड़े अनुशासन, धैर्य और कड़ी मेहनत की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है. अपनी पढ़ाई की रणनीति साझा करते हुए उन्होंने बताया कि शुरुआत के दिनों में वह रोजाना दो से तीन घंटे पढ़ाई किया करती थीं, जिसे उन्होंने समय के साथ-साथ धीरे-धीरे बढ़ाकर सात से आठ घंटे कर दिया था. इसके बाद जब सीए फाइनल परीक्षा का समय नजदीक आया तो उन्होंने प्रतिदिन लगभग 14 घंटे तक लगातार गंभीर अध्ययन किया जिसके सुखद परिणाम आज सबके सामने हैं.
माता-पिता के सहयोग और खेल के संतुलन से मिली मंजिलकनिषा के पिता कोटा में एक हार्डवेयर की दुकान संचालित करते हैं, जबकि उनकी माता एक कुशल गृहिणी हैं. कनिषा अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के असीम सहयोग, त्याग और उनके सही मार्गदर्शन को देती हैं. पढ़ाई के साथ-साथ कनिषा खेलों में भी बहुत गहरी रुचि रखती हैं. उन्हें टेबल टेनिस खेलना बेहद पसंद है और वह टेबल टेनिस की जिला स्तर की एक बेहतरीन खिलाड़ी भी रह चुकी हैं. कनिषा का दृढ़ता से मानना है कि पढ़ाई और खेलकूद के बीच सही संतुलन बनाए रखने से मानसिक तनाव बहुत कम होता है और दिमाग को तरोताजा रखकर बेहतर प्रदर्शन करने में बड़ी मदद मिलती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Kota,Kota,Rajasthan



