मौत नहीं, जिंदगी बांटते हैं सुशील! 6 महीने में 100 से ज्यादा सांपों का रेस्क्यू कर बने वन्यजीवों के मसीहा

Last Updated:July 10, 2026, 11:56 IST
Sushil Snake Rescuer: सांप का नाम सुनते ही जहां अधिकांश लोग डर जाते हैं, वहीं सुशील ने इन्हीं जीवों को बचाने का मिशन बना लिया है. पिछले 6 महीनों में 100 से अधिक सांपों का सफल रेस्क्यू कर उन्होंने वन्यजीव संरक्षण की मिसाल पेश की है. सूचना मिलते ही सुशील बिना देरी किए मौके पर पहुंचते हैं, सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़ते हैं और उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ देते हैं. उनका उद्देश्य केवल सांपों की जान बचाना ही नहीं, बल्कि लोगों में यह जागरूकता फैलाना भी है कि अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते और उन्हें बिना वजह मारना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है. उनके इस अभियान से अब तक कई लोगों और वन्यजीवों की जान बच चुकी है.
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Snake Rescue Story: चार साल पहले एक घर की सीढ़ियों में छिपा सांप सिर्फ एक परिवार के लिए डर का कारण नहीं बना, बल्कि उसी घटना ने एक युवा के जीवन की दिशा बदल दी. आज वही, दिवराला निवासी सुशील शर्मा अजीतगढ़ सहित आपसास के कई क्षेत्रों में सांप रक्षक के नाम से पहचाने जाते हैं. बिना किसी सरकारी सहायता या फीस के ये वे अब तक सैकड़ों सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें जंगल में छोड़ चुके हैं.
साल 2022 में दिवराला गांव के जसवंत सिंह के घर की सीढ़ियों में एक जहरीला कोबरा घुस गया था. पूरा परिवार दहशत में घर से बाहर खड़ा था. उस समय सुशील शर्मा ने सांप को मारने के बजाय बांस की लकड़ी और प्लास्टिक के कट्टे की मदद से उसे सुरक्षित पकड़ लिया. जंगल में छोड़कर लौटने पर परिवार की बुजुर्ग महिला ने कहा, बेटा, तूने आज हमारी जान बचा ली. यही आशीर्वाद सुशील के लिए जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया. उन्होंने तय किया कि अब जहां भी सांप निकलेगा, उसे मारा नहीं जाएगा बल्कि सुरक्षित रेस्क्यू किया जाएगा.
सांप रेस्क्यू करने का एक रुपया भी नहीं लेते अब उनके पास प्रोफेशनल स्नेक रेस्क्यू उपकरण, स्नेक हुक, सुरक्षा जूते और अन्य जरूरी संसाधन हैं. अजीतगढ़, दिवराला, थोई, रींगस, लिसाडिया, अमरसर सहित आसपास के इलाकों में कहीं भी सांप निकलने की सूचना मिलते ही सुशील अपने निजी वाहन से मौके पर पहुंच जाते हैं. सबसे खास बात यह है कि वे इस जोखिम भरे काम के लिए एक भी रुपया नहीं लेते.
6 महीने में 100 सांप पकड़े सुशील की सेवा का दायरा हर साल बढ़ता गया. वर्ष 2022 में 12 सांपों का रेस्क्यू करने वाले इन युवाओं ने 2023 में 36, वर्ष 2024 में 60 और वर्ष 2025 में 80 सांपों को सुरक्षित बचाया. वर्ष 2026 के जून माह तक ही वे 100 से अधिक सांपों का रेस्क्यू कर चुके हैं. वर्तमान में कई बार एक दिन में पांच-पांच रेस्क्यू कॉल तक पहुंच जाती हैं.
घर और भोजन की तलाश में निकलते हैं बाहर रेस्क्यू के साथ-साथ सुशील शर्मा लोगों को जागरूक भी करते हैं. उनका कहना है कि अधिकांश सांप जहरीले नहीं होते और वे खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों की संख्या नियंत्रित कर किसानों के मित्र की भूमिका निभाते हैं. इंसानों का डर ही अक्सर उनकी मौत की सबसे बड़ी वजह बन जाता है. उनका कहना है कि बारिश के मौसम में सांप के बिल में पानी भर जाने के कारण वे सुरक्षित ठिकाने और भोजन की तलाश में घरों में घुस जाते हैं. उन्हें मारना नहीं चाहिए, बल्कि रेस्क्यू टीम को बुलाकर किसी सुरक्षित और उनके अनुकूल जगह पर छोड़ देना चाहिए.
अब तक 100 से अधिक पीपल और बरगद के पेड़ लगा चुके सुशील का जनसेवा का यह कार्य केवल सांप पड़ने तक ही सीमित नहीं है बल्कि वे पर्यावरण संरक्षण का भी कार्य करते हैं. उन्होंने अब तक 100 से ज्यादा पीपल और बरगद के पेड़ लगाए हैं. इसके अलावा गांव के श्मशान घाट भूमि पर भी 300 से अधिक पेड़ लगाकर उनकी देखभाल कर बड़ा किया है. सुशील को गायों के संरक्षण के चलते गौरक्षक रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि आसपास के 20 से 30 किलोमीटर के क्षेत्र में कोई भी एक्सीडेंट होता है तो सूचना पर वे मदद के लिए पहुंचते हैं और स्वयं के निजी खर्चे से घायलों को हॉस्पिटल लेकर जाते हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
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