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47 साल बाद खत्म हुआ नर्मदा विवाद! राजस्थान गुजरात को देगा 550 करोड़, जालोर-बाड़मेर को मिलेगा बड़ा फायदा

जयपुर. केंद्र सरकार की पहल पर राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच करीब 47 साल से लंबित नर्मदा अवार्ड भुगतान विवाद का आखिरकार ऐतिहासिक समाधान हो गया है. नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में चारों राज्यों ने सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लंबित भुगतान विवाद के वन-टाइम सेटलमेंट समझौते पर हस्ताक्षर किए. राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस अवसर पर मौजूद रहे.

इस समझौते के साथ दशकों से चली आ रही वित्तीय अनिश्चितता खत्म हो गई है और नर्मदा नदी के जल के बेहतर उपयोग का रास्ता भी साफ हो गया है. हाल ही में यमुना जल समझौते और एमपीकेसी परियोजना के बाद यह राजस्थान के लिए जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. सरकार का मानना है कि इससे पश्चिमी राजस्थान के जल संकट वाले क्षेत्रों को भविष्य में बड़ा लाभ मिलेगा. यह विवाद नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (Narmada Water Disputes Tribunal) के वर्ष 1979 के अवार्ड के बाद शुरू हुआ था.

47 साल से लंबित नर्मदा अवार्ड भुगतान विवाद का अंत हो गया.

राजस्थान 550 करोड़ रुपये का गुजरात को  करेगा भुगतान 

न्यायाधिकरण ने राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच नर्मदा नदी के जल का बंटवारा तय किया था. इसके साथ ही सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और अन्य खर्चों में राज्यों की हिस्सेदारी भी निर्धारित की गई थी.  समय के साथ लागत बढ़ती गई और भुगतान को लेकर राज्यों के बीच मतभेद गहराते चले गए. कई दशकों तक एक-दूसरे पर हजारों करोड़ रुपये के दावे किए जाते रहे, जिससे मामला लंबित बना रहा. समझौते के तहत राजस्थान सरदार सरोवर परियोजना में अपनी कॉस्ट शेयरिंग के एवज में गुजरात को करीब 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा. इसके साथ ही वर्षों से चला आ रहा भुगतान विवाद समाप्त हो जाएगा.

वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए दावों का हुआ निपटारा

जानकारी के अनुसार, गुजरात ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान पर कुल 7,974.86 करोड़ रुपये का दावा किया था, जिसमें राजस्थान की देनदारी करीब 574.52 करोड़ रुपये बताई गई थी. वहीं मध्य प्रदेश ने गुजरात पर लगभग 7,669 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र ने करीब 3,000 करोड़ रुपये के दावे किए थे. लंबी बातचीत और आपसी सहमति के बाद सभी राज्यों ने अपने-अपने दावों का वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए निपटारा कर लिया.

राजस्थान सरदार सरोवर परियोजना में अपनी कॉस्ट शेयरिंग के एवज में गुजरात को करीब 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा

पेयजल, सिंचाई और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यह समझौता केवल वित्तीय विवाद का समाधान नहीं है, बल्कि सहकारी संघवाद की भावना का मजबूत उदाहरण भी है. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में राजस्थान ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल (एमपीकेसी) परियोजना, हथिणीकुंड बैराज से शेखावाटी क्षेत्र के लिए यमुना जल समझौता और अब नर्मदा अवार्ड विवाद के समाधान जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. इन फैसलों से प्रदेश के जल अभाव वाले क्षेत्रों में पेयजल, सिंचाई और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी.

संवाद और सहयोग से दशकों पुराने विवादों का समाधान संभव हुआ

अमित शाह ने भी समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि राज्यों के बीच संवाद और सहयोग से दशकों पुराने विवादों का समाधान संभव हुआ है. उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी राजस्थान पहुंचने के बाद किसानों की किस्मत बदली है, खेती को मजबूती मिली है और भूमि का मूल्य भी बढ़ा है. उन्होंने राजस्थान-हरियाणा जल समझौते, किशाऊ बांध परियोजना और नर्मदा समझौते को सहकारी संघवाद के उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे फैसले राष्ट्रीय हित और किसानों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

47 साल से लंबित नर्मदा अवार्ड भुगतान विवाद का हुआ अंत

• करीब 47 साल से लंबित नर्मदा अवार्ड भुगतान विवाद का अंत हो गया. केंद्र सरकार की मौजूदगी में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र ने वन-टाइम सेटलमेंट समझौते पर हस्ताक्षर किए.

