Success Story: झुंझुनू की निर्मला ने दिव्यांगता को बनाया ताकत, अब पैरालंपिक में भारत के लिए पदक है लक्ष्य

Last Updated:July 11, 2026, 07:55 IST
Jhunjhunu Para-Athlete Nirmala Success Story: झुंझुनू जिले के पदमपुरा गांव की पैरा एथलीट निर्मला संघर्ष, मेहनत और हौसले की मिसाल बन चुकी हैं. दिव्यांगता को कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बनाकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है. सीनियर नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ और लंबी कूद में दो रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने इंटरनेशनल पैरा एशियन प्रतियोगिता में भी देश के लिए पदक हासिल किया. अब उनका अगला लक्ष्य पैरालंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है. उनके पिता रामसिंह का सहयोग और वर्षों की मेहनत उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत रही है.
झुंझुनू जिले के पदमपुरा गांव की पैरा एथलीट निर्मला उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों तो शारीरिक चुनौतियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती. दिव्यांगता को अपनी कमजोरी मानने के बजाय उन्होंने उसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया. लगातार संघर्ष, अनुशासन और कड़ी मेहनत के दम पर निर्मला आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं. अब उनका अगला लक्ष्य पैरालंपिक में देश के लिए पदक जीतना है.
निर्मला की खेल यात्रा आसान नहीं रही. शुरुआती दौर में संसाधनों की कमी और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. उनके पिता रामसिंह ने बेटी के सपनों को समझा और घर पर ही नियमित अभ्यास कराना शुरू किया. हर दिन घंटों की मेहनत और परिवार के अटूट विश्वास ने निर्मला के आत्मविश्वास को नई उड़ान दी. यही मजबूत नींव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.
लगातार अभ्यास और कड़ी मेहनत का परिणाम जल्द ही दिखाई देने लगा. निर्मला ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक के बाद एक पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. स्टेट गेम्स में लगातार सफलता के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी अपनी अलग पहचान बना ली. उन्होंने सीनियर नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में निर्मला ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 मीटर दौड़ और लंबी कूद में दो रजत पदक अपने नाम किए.
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पूरे देशभर के बेहतरीन खिलाड़ियों के बीच गांव की निर्मला द्वारा ये पदक हासिल करना किसी बड़े टर्निग पॉइंट से कम नहीं हो था. इस पदक के बाद लोगों ने निर्मला की मेहनत को सराहा और उसका साथ देना शुरू कर दिया. राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने के बाद निर्मला ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने इंटरनेशनल पैरा एशियन गेम्स में देश के लिए पदक जीता.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतकर निर्मला ने बताया कि गांव की लड़कियां भी किसी से कम नहीं है. मौका मिले तो वे भी आगे का सकती है. उनकी इस उपलब्धि ने झुंझुनू ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में जाना जाने लगा. वे देश के बेहतरीन पैरा एथलीट खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गई. इन दिनों निर्मला का पूरा ध्यान आगामी एशियन पैरा प्रतियोगिताओं और आगे पैरालंपिक की तैयारियों पर है.
वह रोजाना अपनी फिटनेस और प्रैक्टिस पर पूरा ध्यान दे रही है. उनका सपना केवल प्रतियोगिता में हिस्सा लेना नहीं, बल्कि तिरंगे के लिए पदक जीतकर देश का सम्मान बढ़ाना है. इसके लिए वह हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हैं. उनके पिता ने बताया कि इस निर्मला सुबह जल्दी उठकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने के सपने को सच करने के लिए जुट जाती है. वह पूरा दिन इसकी तैयारी करती है.
निर्मला की कहानी केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष और परिवार के सहयोग की मिसाल है. उन्होंने यह साबित किया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादे और लगातार मेहनत इंसान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है. आज वह हजारों दिव्यांग खिलाड़ियों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. निर्मला ने कहा कि वे एक दिन पैरा ओलंपिक में भारत के लिए जरूर मेडल लेकर आएगी.



