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IIT Jodhpur का कमाल! आग लगने से पहले और बाद में बताएगी इमारत कितनी सुरक्षित है, AI तकनीक करेगी जान की रक्षा

Last Updated:July 07, 2026, 17:42 IST

IIT Jodhpur News: देशभर में बढ़ रही बिल्डिंग में आग लगने की घटनाओं के बीच IIT जोधपुर ने भविष्य की फायर सेफ्टी तकनीक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण शोध किया है. संस्थान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो लिमिटेड सेंसर डेटा के आधार पर आग लगने के दौरान और आग बुझाने के बाद भी इमारत की बढ़ोतरी का आकलन कर सकता है. शोध में सामने आया कि कई इमारतों को सबसे ज्यादा संरचनात्मक नुकसान कूलिंग फेज के दौरान होता है. इस तकनीक को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन और डिजास्टर मैनेजमेंट ज्यादा प्रभावी बन सकेंगे. इसके अलावा BIM, डिजिटल ट्विन, IoT और GIS जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर स्मार्ट और सुरक्षित भवन प्रबंधन पर भी काम किया जा रहा है.

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IIT Jodhpur का कमाल! आग लगने से पहले और बाद में बताएगी इमारत कितनी सुरक्षित हैZoomदेश में बढ़ती आग की घटनाओं के बीच IIT जोधपुर की बड़ी पहल!

जोधपुर. देश के विभिन्न हिस्सों में हाल के दिनों में इमारतों में आग लगने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि हुई है. ऐसी दुर्घटनाओं में न केवल जान-माल का नुकसान होता है, बल्कि इमारतों का ढांचा (स्ट्रक्चर) भी बेहद कमजोर हो जाता है. इस गंभीर समस्या का समाधान खोजने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के शोधकर्ताओं ने एक बेहद एडवांस और भविष्योन्मुखी ‘फायर सेफ्टी तकनीक’ विकसित की है. यह तकनीक आग लगने के दौरान और आग बुझने के बाद भी किसी इमारत की मजबूती और उसकी वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करने में सक्षम है.

आमतौर पर माना जाता है कि आग बुझने के बाद खतरा टल जाता है, लेकिन IIT जोधपुर के रिसर्च में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है. शोधकर्ताओं के अनुसार, कई इमारतों को सबसे बड़ा स्ट्रक्चरल नुकसान आग बुझने के बाद यानी ‘कूलिंग फेज’ (ठंडा होने की प्रक्रिया) के दौरान होता है. तापमान में अचानक आने वाले इस बदलाव से कंक्रीट और स्टील की आंतरिक ताकत कमजोर हो जाती है, जिससे इमारत के ढहने का खतरा बढ़ जाता है. IIT की यह नई तकनीक इसी नाजुक वक्त में इमारत की मजबूती को मापेगी.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेंसर का कमालIIT जोधपुर की टीम ने इस चुनौती से निपटने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार किया है. इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बेहद सीमित सेंसर डेटा (Limited Sensor Data) की मदद से भी पूरी इमारत की स्थिति और उसके ढांचे को पहुंचे नुकसान का सटीक अनुमान लगा सकता है. इसके लिए पूरी इमारत में महंगे या जटिल बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं होगी.

अर्ली वार्निंग सिस्टम और रेस्क्यू में मिलेगी मददइस तकनीक को अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System) से जोड़ा गया है. आग लगने की स्थिति में यह सिस्टम रियल-टाइम डेटा देगा कि इमारत का कौन सा हिस्सा असुरक्षित हो चुका है. इससे डिजास्टर मैनेजमेंट टीमों और रेस्क्यू ऑपरेशन (बचाव कार्य) में लगे फायर फाइटर्स को यह जानने में मदद मिलेगी कि इमारत के अंदर जाना कितना सुरक्षित है, जिससे कई मासूमों और बचाव कर्मियों की जान बचाई जा सकेगी.

स्मार्ट सिटी और सुरक्षित भवनों का निर्माणIIT जोधपुर केवल आग बुझाने या उसके आकलन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह BIM (बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग), डिजिटल ट्विन (Digital Twin), IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) और GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के घालमेल से ‘स्मार्ट और सुरक्षित भवन प्रबंधन’ पर भी काम कर रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य देश में ऐसे टिकाऊ और स्मार्ट शहरों का निर्माण करना है जो आग जैसी आपदाओं के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी हों.

शोधकर्ताओं के लिए ‘ओपन सोर्स’ सौगातइस तकनीक का लाभ समाज और उद्योग जगत को तेजी से मिले, इसके लिए IIT जोधपुर ने अपने कई महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और कंप्यूटेशनल टूल्स को ओपन सोर्स (Open Source) कर दिया है. अब देश-विदेश के सिविल इंजीनियर, आर्किटेक्ट और शोधकर्ता इन टूल्स का मुफ्त में उपयोग कर भविष्य के निर्माणों को सुरक्षित बना सकेंगे. IIT जोधपुर की यह पहल सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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