• समझौते के तहत राजस्थान सरदार सरोवर परियोजना में अपनी कॉस्ट शेयरिंग के एवज में गुजरात को करीब 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा, जिससे वर्षों पुराना वित्तीय विवाद समाप्त हो जाएगा.

• यह समझौता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस पर हस्ताक्षर किए.

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में हुआ समझौता

• नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने वर्ष 1979 में जल बंटवारे का अवार्ड दिया था, लेकिन निर्माण लागत और भुगतान को लेकर राज्यों के बीच विवाद लगातार बना हुआ था.

• गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान ने वर्षों तक एक-दूसरे पर हजारों करोड़ रुपये के दावे किए. अब सभी दावों का वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए निपटारा कर लिया गया है.

• समझौते के बाद नर्मदा नदी के जल के बेहतर उपयोग का रास्ता साफ होगा और पश्चिमी राजस्थान के जल संकट वाले क्षेत्रों में पेयजल व सिंचाई योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है.

• राजस्थान सरकार वर्ष 2026-27 के बजट के तहत अधिशेष नर्मदा जल के भंडारण के लिए डीपीआर तैयार करा रही है, जिससे भविष्य में जल उपलब्धता बढ़ाई जा सकेगी.

• अमित शाह ने कहा कि नर्मदा का पानी राजस्थान पहुंचने से किसानों की किस्मत बदली है, खेती को मजबूती मिली है और भूमि के मूल्य में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

• मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे सहकारी संघवाद की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि हालिया यमुना जल समझौते और

• एमपीकेसी परियोजना के बाद यह राजस्थान के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है.

• सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक समझौते से जालोर, बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान के जल संकट वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक पेयजल सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

यह ऐतिहासिक समझौता मील का पत्थर साबित होगा

इस समझौते के बाद नर्मदा नदी के जल के बेहतर उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है. वर्ष 1979 के अवार्ड के क्लॉज IV(5) के अनुसार मानसून के दौरान उपलब्ध अधिशेष जल का उपयोग संबंधित राज्य अपने क्षेत्र में कर सकता है और यह पानी उसके निर्धारित हिस्से में नहीं जोड़ा जाएगा. इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में अधिशेष नर्मदा जल के भंडारण की योजना की घोषणा की है. इसके लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कराया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य जालोर, बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान के जल संकट वाले क्षेत्रों तक पेयजल पहुंचाना और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है. सरकार को उम्मीद है कि यह ऐतिहासिक समझौता प्रदेश की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस पर हस्ताक्षर किए.

नर्मदा अवार्ड भुगतान विवाद क्या था?

यह विवाद वर्ष 1979 के नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के अवार्ड के बाद सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और अन्य खर्चों में राज्यों की हिस्सेदारी के भुगतान को लेकर था. राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच यह मामला करीब 47 वर्षों से लंबित था.

इस समझौते में राजस्थान को क्या करना होगा?

वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) के तहत राजस्थान सरदार सरोवर परियोजना में अपनी कॉस्ट शेयरिंग के एवज में गुजरात को करीब 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा. इसके साथ ही वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद का स्थायी समाधान हो जाएगा.

इस ऐतिहासिक समझौते का सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?

समझौते से नर्मदा नदी के जल के बेहतर उपयोग का रास्ता साफ होगा. पश्चिमी राजस्थान के जल संकट वाले क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता बढ़ेगी, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा और किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

अमित शाह ने इस समझौते को लेकर क्या कहा?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह समझौता सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है. उन्होंने बताया कि राज्यों के बीच संवाद और सहयोग से दशकों पुराने विवाद का समाधान हुआ और नर्मदा का पानी राजस्थान पहुंचने से किसानों की आय, खेती और भूमि मूल्य में सुधार आया.

राजस्थान सरकार की आगे की क्या योजना है?

राजस्थान सरकार वर्ष 2026-27 के बजट के तहत अधिशेष नर्मदा जल के भंडारण के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करा रही है. इससे जालोर, बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान के जल संकट वाले इलाकों में भविष्य में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

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